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Geography
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भूकंपीय तरंगों की संचलन प्रकृति, छाया क्षेत्रों (Shadow Zones) की ज्यामिति और सुनामी की तरंग गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'S-तरंगें' (Secondary Waves) केवल ठोस माध्यमों में संचरित हो सकती हैं, और इसी गुण के कारण पृथ्वी के बाहरी क्रोड (Outer Core) के तरल माध्यम में प्रवेश करते ही ये पूरी तरह विलुप्त हो जाती हैं, जिससे 105° से 145° के बीच का क्षेत्र S-तरंगों का विशाल छाया क्षेत्र बन जाता है।
- 2. 'P-तरंगों' (Primary Waves) का छाया क्षेत्र S-तरंगों की तुलना में काफी छोटा होता है, क्योंकि ये तरल क्रोड से अपवर्तित (Refracted) होकर गुजर सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप 105° से 145° के बीच का संपूर्ण वलय दोनों ही तरंगों के लिए 'मृत क्षेत्र' (Zone of Silence) के रूप में दर्ज किया जाता है।
- 3. 'सुनामी तरंगें' गहरे महासागरों में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई वाली छिछली जल तरंगों के समान होती हैं, जिनकी गति उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर जल की गहराई कम होने के कारण घट जाती है, जबकि उनकी तरंग ऊँचाई (Amplitude) में अचानक भारी वृद्धि हो जाती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रशांत महासागर के परिधीय क्षेत्रों में स्थित 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) और रूपांतर भ्रंश (Transform Fault) प्लेट सीमाओं का एक ऐसा नेटवर्क है जहाँ विश्व के लगभग 90% भूकंप और 75% सक्रिय ज्वालामुखी केंद्रित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि S-तरंगें (अनुप्रस्थ तरंगें) केवल ठोस माध्यम में चल सकती हैं और पृथ्वी का बाह्य क्रोड तरल अवस्था में होने के कारण इन्हें रोक लेता है, जिससे 105° के बाद S-तरंगों का छाया क्षेत्र शुरू होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि P-तरंगों (अनुदैर्ध्य तरंगें) के लिए छाया क्षेत्र 105° से 145° के बीच का क्षेत्र है (जहाँ वे तरल क्रोड से अपवर्तन के कारण दर्ज नहीं होतीं), जबकि 145° के आगे पुनः P-तरंगें प्रकट हो जाती हैं; अतः 105°-145° का संपूर्ण क्षेत्र केवल P-तरंगों के लिए छाया क्षेत्र है, जबकि S-तरंगों का छाया क्षेत्र 105° से विपरीत ध्रुव तक विस्तृत होता है। कथन 3 सही है क्योंकि सुनामी तरंगें महासागरों में लंबी तरंगदैर्ध्य और कम आयाम वाली होती हैं, जो तट के पास पहुँचने पर उथले पानी के कारण धीमी होती हैं और ऊर्जा के संपीड़न से इनकी ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रशांत महासागर की 'रिंग ऑफ फायर' विवर्तनिक प्लेटों के अभिसरण और तीव्र भूकंपीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है, अतः कथन 4 भी सही है।
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विवर्तनिक प्रक्रियाओं और भूकंपीय तरंगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की तरह ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, किंतु तरल क्रोड (Liquid Outer Core) से गुजरने पर इनका अपवर्तन (Refraction) हो जाता है जिसके कारण 'छाया क्षेत्र' (Shadow Zone) का निर्माण होता है।
2. द्वितीयक तरंगें (S-Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं, जो केवल ठोस माध्यमों में गमन कर सकती हैं और ये तरल माध्यम से पूरी तरह अवशोषित या अवरुद्ध हो जाती हैं, जिससे 103° से अधिक के कोणीय दूरी पर इनका व्यापक छाया क्षेत्र बनता है।
3. 'सुनामी' (Tsunami) लहरें सामान्य महासागरीय तरंगों से इस बात में भिन्न होती हैं कि उनकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अत्यधिक लंबी होती है और गहरे समुद्र में इनकी ऊँचाई बहुत कम होती है, लेकिन तटीय उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति कम हो जाती है और ऊँचाई तथा विनाशकारी शक्ति में भारी वृद्धि हो जाती है।
4. पैसिफिक रिंग ऑफ फायर (Pacific Ring of Fire) में अधिकांश बड़े भूकंप और ज्वालामुखी विसर्जन मुख्य रूप से महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसरण (Continental-Continental Convergence) प्लेट सीमाओं के कारण उत्पन्न होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सौर मंडल के बाह्य ग्रहों (Jovian Planets) और उनके उपग्रहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गैनीमेड' (Ganymede) बृहस्पति का सबसे बड़ा उपग्रह है और यह हमारे सौर मंडल का भी सबसे बड़ा उपग्रह है, जिसका आकार बुध ग्रह से भी बड़ा है तथा इसके पास अपना स्वयं का आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र (Intrinsic Magnetic Field) मौजूद है।
