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Geography
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भारत के प्रमुख पर्वतीय दरों (Mountain Passes) और उनकी अवस्थिति तथा संयोजकता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'काराताग दर्रा' (Karatag Pass) काराकोरम श्रेणी के उत्तर में स्थित है, जो लद्दाख क्षेत्र को सीधे ताजिकिस्तान से जोड़ता है।
- 2. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'अग्ल दर्रा' (Aghil Pass) लद्दाख को चीन के शिनजियांग क्षेत्र से जोड़ता है और यह काराकोरम पर्वतमाला के उत्तर में के-2 चोटी के उत्तर-पूर्व में स्थित है।
- 3. 'थिप्सू दर्रा' (Thipsu Pass) और 'मला दर्रा' हिमाचल प्रदेश में स्थित प्रमुख दर्रे हैं जो स्पीति घाटी को लद्दाख से जोड़ते हैं।
- 4. 'तुजू दर्रा' (Tuiu Pass) मणिपुर राज्य में स्थित है, जो इम्फाल को म्यांमार के ताम्मू क्षेत्र से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि काराताग दर्रा मुख्य रूप से शिनजियांग (चीन) और त्संगपो बेसिन या मध्य एशिया से जुड़ा हुआ है, न कि सीधे लद्दाख से ताजिकिस्तान को जोड़ने वाला प्रमुख ऐतिहासिक व्यापारिक मार्ग; हालांकि काराकोरम क्षेत्र में कई छोटे दर्रे हैं, लेकिन अघिल दर्रा और काराकोरम दर्रा लद्दाख-शिनजियांग संपर्क के लिए अधिक प्रामाणिक हैं। कथन 2 सत्य है; विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अघिल दर्रा काराकोरम श्रेणी में लद्दाख को शिनजियांग (चीन) से जोड़ता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि थिप्सू और मला दर्रे हिमाचल प्रदेश में नहीं बल्कि अरुणाचल प्रदेश या अन्य पूर्वी क्षेत्रों से संबंधित स्थानीय मार्ग/कम प्रसिद्ध दर्रे हैं या इस संदर्भ में तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं। कथन 4 सत्य है, क्योंकि मणिपुर में स्थित 'तुजू दर्रा' (Tju Pass) भारत और म्यांमार के बीच सीमा पर स्थित है जो इम्फाल को म्यांमार के ताम्मू से जोड़ता है। अतः सही विकल्प (b) है।
Related Questions
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भारत की जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) और काली मृदा (Black Soil) के वितरण तथा उनकी रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जलोढ़ मृदा भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल के सबसे बड़े हिस्से पर पाई जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तर के विशाल मैदान और प्रायद्वीपीय भारत के नदी डेल्टाओं तक सीमित है, तथा इस मृदा में पोटाश, phosphoric acid (फॉस्फोरिक अम्ल) और चूने की प्रचुरता होती है, किंतु नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
2. काली मृदा, जिसे स्थानीय रूप से 'रेगुर मृदा' (Regur Soil) भी कहा जाता है, का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसॉल्ट लावा के अपक्षय और विखंडन से हुआ है, और इसमें नमी धारण करने की अपार क्षमता होती है, जिसके कारण यह सूखने पर चौड़ी और गहरी दरारों से विकसित कर जाती है।
3. जलोढ़ मृदा के अंतर्गत पाए जाने वाले प्राचीन जलोढ़ निक्षेपों को 'खादर' (Khadar) कहा जाता है, जो बाढ़ के मैदानों में हर साल नए रूप में जमा होते हैं और नवीन जलोढ़ की तुलना में अधिक उपजाऊ होते हैं, जबकि अपेक्षाकृत ऊँचे भागों में पाए जाने वाले पुराने जलोढ़ को 'बांगर' (Bangar) कहा जाता है जिसमें चूने की कंकड़ ग्रंथियाँ पाई जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विश्व के राजनीतिक भूगोल, प्रमुख राजधानियों और उनकी अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मैडलाइन रेखा' (Maginot Line) द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व फ्रांस द्वारा जर्मनी की संभावित आक्रामकता से सुरक्षा के लिए अपनी पूर्वी सीमा पर बनाई गई भारी भरकम किलाबंदी और रक्षात्मक रेखा थी।
2. 'ओडर-नीस रेखा' (Oder-Neisse Line) द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात जर्मनी और पोलैंड के बीच निर्धारित की गई अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जो ओडर और नीस नदियों के किनारों के सहारे चलती है।
