BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
1 views

भारत की मृदा (मिट्टी) के वर्गीकरण, उनके रासायनिक गुणों और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में पाई जाने वाली 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप विकसित होती है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और पृष्ठ भाग पर आयरन एवं एल्युमिनियम के ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में बच जाते हैं, जिससे यह चाय और काजू की खेती के लिए उपयुक्त होती है।
  2. 2. 'काली मृदा' (Black Soil), जिसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है, का निर्माण ज्वालामुखी उदगार से निकले बेसाल्टिक लावा के विखंडन से हुआ है, और इसमें नमी धारण करने की क्षमता (Water Retention Capacity) अत्यधिक उच्च होती है, लेकिन इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
  3. 3. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' (Saline and Alkaline Soils), जिसे 'रेह', 'उसर' या 'कल्लर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु तथा नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में केशिका क्रिया (Capillary Action) के कारण मिट्टी की सतह पर सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के जमा होने से बनती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की 'जलोढ़ मृदा' (Alluvial Soil) देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 43% भाग पर विस्तृत है और यह देश की सबसे उपजाऊ मिट्टी है, जिसे आयु के आधार पर 'खादर' (नवीन जलोढ़) और 'बांगर' (प्राचीन जलोढ़) में विभाजित किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी चारों कथन भारत की मृदा के प्रकार, उनके निर्माण की प्रक्रिया (पीडोजेनेसिस), रासायनिक विशेषताओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। लैटेराइट मिट्टी अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सिलिका के निक्षालन से बनती है और इसमें चाय-काजू की खेती अच्छी होती है। काली मिट्टी (रेगुर) का निर्माण बेसाल्ट लावा से हुआ है और इसमें स्व-जुताई का गुण पाया जाता है। लवणीय/क्षारीय मृदा ('उसर' या 'रेह') अत्यधिक सिंचाई और शुष्क जलवायु के कारण केशिका क्रिया से सतह पर लवण जमा होने से बनती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जलोढ़ मृदा भारत के विशाल मैदानों और नदी घाटियों में सबसे व्यापक रूप से फैली हुई कृषि की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण मिट्टी है।
Share:

Related Questions

पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों (पर्वत, पठार और मरुस्थल) की उत्पत्ति, वर्गीकरण और विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'ब्लाॅक पर्वतों' (Block Mountains) का निर्माण मुख्य रूप से विवर्तनिक ताकतों के कारण उत्पन्न तनाव (Tension) और भ्रंशन (Faulting) की प्रक्रिया से होता है, जिसके परिणामस्वरूप उठी हुई मध्यवर्ती खंड को 'हॉर्स्ट' (Horst) और धंसे हुए खंड को 'ग्रैबेन' (Graben) कहा जाता है, जिसका उत्कृष्ट उदाहरण यूरोप की राइन घाटी और ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत हैं। 2. 'पेटागोनिया का पठार' (Patagonia Plateau) अर्जेंटीना में स्थित एक अंतर्पर्वतीय (Intermontane) पठार का उदाहरण है, जो एंडीज पर्वतों के वृष्टिछाया क्षेत्र में आने के कारण शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु दशाओं का अनुभव करता है। 3. 'सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र का मैदान' (Indo-Ganga-Brahmaputra Plain) एक अग्र-गर्त मैदान (Foredeep Plain) का उदाहरण है, जिसका निर्माण हिमालय पर्वतमाला के उत्थान के दौरान उसके दक्षिण में बने विशाल अवनमन (Depression) में नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के लंबे समय तक निक्षेपण से हुआ है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'सहारा मरुस्थल' दुनिया का सबसे बड़ा उष्णकटिबंधीय मरुस्थल है, जो उत्तर अफ्रीका में फैला हुआ है और यहाँ प्रमुख रूप से चट्टानी मरुस्थल ('हमादा') तथा बालूका स्तूपों से युक्त मरुस्थल ('एर्ग') दोनों प्रकार की भू-आकृतियाँ पाई जाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के भौगोलिक विस्तार, सीमांत बिंदुओं और प्रशासनिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांश के मध्य है, जबकि सम्पूर्ण देश का (अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सहित) दक्षिणतम बिंदु इंदिरा प्वाइंट 6°45' उत्तर अक्षांश पर स्थित है। 2. भारत का देशांतरीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व देशांतर तक है, जिसके कारण देश के सबसे पश्चिमी बिंदु 'गुहार मोती' (गुजरात) और सबसे पूर्वी बिंदु 'किबुथु' (अरुणाचल प्रदेश) के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे (116 मिनट) का अंतर पाया जाता है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार कर्क रेखा (23°30' उत्तर अक्षांश) भारत के लगभग मध्य से गुजरती है और यह कुल आठ राज्यों से होकर निकलती है, जिसमें झारखंड की राजधानी 'रांची' इस रेखा के सबसे निकट स्थित प्रमुख शहर है। 4. भारत की स्थलीय सीमा लगभग 15,106.7 किमी है जो सात देशों से लगती है, तथा म्यांमार के साथ भारत की सीमा सबसे लंबी और अफगानिस्तान के साथ सबसे छोटी (106 किमी) सीमा साझा होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के प्रमुख हिमालयी और प्रायद्वीपीय दर्रों तथा उनकी भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'काराकोम दर्रा' (Karakoram Pass) महान हिमालय श्रेणी में स्थित एक उच्च तुंगता वाला दर्रा है, जो भारत को चीन (तिब्बत) से जोड़ता है और यह भारत का सबसे ऊँचा मोटर योग्य दर्रा है। 2. 'शिपकी ला दर्रा' (Shipki La) हिमाचल प्रदेश में जांस्कर श्रेणी में स्थित है, जिसके पास से सतलुज नदी भारत में प्रवेश करती है, और यह भारत तथा तिब्बत के बीच व्यापारिक मार्ग के रूप में कार्य करता है। 3. 'पालघाट दर्रा' (Palakkad Gap) पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रमुख चौड़ा दर्रा है, जो केरल के कोच्चि और पलक्कड़ को तमिलनाडु के कोयंबटूर तथा चेन्नई से सड़क और रेल मार्ग द्वारा जोड़ता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'बनिहाल दर्रा' (Banihal Pass) पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है, जिससे होकर जम्मू और श्रीनगर को जोड़ने वाला सड़क मार्ग गुजरता है और इसी दर्रे में जवाहर सुरंग (Jawahar Tunnel) स्थित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी के प्रमुख पर्वतों, पठारों और मरुस्थलों की भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विश्व का छत (Roof of the World) कहा जाने वाला 'पामीर का पठार' (Pamir Plateau) वास्तव में तيان शैन, कुनलन, काराकोरम, हिंदूकुश और हिमालय जैसी विशाल पर्वतमालाओं की एक प्रमुख गाँठ (knot) है। 2. 'अनाताकोरिया का पठार' (Anatolian Plateau) टर्की में टोरस और पोंटिक पर्वतश्रेणियों के मध्य स्थित एक अंतरपर्वतीय (Intermontane) पठार है, जिसके अंतर्गत अर्ध-शुष्क स्टेपी जलवायु पाई जाती है। 3. 'कोलोरैडो पठार' (Colorado Plateau) संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक लावा पठार (Lava Plateau) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ नदियों द्वारा गहरी घाटियों और प्रसिद्ध 'ग्रैंड कैन्यन' का निर्माण किया गया है। 4. दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के पश्चिमी तट पर स्थित 'अटाकामा मरुस्थल' (Atacama Desert) विश्व का सबसे शुष्क मरुस्थल है, जिसका मुख्य कारण पेरूवियन (हम्बोल्ट) ठंडी जलधारा का तट के सहारे प्रवाह और पर्वातीय वृष्टछाया क्षेत्र (Rain-shadow effect) की स्थिति है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरीय नितल के उच्चावच में 'महाद्वीपीय मग्नतट' (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता बहुत कम होती है और यहाँ सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में पहुँचने के कारण ये क्षेत्र विश्व के सबसे बड़े मछली पकड़ने के क्षेत्र (Fishing Grounds) माने जाते हैं। 2. 'अपोजी' (Apogee) वह स्थिति है जब चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी पर सामान्य से बहुत कम ऊँचे ज्वार और कमजोर ज्वार-भाटे आते हैं। 3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) हिंद महासागर को प्रशांत महासागर से जोड़ती है और सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) को मलय प्रायद्वीप से अलग करती है, जो वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अत्यधिक रणनीतिक महत्व रखती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'बेरिंग जलसंधि' (Bering Strait) प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर को आर्कटिक महासागर के चुकची सागर से जोड़ती है और एशिया महासागर के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तरी अमेरिका के अलास्का से अलग करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.