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Geography
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, मोहरोविकिच असंबद्धता (Moho Discontinuity) और भूपर्पटी (Crust) की रासायनिक व भौतिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'मोहरोविकिच असंबद्धता' क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जहाँ भूकंपीय तरंगों (P-वेव्स) की गति में अचानक तेज वृद्धि दर्ज की जाती है, जो इस क्षेत्र में घनत्व और चट्टानों के प्रत्यास्थ गुणों के परिवर्तन को दर्शाती है।
- 2. महाद्वीपीय क्रस्ट मुख्य रूप से 'सियाल' (SIAL - सिलिकॉन और एल्यूमीनियम) से बनी है, जिसका औसत घनत्व लगभग 2.7 ग्राम/सेमी³ होता है, जबकि महासागरीय क्रस्ट मुख्य रूप से 'सीमा' (SIMA - सिलिकॉन और मैग्नीशियम) से बनी है और इसका घनत्व महाद्वीपीय क्रस्ट की तुलना में अधिक होता है।
- 3. पृथ्वी के क्रस्ट में भार के अनुसार सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व 'ऑक्सीजन' है, इसके बाद दूसरा स्थान 'सिलिकॉन' का और तीसरा स्थान 'लोहा' (Iron) का आता है।
- 4. पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) पृथ्वी के आयतन का लगभग 84% और इसके कुल द्रव्यमान का लगभग 1% हिस्सा ही घेरती है, जबकि इसके ठीक नीचे स्थित मेंटल (Mantle) आयतन का अधिकांश भाग निर्मित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि मोहरोविकिच असंबद्धता (Moho Discontinuity) क्रस्ट और ऊपरी मेंटल के बीच की संक्रमण सीमा है जहाँ भूकंपीय तरंगों की गति अचानक बढ़ जाती है। कथन 2 सही है क्योंकि महाद्वीपीय भूपर्पटी सियाल (Granitic/Silica-Aluminium) और महासागरीय भूपर्पटी सीमा (Basaltic/Silica-Magnesium) की बनी होती है, और महासागरीय क्रस्ट भारी चट्टानों से निर्मित होने के कारण अधिक घनी होती है। कथन 3 सही है; भूपर्पटी के रासायनिक संगठन में भार के अनुसार ऑक्सीजन (लगभग 46.6%), सिलिकॉन (लगभग 27.7%) और एल्यूमीनियम/लोहा प्रमुखता से पाए जाते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि क्रस्ट पृथ्वी के कुल आयतन का केवल 0.5% से 1% और द्रव्यमान का लगभग 0.5% हिस्सा घेरती है, जबकि मेंटल पृथ्वी के आयतन का लगभग 84% और द्रव्यमान का 68% भाग निर्मित करता है। पृथ्वी की आंतरिक परतों के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार 'गोंडवाना युग' का है जो देश के कुल कोयला भंडार का लगभग 98 प्रतिशत है, और इसमें उच्च कोटि का कोकिंग कोयला मुख्य रूप से दामोदर घाटी बेसिन के झरिया, रानीगंज और बोकारो क्षेत्रों में पाया जाता है।
2. देश में 'टर्शियरी कोयला' (Tertiary Coal) के प्रमुख भंडार मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में पाए जाते हैं, जिनमें सल्फर की मात्रा अधिक और कार्बन की मात्रा गोंडवाना कोयले की तुलना में कम होती है।
3. 'रतनगढ़ और केशनदेसर' (Rajasthan) क्षेत्र भारत में पोटाश के प्रमुख भंडारों के लिए जाने जाते हैं, जबकि देश का अधिकांश 'लिग्नाइट कोयला' (Lignite Coal) भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में केंद्रित है।
4. भारत में पेट्रोलियम का सबसे पहला कुआँ वर्ष 1867 में असम के 'माकुम' क्षेत्र में खोदा गया था, जो डिगबोई तेल क्षेत्र के अत्यंत निकट स्थित है और यह एशिया का भी सबसे पहला उत्पादक तेल कुआँ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय नितल का सबसे विस्तृत भाग 'महासागरीय मैदान' (Abyssal Plains) होता है, जो महाद्वीपीय उभार (Continental Rise) से शुरू होकर महासागरीय गर्तों तक फैला होता है और इसकी गहराई सामान्यतः 3,000 से 6,000 मीटर के बीच होती है।
2. 'अयनवृत्तीय ज्वार' (Neap Tide) या लघु ज्वार की उत्पत्ति महीने में दो बार (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को) होती है, जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं, जिससे सूर्य और चंद्रमा की आकर्षण शक्तियां एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित करने का प्रयास करती हैं।
3. विश्व की एक प्रमुख जलसंधि बेरिंग जलसंधि एशिया (रूस) को उत्तरी अमेरिका (अलास्का) से अलग करती है और यह प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर को आर्कटिक महासागर के चुकची सागर से जोड़ती है।