3. 'हिंडनबर्ग रेखा' (Hindenburg Line) प्रथम विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना द्वारा पश्चिमी मोर्चे पर बनाई गई एक रक्षात्मक स्थिति थी, जिससे जर्मन सेना पीछे हटकर अधिक मजबूत किलेबंदी में आ गई थी।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार '17वीं समानांतर रेखा' (17th Parallel) उत्तरी वियतनाम और दक्षिणी वियतनाम को विभाजित करने वाली ऐतिहासिक सीमा रेखा थी, जिसे 1954 के जिनेवा समझौते के तहत निर्धारित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की मृदा प्रणालियों, उनकी पेडोोजेनिक (मृदा निर्माण) विशेषताओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले मानसूनी क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका के निष्कासन के बाद आयरन और एल्युमिनियम के ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में शेष बच जाते हैं, और ये मृदाएँ ईंट बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त होती हैं।
2. 'काली मृदा' (Black Soil) मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसाल्टिक लावा के अपक्षय से बनती है और इसमें 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और सूखने पर चौड़ी-चौड़ी गहरी दरारों से फट जाती है।
3. 'क्षारकीय एवं रेह मृदा' (Alkaline Soils) मुख्य रूप से अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचाई तथा अकुशल जल निकासी के कारण उत्पन्न जलभराव एवं केशिका क्रिया (Capillary action) के परिणामस्वरूप सतह पर सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के जमा होने से बनती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की मिट्टियों को उनकी उत्पत्ति, संरचना और उर्वरता के आधार पर कुल 8 प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पवन प्रणालियों, वायुमंडलीय आर्द्रता और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कोरियॉलिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और यह बल भूमध्य रेखा पर अधिकतम तथा ध्रुवों पर शून्य होता है।
2. उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) के केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Storm) होती है, जो अत्यंत शांत, कम वायुदाब और मेघ-रहित क्षेत्र होता है, जबकि इसके चारों ओर दीवार बादलों (Wall clouds) में मूसलाधार वर्षा और अत्यधिक तीव्र हवाएँ चलती हैं।
3. सापेक्षित आर्द्रता (Relative Humidity) किसी निश्चित तापमान पर हवा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर हवा की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का अनुपात होती है, और तापमान बढ़ने पर सापेक्षित आर्द्रता में कमी आती है यदि जलवाष्प की मात्रा स्थिर रहे।
4. पछुआ पवनें (Westerlies) दोनों गोलार्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी से उप-ध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर प्रवाहित होती हैं, और पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में महाद्वीपों के पश्चिमी तटों पर महासागरीय धाराओं के प्रभाव के कारण इन्हें 'गरजती चालीस' (Roaring Forties) के रूप में जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, आर्द्रता के प्रकार और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोज़बी तरंगे' (Rossby Waves) क्षोभमंडल के ऊपरी स्तर और समताप मंडल की निचلی सीमा पर बहने वाली विशाल वक्र हवाएँ हैं, जो जेट स्ट्रीम के उत्तर-दक्षिण विस्थापन और ध्रुवीय तथा उष्णकटिबंधीय हवाओं के बीच ताप संतुलन स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
2. 'सापेक्ष आर्द्रता' (Relative Humidity) किसी निश्चित तापमान पर हवा में मौजूद जलवाष्प की मात्रा और उसी तापमान पर हवा की जलवाष्प धारण करने की अधिकतम क्षमता का प्रतिशत अनुपात होती है, और यह तापमान में वृद्धि होने पर घट जाती है, भले ही हवा में जलवाष्प की मात्रा अपरिवर्तित रहे।
3. 'उष्णकटिबंधीय चक्रवात' (Tropical Cyclones) के केंद्र में स्थित 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) एक शांत, अवरोही वायु और मेघ-मुक्त क्षेत्र होती है जहाँ वायुदाब न्यूनतम होता है तथा तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में सर्वाधिक होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान कम से कम 27° सेल्फ़ियस होना आवश्यक है, और भूमध्य रेखा के पास (5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांश के मध्य) कोरिऑलिस बल (Coriolis Force) के शून्य होने के कारण चक्रवातों का निर्माण नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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