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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में 'शूक्ष्म सिंचाई' (Micro-irrigation) के अंतर्गत ड्रिप (टपक) और फव्वारा (Sprinkler) सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तथा उर्वरक उपयोग दक्षता (FERTIGATION) में भी सुधार होता है।
- 2. राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture) द्वारा भारत को कुल 15 मुख्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) में विभाजित किया गया है, जिसका मुख्य आधार तापमान, वर्षा, भू-आकृति और मृदा की विशेषताओं में क्षेत्रीय भिन्नता है।
- 3. 'धान की खेती' के लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), उच्च आर्द्रता और वार्षिक वर्षा 100 सेमी से अधिक की आवश्यकता होती है, और यह मुख्य रूप से खरीफ फसल है, परंतु देश के कुछ डेल्टा क्षेत्रों (जैसे पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु) में इसे वर्ष में तीन बार (औस, अमन और बोरो) उगाया जाता है।
- 4. 'गेहूं' एक रबी फसल है जिसे पकने के समय तेज धूप और ठंडे, नम मौसम की आवश्यकता होती है, तथा इसके सफल उत्पादन के लिए 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा और सिंचित जल प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। भारत में सिंचाई और कृषि पद्धतियों के विकास के लिए विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश को 15 प्रमुख कृषि-климатическими (जलवायु) क्षेत्रों में बांटा गया है। सूक्ष्म सिंचाई जल की बचत करती है, धान की तीन किस्में (औस, अमन, बोरो) बहु-फसल प्रणाली का हिस्सा हैं, और गेहूं एक प्रमुख रबी फसल है।
Related Questions
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धताओं (Discontinuities) और चट्टानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कॉनराड असंबद्धता' (Conrad Discontinuity) ऊपरी क्रस्ट और निचली क्रस्ट के बीच अलग करने वाली सीमा है, जबकि 'मोहोरविक असंबद्धता' (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच स्थित होती है।
2. 'ग्यूटेनबर्ग असंबद्धता' (Gutenberg Discontinuity) निचली मेंटल और बाहरी कोर को पृथक् करती है, जहाँ से प्राथमिक तरंगें (P-waves) गुजर सकती हैं परंतु द्वितीयक तरंगें (S-waves) पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं।
3. 'आग्नेय चट्टानें' (Igneous Rocks) पृथ्वी के आंतरिक भाग से मैग्मा के ठंडे होने और जमने से बनती हैं, और ग्रेनाइट, बेसाल्ट, गैब्रो तथा पेग्माटाइट इसी श्रेणी के प्रमुख उदाहरण हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'लेहमान असंबद्धता' (Lehmann Discontinuity) बाहरी कोर और आंतरिक कोर के बीच स्थित होती है, जहाँ प्राथमिक तरंगों के वेग में अचानक परिवर्तन देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की विभिन्न प्रकार की मृदाओं और उनके भौगोलिक वितरण तथा रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदा का लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग जलीय योजन (Hydration) की स्थिति में परिवर्तित होने के कारण प्रकट होता है।
2. लैटेराइट मृदा का विकास उच्च तापमान और अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और लोहे तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ और नाइट्रोजन से भरपूर होती है।
3. क्षारीय और लवणीय मृदा (Usar Soil) को 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' भी कहा जाता है, जो मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु तथा खराब जल-निकास वाले क्षेत्रों में सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के केशिका आकर्षण (Capillary Action) द्वारा धरातल पर जमा होने से बनती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soil) में 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का गुण पाया जाता है, क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक गतिकी और प्लेट सीमाओं पर होने वाली प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पैलिंड्रोमिक फॉल्ट्स' (Palindromic faults) उन उत्क्रम भ्रंशों (Reverse faults) को कहा जाता है जिनमें संपीड़न बलों के समाप्त होने के पश्चात तनाव मूलक बल (Tensional forces) के कारण चट्टानों के खंड अपनी मूल स्थिति की ओर विपरीत दिशा में वापस पुनरावृत्त (Reverse slide) हो जाते हैं।
