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Geography
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दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति और भारत में वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत और पाकिस्तान के तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान के कारण विकसित होने वाला कम वायुदाब का क्षेत्र (मानसून गर्त) दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाओं को भूमध्य रेखा पार करने के बाद दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़ने के लिए आकर्षित करता है, जो कोरिolis बल का प्रत्यक्ष परिणाम है।
  2. 2. अरब सागर की शाखा भारत के पश्चिमी घाट से टकराकर अत्यधिक ओरोग्राफिक (पर्वतीय) वर्षा कराती है, जिसके कारण पश्चिमी घाट के पवन-विमुख ढाल (Leeward side) पर स्थित बेंगलुरु और पुणे जैसे क्षेत्र 'वृष्टिछाया क्षेत्र' (Rain shadow area) के अंतर्गत आते हैं और वहाँ बहुत कम वर्षा होती है।
  3. 3. बंगाल की खाड़ी की एक शाखा अरावली पर्वतमाला के लगभग समानांतर उत्तर की ओर निकल जाती है, जिसके कारण राजस्थान के पश्चिमी भाग में अरावली से कोई बड़ी बाधा न मिलने के कारण इस शाखा से मानसूनी वर्षा बहुत कम या नगण्य होती है।
  4. 4. भारत में वर्षा का स्थानिक वितरण मुख्य रूप से उच्चावच और मानसूनी हवाओं की दिशा पर निर्भर करता है, जिसके तहत मेघालय के मावसिनराम में विश्व की सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है, जो खासी पहाड़ियों की कीप जैसी आकृति (Funnel-shaped topography) के कारण होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत में बने निम्न वायुदाब (मानसून गर्त) के कारण दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ भूमध्य रेखा पार करके फेरेल के नियम और कोरिolis बल के प्रभाव से दक्षिण-पश्चिम मानसूनी हवाओं में बदल जाती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि पुणे और बेंगलुरु वृष्टिछाया क्षेत्र में आते हैं, लेकिन बेंगलुरु मुख्य रूप से वृष्टिछाया के प्रभाव से अलग और आंतरिक पठारी स्थिति के कारण भिन्न वर्षा पैटर्न अनुभव करता है, जबकि पुणे स्पष्ट रूप से पश्चिमी घाट के वृष्टिछाया क्षेत्र में स्थित है। अधिक विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि अरावली पर्वतमाला बंगाल की खाड़ी की मानसून शाखा के समानांतर स्थित है, जिससे वह मानसूनी हवाओं को रोक नहीं पाती और राजस्थान के पश्चिमी भाग में शुष्कता बनी रहती है। कथन 4 सही है क्योंकि खासी पहाड़ियों की कीप जैसी टोपोग्राफी के कारण मेघालय में भारी वर्षा होती है।
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