4. महासागरीय गर्त (Ocean Trenches) मुख्य रूप से विवर्तनिक प्लेटों के अपसारी किनारों (Divergent Plate Boundaries) पर सक्रिय ज्वालामुखीय गतिविधियों के कारण निर्मित सबसे गहरे खड्ड होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों, विनिर्माण गलियारों और परिवहन अवसंरचना (रेलवे, राष्ट्रीय राजमार्ग एवं जलमार्ग) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'चेन्नई-बेंगलुरु औद्योगिक गलियारा' (CBIC) दक्षिण भारत का एक प्रमुख विनिर्माण और औद्योगिक क्लस्टर है, जो देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों को जोड़ते हुए विशाखापत्तनम-चेन्नई औद्योगिक गलियारे (VCIC) के साथ भी समन्वय स्थापित करता है।
2. 'पूर्वी समर्पित माल गलियारा' (Eastern DFC) पूरी तरह से विद्युतीकृत और डबल-लाइन कॉरिडोर है, जो पंजाब के लुधियाना से शुरू होकर दादरी होते हुए पश्चिम बंगाल के दनकुनी (हल्दिया के पास) तक लगभग 1,837 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है।
3. भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के विकास के क्रम में, राष्ट्रीय जलमार्ग-3 (NW-3) केरल राज्य में कोट्टपुरम से कोल्लम तक 'वेस्ट कोस्ट कैनाल' के साथ-साथ उद्योगमंडल और चंपाकारा नहरों पर स्थित देश का पहला पूर्णतः नौवहन योग्य नेविगेशनल जलमार्ग है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतमाला परियोजना के पहले चरण के तहत केवल स्वर्णिम चतुर्भुज (Golden Quadrilateral) मार्गों का चौड़ीकरण और छह-लेन में आधुनिकीकरण किया जा रहा है, और इसमें किसी भी नए आर्थिक गलियारे या तटीय सड़क नेटवर्क के विकास को शामिल नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक प्रक्रियाओं, भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) की गतिशीलता तथा सुनामी की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की भाँति ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं और ये केवल ठोस माध्यमों से ही प्रवाहित हो सकती हैं।
2. जब समुद्र के भीतर विवर्तनिक प्लेटों के अचानक खिसकने (अधोमुखी या ऊर्ध्वाधर विस्थापन) के कारण विशाल मात्रा में जल का विस्थापन होता है, तो 'सुनामी' (Tsunami) लहरें उत्पन्न होती हैं, जिनकी गहरे समुद्र में तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अत्यधिक लंबी और ऊँचाई बहुत कम होती है, परंतु उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचते ही घर्षण और मंदन के कारण इनकी ऊँचाई में विस्फोटक वृद्धि हो जाती है।
3. छाया क्षेत्र (Shadow Zone) वह विशिष्ट क्षेत्र होता है जहाँ कोई भी भूकंपीय तरंगें दर्ज नहीं की जाती हैं; 105° से 145° के बीच का क्षेत्र S-वेव्स का छाया क्षेत्र बनाता है जो P-वेव्स के छाया क्षेत्र (105° से 145° के चारों ओर एक विस्तृत वलय) की तुलना में बहुत संकीर्ण और सीमित होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रिक्टर स्केल (Richter Scale) भूकंप के परिमाण (Magnitude) को मापने का एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है, जिसका अर्थ है कि स्केल पर प्रत्येक पूर्ण संख्या की वृद्धि ऊर्जा मुक्ति में लगभग 32 गुना की वृद्धि को दर्शाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और समुद्री जल की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तृत भाग होता है, जहाँ सूर्य का प्रकाश तल तक पहुँच जाता है, जिसके कारण ये क्षेत्र प्लवक (Plankton) के विकास के लिए अनुकूल होने के कारण विश्व के सबसे समृद्ध मस्य क्षेत्रों (Fishing Grounds) का निर्माण करते हैं।
2. 'अपसौर' (Aphelion) और 'उपसौर' (Perihelion) की खगोलीय स्थितियाँ ज्वार-भाटा की ऊँचाई को प्रभावित करती हैं; जब पृथ्वी सूर्य के सबसे निकट (उपसौर) होती है, तब उत्पन्न होने वाला ज्वार सामान्य से अधिक ऊँचा होता है।
3. 'नीप ज्वार' (Neap Tide) की स्थिति केवल अमावस्या और पूर्णिमा के दिन उत्पन्न होती है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ज्वार-भाटा की उत्पत्ति के लिए आइजैक न्यूटन का 'गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत' (Gravitational Theory) और लाप्लास का 'नहर सिद्धांत' (Canal Theory) अत्यधिक प्रसिद्ध व्याख्याएँ प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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