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Geography
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सुनामी (Tsunami) और विवर्तनिक भूकंपों (Tectonic Earthquakes) की क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सुनामी तरंगें महासागरों के गहरे जल में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और कम आयाम (Amplitude) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र से गुजरते समय जहाजों को इनका आभास आमतौर पर नहीं होता है।
- 2. जब सुनामी तरंगें उथले तटीय क्षेत्रों में प्रवेश करती हैं, तो घर्षण और गहराई में कमी के कारण उनकी तरंगदैर्ध्य अचानक बढ़ जाती है और उनका आयाम (ऊँचाई) तेजी से घट जाता है, जिससे विनाशकारी दीवार जैसी लहरें बनती हैं।
- 3. 'सुनामी' शब्द जापानी भाषा से लिया गया है जिसका शाब्दिक अर्थ 'बंदरगाह लहर' (Harbour Wave) होता है, और ये तरंगें मुख्य रूप से समुद्र तल के नीचे अचानक होने वाले विवर्तनिक उत्थान या अवतलन (Vertical Displacement) के कारण उत्पन्न होती हैं।
- 4. प्रशांत महासागर की परिधि को 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) कहा जाता है, जहाँ दुनिया के अधिकांश गहरे भूकंपीय केंद्र और सबसे अधिक सुनामी घटनाएँ अभिसारी प्लेट किनारों (Convergent Plate Boundaries) के सबडक्शन जोन के कारण दर्ज की जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
सुनामी तरंगें महासागर के गहरे पानी में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (सैकڑوں किलोमीटर) और कम ऊँचाई (कुछ सेंटीमीटर से एक मीटर) वाली होती हैं, इसलिए गहरे समुद्र में नाविकों को इनका पता नहीं चलता। लेकिन जैसे ही ये उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचती हैं, इनकी गति धीमी हो जाती है और ऊर्जा के संपीड़न के कारण उनका आयाम (ऊँचाई) अत्यधिक बढ़ जाता है, जबकि तरंगदैर्ध्य घट जाती है। अतः कथन 2 गलत है क्योंकि आयाम घटता नहीं बल्कि बढ़ता है। अन्य सभी कथन सही हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनके विशिष्ट वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदा का विकास मुख्य रूप से दक्कन पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों पर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है, तथा जल के साथ मिलने पर लौह ऑक्साइड के जलयोजन (Hydration) के कारण यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं (Arid Soils) का विस्तार मुख्य रूप से अरावली के पश्चिम में थार मरुस्थल क्षेत्र में पाया जाता है, जिनमें ह्यूमस और नाइट्रोजन की मात्रा नगण्य तथा कैल्शियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे की परतों में 'कंकड़' की परत पाई जाती है।
3. पीट और दलदली मृदाएँ (Peaty and Marshy Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मृत कार्बनिक पदार्थों के बड़े पैमाने पर संचय से विकसित होती हैं, जिनमें पोटाश और फॉस्फोरस की प्रचुरता होती है, जिससे ये मृदाएँ धान की खेती के लिए सबसे कम उपजाऊ मानी जाती हैं।
4. पर्वतीय और वन मृदाएँ (Forest and Mountain Soils) मुख्य रूप से हिमालयी क्षेत्रों में पाई जाती हैं, जहाँ ढाल के अनुसार इनकी बनावट में भिन्नता पाई जाती है, तथा घाटियों के निचले हिस्सों में ये मृदाएँ अधिक उपजाऊ और अम्लीय प्रकृति की होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख उद्योगों, औद्योगिक प्रदेशों और परिवहन तंत्र (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल व जलमार्ग) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हुगली औद्योगिक प्रदेश (Hooghly Industrial Region) भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक है, जिसका विकास मुख्य रूप से दामोदर घाटी कोयला क्षेत्रों की निकटता, हुगली नदी के नौगम्य जलमार्ग और ब्रिटिश काल में जूट उद्योग की प्रारंभिक स्थापना के कारण हुआ था।
2. राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1 (NW-1) प्रयागराज से हल्दिया तक गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर स्थित देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 1,620 किलोमीटर है।