2. 'एन्सेलाडस' (Enceladus), जो शनि ग्रह का एक बर्फीला चंद्रमा है, के दक्षिणी ध्रुव के पास क्रायोवोल्केनिज्म (Cryovolcanism) या हिम-ज्वालामुखी गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं, जो अंतरिक्ष में पानी के फव्वारे और जैविक अणुओं को प्रक्षेपित करते हैं।
3. 'टाइटन' (Titan) शनि का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जहाँ पर्याप्त मात्रा में घना नाइट्रोजन-प्रधान वायुमंडल पाया जाता है, लेकिन इसकी सतह पर किसी भी प्रकार के तरल हाइड्रोकार्बन या झीलों का अस्तित्व पूर्णतः अनुपस्थित है।
4. 'मीरंडा' (Miranda) अरुण (Uranus) ग्रह का एक विचित्र उपग्रह है, जिसकी सतह पर अत्यधिक विरूपण, गहरी खाइयाँ और टेक्टोनिक भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं, जो इसके अशांत भूवैज्ञानिक इतिहास को दर्शाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वत, पर्वत श्रेणियाँ और घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पीर पंजाल श्रेणी' लघु हिमालय (Himachal/Lesser Himalayas) की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण श्रृंखला है, जो मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में फैली हुई है तथा इसी श्रेणी में प्रसिद्ध बनिहाल दर्रा स्थित है जो जम्मू को श्रीनगर से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ता है।
2. 'ज़ास्कर श्रेणी' ट्रांस-हिमालय प्रणाली का एक हिस्सा है, जो महान हिमालय के उत्तर में समांतर रूप से फैली हुई है और लद्दाख क्षेत्र को तिब्बत से अलग करती है।
3. 'शांत घाटी' (Silent Valley) और 'कुल्लू घाटी' दोनों ही क्रमशः दक्षिण भारत (केरल) और उत्तर भारत (हिमाचल प्रदेश) में स्थित प्रसिद्ध हिमनदीय (Glacial) घाटियाँ हैं, जिनमें कुल्लू घाटी का निर्माण ब्यास नदी द्वारा किया गया है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'महान हिमालय' (Greater Himalayas) जिसे 'हिadri' भी कहा जाता है, विश्व की सबसे ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जिसमें माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा और नंदा देवी जैसी विश्व प्रसिद्ध उच्च शिखर अवस्थित हैं.
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) और विभिन्न प्रकार की चट्टानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं जो ध्वनि तरंगों की तरह चलती हैं और यह ठोस, तरल तथा गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं।
2. 'ग्रेनाइट' एक प्रमुख बहिर्भेदी (Extrusive) आग्नेय चट्टान है, जो ज्वालामुखी उद्गार के समय धरातल पर लावा के अत्यधिक तीव्र गति से ठंडा होने के कारण सूक्ष्म और महीन रवे का निर्माण करती है।
3. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) मुख्य रूप से संस्तरण (Stratification) या पर्दों के रूप में पाई जाती हैं, और इन चट्टानों में प्राचीन वनस्पतियों तथा जीवों के जीवाश्म (Fossils) सुरक्षित पाए जाते हैं।
4. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप, दाब या रासायनिक रूप से सक्रिय तरल पदार्थों के प्रभाव से अपने मूल रूप में परिवर्तन के माध्यम से बनती हैं, जिसमें चूना पत्थर का रूपांतरण होकर संगमरमर का बनना इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सौर मंडल के ग्रहों, उनकी गति और क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूर्व की ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में करते हैं, किंतु 'शुक्र' और 'यूरेनस' (अरुण) इसके अपवाद हैं, जो पूर्व से पश्चिम की ओर (क्लॉकवाइज) अपनी धुरी पर घूर्णन करते हैं।
2. क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच स्थित है, और ऐसा माना जाता है कि यह पेटी किसी बड़े विस्फोट के कारण नष्ट हुए ग्रह के अवशेष नहीं, बल्कि गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव के कारण एक ग्रह के रूप में संघनित होने में असफल रहे खगोलीय मलबे हैं।
3. बृहस्पति ग्रह का प्राकृतिक उपग्रह 'गैनीमेड' (Ganymede) हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा उपग्रह है, जिसका आकार बुध ग्रह से भी बड़ा है और इसके पास अपना स्वयं का चुंबकीय क्षेत्र भी विद्यमान है।
4. 'काइपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून (वरुण) की कक्षा से आगे सूर्य से दूर स्थित एक क्षेत्र है, जहाँ बर्फीले पिंड और बौने ग्रह जैसे प्लूटो पाए जाते हैं, और यह क्षेत्र धूमकेतुओं (Comets) का प्रमुख उद्गम स्थल भी माना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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