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Geography
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भारत के प्रमुख पर्वतीय दरों (Mountain Passes) और उनकी भौगोलिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. जोजिला दर्रा (Zoji La) - जांस्कर श्रेणी में स्थित है और यह श्रीनगर को लेह से जोड़ता है।
- 2. शिपकी ला दर्रा (Shipki La) - महान हिमालय में स्थित है और इसी दर्रे के पास से सतलज नदी भारत में प्रवेश करती है।
- 3. बोमडिला दर्रा (Bomdila Pass) - अरुणाचल प्रदेश में स्थित है जो तवांग को म्यांमार से जोड़ता है।
- 4. पालघाट दर्रा (Palakkad Gap) - नीलगिरी और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित है जो कोच्चि को चेन्नई से जोड़ता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि जोजिला दर्रा जांस्कर श्रेणी में स्थित है और राष्ट्रीय राजमार्ग 1 पर श्रीनगर को लेह (लद्दाख) से जोड़ता है। युग्म 2 सही है क्योंकि शिपकी ला दर्रा हिमाचल प्रदेश में महान हिमालयी क्षेत्र में स्थित है और तिब्बत से आने वाली सतलज नदी इसी दर्रे के समीप भारत में प्रवेश करती है। युग्म 3 गलत है क्योंकि बोमडिला दर्रा अरुणाचल प्रदेश में स्थित है और यह अरुणाचल प्रदेश को तिब्बत (ल्हासा) से जोड़ता है, न कि म्यांमार से। युग्म 4 सही है क्योंकि पालघाट दर्रा (पालक्काड गैप) पश्चिमी घाट में नीलगिरी और अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच एक प्रमुख विवर्तनिक अंतराल है, जो सड़क और रेल मार्ग द्वारा केरल के कोच्चि/पालक्काड को तमिलनाडु के चेन्नई/कोयंबटूर से जोड़ता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत के ये दर्रे देश की सामरिक सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
Related Questions
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पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के प्रकार और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्वतीय वर्षा (Orographic Rainfall) तब होती है जब आर्द्र हवाएँ किसी पर्वतीय अवरोध के सहारे ऊपर उठती हैं, जिसके कारण पर्वतों के पवन-विमुख ढाल (Leeward Side) पर स्थित क्षेत्र 'वृष्टिछाया क्षेत्र' (Rain Shadow Area) बन जाता है जहाँ बहुत कम वर्षा होती है।
2. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) का निर्माण मुख्य रूप से वाताग्र (Frontogenesis) के सहारे होता है, और इनकी उत्पत्ति केवल महासागरीय सतह पर होती है, जबकि उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) की उत्पत्ति स्थल और जल दोनों भागों पर समान रूप से होती है।
3. जेट स्ट्रीम (Jet Streams) ऊपरी क्षोभमंडल में तीव्र गति से प्रवाहित होने वाली भू-विक्षेपी पवनें (Geostrophic Winds) हैं, जो ध्रुवीय वाताग्र की स्थिति को नियंत्रित करने के साथ-साथ भारतीय मानसून के आगमन और विच्छेद (Break in Monsoon) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को कैरिबियन सागर क्षेत्र में 'हरिकेन', चीन सागर में 'टाइफून' तथा ऑस्ट्रेलिया में 'विली-विली' के नाम से जाना जाता है, और इनके केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) स्थित होती है जो शांत मौसम, स्पष्ट आसमान और निम्नतम दाब का क्षेत्र होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय जलवायु और मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत के विशाल मैदानों और थार मरुस्थल पर तीव्र ताप के कारण 'मानसूनी गर्त' (Monsoon Trough) या अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का उत्तर की ओर खिसकना दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में एक विशाल 'उष्मा इंजन' (Thermal Low) के रूप में कार्य करता है, जो गर्म होकर ऊपर की ओर वायु का संवहन करता है और क्षोभमंडल के ऊपरी स्तर पर पूर्वी जेट स्ट्रीम (Easterly Jet Stream) के विकास को प्रेरित करता है।
3. 'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान दक्षिण अमेरिका के पेरू तट के पास ठंडी जलधारा के स्थान पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी भागों के बीच वायुदाब में ऐसा परिवर्तन होता है जिससे भारत में मानसूनी हवाओं की तीव्रता बढ़ जाती है और सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में होने वाली कुल वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है, और पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढालों तथा उत्तर-पूर्व के पहाड़ी राज्यों में 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है, जबकि लद्दाख और पश्चिमी राजस्थान वृष्टिछाया क्षेत्र के कारण शुष्क रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता कम होती है और यह क्षेत्र विश्व भर में सबसे अधिक समृद्ध मत्स्य क्षेत्रों के रूप में जाने जाते हैं।