3. भारत का पहला सूती वस्त्र कारखाना 1854 में बॉम्बे (मुंबई) में कवासजी डाबर द्वारा स्थापित किया गया था, जबकि आधुनिक रूप से सबसे पहला सफल जूट मिल वर्ष 1855 में पश्चिम बंगाल के रिसड़ा में स्थापित किया गया था।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'स्वर्ण चतुर्भुज' (Golden Quadrilateral) परियोजना भारत के चार महानगरों (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता) को जोड़ने वाली छह-लेन वाली राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना है, जिसका प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हमारे सौर मंडल के ब्रह्माण्डीय पिंडों, ग्रहों की आंतरिक संरचना, उपग्रहों और उल्कापिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ओपोर्टुनिटी' और 'क्यूरियोसिटी' रोवर जिस लाल ग्रह (मंगल) पर उतरे हैं, उसके दो छोटे प्राकृतिक उपग्रह 'फोबोस' (Phobos) और 'डिमॉस' (Deimos) हैं, जिनमें फोबोस ग्रह के सबसे नजदीक है और इसका ज्वारीय विघटन भविष्य में इसे एक वलय (Ring) में बदल सकता है।
2. 'यूरेनस' (अरुण) हमारे सौर मंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जिसके घूर्णन अक्ष का झुकाव इतना अधिक (लगभग 98 डिग्री) है कि यह अपनी कक्षा में सूर्य के चारों ओर एक 'लुढ़कते हुए गोले' (Rolling Planet) की तरह परिक्रमण करता है।
3. 'ओपोर्टुनिटी' जैसी क्षुद्रग्रह खोज अभियानों के तहत पाया गया 'वेस्टा' (Vesta) क्षुद्रग्रह बेल्ट का एकमात्र ऐसा क्षुद्रग्रह है जिसे बिना किसी विशेष उपकरण के नग्न आँखों से पृथ्वी से कभी-कभी देखा जा सकता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'उल्कापिंड' (Meteoroids) अंतरिक्ष में तैरते हुए चट्टानों या धातुओं के छोटे टुकड़े होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने पर घर्षण के कारण जल उठते हैं और 'शूटिंग स्टार' (टूटते तारे) के रूप में दिखाई देते हैं, और जो टुकड़े पूरी तरह जल नहीं पाते और पृथ्वी की सतह से टकराते हैं, उन्हें 'उल्कापिंड' (Meteorites) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भूगर्भीय संरचना और निक्षेपों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडारों का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जिसमें उच्च कोटि का कोकिंग कोयला मुख्य रूप से दामोदर घाटी क्षेत्र (जैसे झरिया और बोकारो) से निकाला जाता है।
2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्र खंभात की खाड़ी के महाद्वीपीय शेल्फ पर स्थित है, जहाँ पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के मुख्य भंडार 'मायोसीन' (Miocene) युग की बलुआ पत्थर और चूना पत्थर की संरचनाओं में पाए जाते हैं।
3. भारत में थोरियम के विशाल और विश्व प्रसिद्ध भंडार केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट' (Monazite) रेत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि यूरेनियम का उत्पादन झारखंड के जादूगोड़ा के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ली क्षेत्र से भी किया जाता है।
4. टर्शरी (Tertiary) कालीन कोयला मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है, जिसकी प्रमुख विशेषता कम गंधक (Low Sulphur) और उच्च राख (High Ash) सामग्री होना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के बायोस्फीयर रिजर्व (जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र) और उनके भौगोलिक वितरण तथा विशिष्ट जीवों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'डिब्रू-सैखोवा बायोस्फीयर रिजर्व' (Dibru-Saikhowa Biosphere Reserve) असम राज्य में ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिण बैंक पर स्थित देश का सबसे छोटा बायोस्फीयर रिजर्व है, जो जंगली घोड़ों (Feral Horses) और सफेद पंख वाले बत्तख (White-winged Wood Duck) के लिए प्रसिद्ध है।
2. 'अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिजर्व' (Agasthyamalai Biosphere Reserve) पश्चिमी घाट के दक्षिणी छोर पर केरल और तमिलनाडु राज्यों की सीमा पर स्थित है, जिसे यूनेस्को के वर्ल्ड नेटवर्क ऑफ बायोस्फीयर रिजर्व्स में शामिल किया गया है और यह नीलगिरी तहर तथा कनी जनजाति के औषधीय पौधों के संरक्षण के लिए जाना जाता है।
3. 'पन्ना बायोस्फीयर रिजर्व' (Panna Biosphere Reserve) मध्य प्रदेश राज्य में विंध्य पर्वत श्रेणी के अंतर्गत स्थित है, जो बाघों और घड़ियालों का प्रमुख प्राकृतिक आवास है, तथा यह यूनेस्को की सूची में शामिल होने वाला मध्य प्रदेश का एकमात्र बायोस्फीयर रिजर्व है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'सुंदरबन बायोस्फीयर रिजर्व' पश्चिम बंगाल के गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र में स्थित है, जो विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र है और रॉयल बंगाल टाइगर का मुख्य प्राकृतिक आवास है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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