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Geography
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भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय कृषि आयोग (National Commission on Agriculture) द्वारा भारत को कुल 15 मुख्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जिसमें पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र (Zone 1) और पूर्वी पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र (Zone 7) शामिल हैं।
  2. 2. 'बहु-फसलीय प्रणाली' (Multiple Cropping System) के अंतर्गत एक ही कृषि वर्ष में एक ही खेत में दो या दो से अधिक फसलें एक साथ उगाई जाती हैं, जिसे 'सह-फसली कृषि' (Intercropping) भी कहा जाता है, तथा यह भूमि की उत्पादकता और नाइट्रोजन स्थिरीकरण (जैसे दलहनी फसलों के साथ) को बढ़ाने में सहायक होती है।
  3. 3. भारत में 'जीरो टिलेज' (Zero Tillage) या शून्य-जुताई तकनीक, जो मुख्य रूप से चावल-गेहूं फसल चक्र (Rice-Wheat Cropping System) में अपनाई जाती है, मृदा के स्वास्थ्य को बनाए रखने, जल संरक्षण करने और बुवाई की लागत को कम करने में अत्यधिक प्रभावी है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में खरीफ की फसलें दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में बोई जाती हैं और अक्टूबर-नवंबर में काटी जाती हैं, जिसके अंतर्गत धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास और सोयाबीन मुख्य फसलें हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. योजना आयोग/राष्ट्रीय कृषि आयोग ने भारत को 15 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में वर्गीकृत किया है जो मृदा, जलवायु और जल संसाधनों की समानता पर आधारित हैं। 2. 'बहु-फसलीय प्रणाली' (Multiple Cropping) और 'सह-फसली कृषि' (Intercropping) कृषि विविधीकरण के महत्वपूर्ण अंग हैं, जो संसाधनों के कुशल उपयोग और भूमि की उर्वरता बढ़ाने में मदद करते हैं। 3. 'शून्य-जुताई' (Zero Tillage) तकनीक विशेषकर उत्तर-पश्चिम भारत के चावल-गेहूं फसल चक्र में मृदा अपरदन रोकने और नमी बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी सिद्ध हुई है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार खरीफ ऋतु की फसलें दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं।
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