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सौर मंडल के ग्रहों, उनकी आंतरिक संरचना, कक्षीय गति और खगोलीय पिंडों (जैसे क्षुद्रग्रह और धूमकेतु) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'बृहस्पति' (Jupiter) और 'शनि' (Saturn) जैसे गैस दानव (Gas Giants) ग्रहों के विपरीत, 'यूरेनस' और 'नेप्च्यून' को 'बर्फ दानव' (Ice Giants) कहा जाता है, क्योंकि इनके वायुमंडल में हाइड्रोजन और हीलियम के साथ-साथ पानी, अमोनिया और मीथेन जैसी भारी वाष्पशील गैसों के हिमीकृत (Frozen) यौगिकों की प्रचुरता होती है।
  2. 2. 'शुक्र' (Venus) और 'यूरेनस' (Uranus) सौर मंडल के ऐसे दो ग्रह हैं जिनका घूर्णन (Rotation) अन्य अधिकांश ग्रहों की पूर्व से पश्चिम की दिशा (Retrograde Rotation) के विपरीत होता है, जिससे इन ग्रहों पर सूर्य पश्चिम में उगता हुआ प्रतीत होता है।
  3. 3. 'ऐस्ट्रॉइड बेल्ट' (Asteroid Belt) में स्थित 'सीरिज' (Ceres) सौर मंडल का सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह होने के साथ-साथ एक बौना ग्रह (Dwarf Planet) भी है, जिसकी खोज पियाज्ज़ी द्वारा की गई थी और यह मंगल तथा बृहस्पति कक्षाओं के मध्य परिक्रमा करता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ओर्ट मेघ (Oort Cloud) सौर मंडल की सबसे बाहरी परिधि पर स्थित बर्फीले खगोलीय पिंडों का एक काल्पनिक गोलाकार खोल (Spherical Shell) है, जिसे दीर्घकालिक (Long-period) धूमकेतुओं का मुख्य उद्गम स्थल माना जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन सौर मंडल की विशेषताओं से संबंधित पूर्णतः सत्य हैं। यूरेनस और नेप्च्यून को 'बर्फ दानव' कहा जाता है क्योंकि इनमें जल, अमोनिया और मीथेन जैसी भारी गैसों के बर्फ का बड़ा हिस्सा होता है। शुक्र और यूरेनस की घूर्णन दिशा पश्चिम से पूर्व (रेट्राग्रेड) है। सीरिज एक बौना ग्रह एवं सबसे बड़ा क्षुद्रग्रह है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ओर्ट मेघ लंबी अवधि के धूमकेतुओं का उद्गम केंद्र है।
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'रैगुड़' या काली मृदा (Black Soil) का काला रंग मुख्य रूप से टाइटैनिफेरस मैग्नेटाइट, ह्यूमस और एल्युमिनियम व आयरन के यौगिकों के सम्मिश्रण के कारण होता है, और इसमें जल धारण करने की अद्भुत क्षमता होने के कारण गीली होने पर यह अत्यधिक चिपचिपी हो जाती है। 2. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया का परिणाम है, जहाँ सिलिका का निक्षालन हो जाने के कारण पृष्ठ भाग पर आयरन और एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा कृषि के लिए अत्यधिक उपजाऊ बन जाती है। 3. क्षारीय और लवणीय मृदाओं (Alkaline and Saline Soils), जिन्हें स्थानीय रूप से कलर, उसर या रेह भी कहा जाता है, का विकास मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में होता है जहाँ जल निकास की उचित व्यवस्था नहीं होती और तीव्र वाष्पीकरण के कारण सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवण केशिका क्रिया (Capillary action) द्वारा सतह पर जमा हो जाते हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जलोढ़ मृदा (Alluvial Soil) भारत के कुल भू-भाग के सबसे बड़े हिस्से पर पाई जाती है, जिसे आयु के आधार पर 'खादर' (नवीन जलोढ़) और 'बांगर' (प्राचीन जलोढ़) में विभाजित किया जाता है, जिसमें पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है लेकिन नाइट्रोजन और ह्यूमस की कमी पाई जाती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत की प्रमुख झीलों, जलपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 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