2. 'सिजगी' (Syzygy) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में होते हैं, और इस दौरान लघु ज्वार (Neap Tide) की उत्पत्ति होती है, जिसमें ज्वार की ऊँचाई न्यूनतम होती है।
3. मलक्का जलसंधि (Strait of Malacca) सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) और मलय प्रायद्वीप के बीच स्थित है, जो अंडमान सागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ती है और वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है।
4. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches) सामान्यतः विवर्तनिक प्लेटों के अपसारी किनारों (Divergent Plate Boundaries) के सहारे स्थित होते हैं, जो महासागरों के सबसे गहरे भाग होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों (कोयला, पेट्रोलियम और परमाणु खनिज) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडार का लगभग 98% हिस्सा 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं तथा इनमें ऊर्जा उत्पादन के लिए उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है।
2. देश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के अधिकांश भंडार 'टर्शरी' (Tertiary) युग की तलछटी (Sedimentary) चट्टानों से जुड़े हैं, जिसमें असम का 'डिगबोई' क्षेत्र भारत का सबसे पुराना क्रियाशील तेल क्षेत्र है, जबकि पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र में स्थित 'मुंबई हाई' देश का सबसे बड़ा अपतटीय तेल उत्पादक क्षेत्र है।
3. भारत के झारखंड राज्य में स्थित 'जादूगोड़ा' की खदानें यूरेनियम के उत्पादन के लिए विश्वविख्यात हैं, जबकि केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की बालू में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले 'मोनोजाइट' (Monazite) अयस्क से थोरियम प्राप्त किया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में लिग्नाइट (भूरा कोयला) का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के 'नेवेली' क्षेत्र में पाया जाता है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से तापीय विद्युत उत्पादन के लिए किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की मिट्टी (मृदा) के प्रकार, उनके वितरण और रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जलाल और कछारी मिट्टी (Alluvial Soil) देश के कुल क्षेत्रफल का सबसे बड़ा हिस्सा घेरती है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से हिमालयी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के निक्षेपण से हुआ है, तथा इसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता पाई जाती है जबकि नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी होती है।
2. काली मृदा (Regur Soil) का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप क्षेत्र में बेसाल्ट लावा के अपक्षय से हुआ है, और इसकी मुख्य विशेषता 'स्वः-जुताई की क्षमता' (Self-ploughing capacity) है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और फूल जाती है तथा सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं।
3. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया के कारण होता है, जिससे इस मिट्टी में सिलिका का निक्षालन हो जाता है तथा लौह ऑक्साइड और एल्युमिनियम के यौगिक शेष रह जाते हैं, जिस कारण यह मिट्टी ईंट बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है।
4. शुष्क और मरुस्थलीय मृदा (Arid Soil) में घुलनशील लवणों और कैल्शम कार्बोनेट (कंकड़ परत) की मात्रा बहुत अधिक होती है, तथा इस मिट्टी में निचले संस्तरों में कैल्सियम की मात्रा बढ़ने के कारण जल को सोखने की क्षमता अत्यधिक उच्च हो जाती है, जिससे यह बिना सिंचाई के भी धान की खेती के लिए सर्वोत्तम बन जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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