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General Science
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शुद्ध सोना?

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→ आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे परमाणु त्रिज्या घटती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की सहसंयोजक त्रिज्या उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है क्योंकि उनकी वांडरवाल्स त्रिज्या को मापा जाता है। 2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है। 3. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान आवर्त सारणी के वर्गों में नीचे जाने पर सामान्यतः कम (कम ऋणात्मक) होता है, किंतु ऑक्सीजन परिवार (वर्ग 16) और हैलोजन परिवार (वर्ग 17) के द्वितीय आवर्त के तत्व (क्रमशः ऑक्सीजन और फ्लोरीन) के इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके ठीक नीचे आने वाले तीसरे आवर्त के तत्वों (सल्फर और क्लोरीन) की तुलना में अधिक होता है। 4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका कारण 4f कक्षकों का आवरण प्रभाव अत्यंत दुर्बल होना है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिव विघटन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गामा क्षय' (Gamma decay) के दौरान नाभिक से उच्च ऊर्जा वाले विद्युत चुंबकीय विकिरण उत्सर्जित होते हैं, जिससे जनक नाभिक के परमाणु क्रमांक (Atomic number) और द्रव्यमान संख्या (Mass number) में कोई परिवर्तन नहीं होता है, बल्कि उत्तेजित नाभिक अपनी निम्न ऊर्जा अवस्था (Ground state) में लौट आता है। 2. रेडियोएक्टिव समस्थानिकों की अर्ध-आयु ($T_{1/2}$) का मान बाह्य पर्यावरणीय कारकों जैसे अत्यधिक उच्च ताप, दाब तथा प्रबल रासायनिक बंधों की उपस्थिति से काफी हद तक प्रभावित होता है, क्योंकि ये कारक नाभिक के आंतरिक विन्यास को सीधे नियंत्रित करते हैं। 3. नाभिकीय संलयन (Nuclear fusion) अभिक्रियाओं के लिए अत्यंत उच्च तापमान (लगभग $10^7$ से $10^8$ केल्विन) की आवश्यकता होती है ताकि धनावेशित नाभिकों के बीच के प्रतिकर्षी कूलॉम बल (Coulomb repulsive force) को पार करके उनके बीच नाभिकीय आकर्षण बल प्रभावी हो सके, जैसा कि सूर्य और तारों की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की परिघटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) केवल पृथ्वी के द्रव्यमान और उसकी कक्षा की त्रिज्या पर निर्भर करती है, तथा यह उपग्रह के अपने द्रव्यमान से पूर्णतः स्वतंत्र होती है। 2. यदि कोई उपग्रह पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट चक्कर लगा रहा है, तो उसका परिक्रमण काल लगभग 84.6 मिनट होता है, और उसकी कक्षीय चाल लगभग $7.9\text{ km/s}$ होती है। 3. जब कोई उपग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है, तो केप्लर के द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) के अनुसार, उपग्रह की चाल पृथ्वी के सबसे पास (उपसौर या उपभू) होने पर अधिकतम और सबसे दूर (अपसौर या अपभू) होने पर न्यूनतम होती है। 4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य नहीं कर रहा होता है, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्री और उपग्रह दोनों शून्य गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती और उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) चालक की भौतिक विमाओं पर निर्भर न करके केवल उसके पदार्थ की प्रकृति और ताप पर निर्भर करता है। 2. जब कई प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध (Equivalent resistance) संयोजन के प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से कम होता है, और सभी प्रतिरोधकों के सिरों के बीच विभवांतर समान रहता है। 3. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम - KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है। 4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और उनकी चुंबकीय पारगम्यता अनंत हो जाती है, जिससे वे पूर्ण प्रति-चुंबकीय की तरह व्यवहार करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में कोशिका विभाजन और कोशिकांगों की सूक्ष्म संरचना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं, जिनमें उनके अपने परिपत्र (Circular) डीएनए, 70S प्रकार के राइबोसोम होते हैं, और इनका विभाजन मुख्य रूप से समसूत्री विभाजन (Mitosis) के दौरान तुंतुक (Spindle fibers) की सहायता से होता है। 2. समसूत्री विभाजन (Mitosis) की पश्च अवस्था (Anaphase) के दौरान, सेंट्रोमियर का विभाजन होता है और sister chromatids अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं, जिसके लिए काइनेटोकोर (Kinetochore) पर स्थित मोटर प्रोटीन (जैसे डाइनीन और किनेसीन) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 3. अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) की पैकाइटीन (Pachytene) उप-अवस्था में समजात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-बहन क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय 'क्रॉसिंग ओवर' (Crossing over) कहलाता है, जो 'रिकॉम्बिनस' (Recombinase) एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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