2. 'सबडक्शन जोन' (Subduction Zone) में भारी और ठंडी महासागरीय प्लेट के नीचे बैठने से उत्पन्न होने वाले भूकंपों को 'बेनिऑफ़ ज़ोन' (Wadati-Benioff Zone) के रूप में जाना जाता है, जहाँ भूकंपीय फोकस की गहराई उथले से लेकर अत्यधिक गहरी (लगभग 700 किमी तक) हो सकती है।
3. 'सुनामी तरंगें' खुले महासागर में बेहद कम ऊँचाई और लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में जहाजों को इनका आभास आसानी से हो जाता है और वहाँ इनकी गति अत्यंत धीमी होती है, जबकि तटों के समीप उथले जल में पहुँचने पर घर्षण के कारण इनकी गति तीव्र और ऊँचाई विनाशकारी हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) तथा उनके निर्माणकारी भू-वैज्ञानिक प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वलित पर्वत (Fold Mountains) मुख्य रूप से अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) पर विवर्तनिक संपीडन बलों के परिणामस्वरुप निर्मित होते हैं, जिनका उत्कृष्ट उदाहरण रॉकीज, एंडीज, आल्प्स और हिमालय पर्वतमाला हैं जो कैनेजोइक महाकल्प (Cenozoic Era) के अल्पाइन पर्वतीकरण के दौरान बने हैं।
2. पामीर का पठार (Pamir Plateau), जिसे 'विश्व की छत' कहा जाता है, एक अंतरपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का उत्कृष्ट उदाहरण है जो तियान शान, कुनलन, काराकोरम और हिंदूकुश पर्वतमालाओं के अभिसरण से घिरा हुआ है।
3. विश्व के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय मरुस्थलों (जैसे सहारा और कालाहारी) का अधिकांश विस्तार महाद्वीपों के पूर्वी तटों पर पाया जाता है, जिसका प्रमुख कारण व्यापारिक पवनों का महाद्वीपों के आंतरिक भागों की ओर बढ़ते हुए शुष्क होना तथा ठंडी महासागरीय धाराओं का प्रभाव है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ब्लैक फॉरेस्ट (जर्मनी) और वास्गेस (फ्रांस) खंड पर्वत (Block Mountains) या 'हॉर्स्ट' (Horst) के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनका निर्माण विवर्तनिक तनाव बलों (Tension Forces) के कारण धरातल के अवतलन या भ्रंशन के फलस्वरूप होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख पर्वतों, पठारों और मरुस्थलों की उत्पत्ति तथा उनकी स्थलाकृतिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'एप्सिन पर्वतमाला' (Apennines) इटली प्रायद्वीप की रीढ़ की हड्डी के रूप में उत्तर से दक्षिण तक फैली हुई एक युवा वलित पर्वतमाला है, जिसकी उत्पत्ति अल्पाइन पर्वतीकरण के दौरान अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेटों के अभिसरण के परिणामस्वरूप हुई थी।
2. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) विश्व का सबसे ऊँचा और सबसे बड़ा अंतःपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) है, जिसे 'संसार की छत' कहा जाता है, और इसकी उत्पत्ति भारतीय प्लेट तथा यूरेशियन प्लेट के महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण के कारण हुई है।
3. 'गोबी मरुस्थल' (Gobi Desert) एशिया का एक विशाल शीत मरुस्थल (Cold Desert) है, जो चीन और मंगोलिया के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है, और यह मुख्य रूप से हिमालय पर्वतमाला द्वारा निर्मित वृष्टिछाया क्षेत्र (Rain shadow area) के अंतर्गत स्थित होने के कारण शुष्क है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'पेटागोनिया मरुस्थल' (Patagonia Desert) दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा मरुस्थल है, जो एक शीत शीतोष्ण मरुस्थल (Cold Temperate Desert) है और इसकी शुष्कता का प्रमुख कारण एंडीज पर्वतमाला का वृष्टिछाया प्रभाव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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