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Geography
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वायुमंडल की पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के विभिन्न प्रकारों और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'अश्व अक्षांश' (Horse Latitudes) उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों के अंतर्गत लगभग 30° से 35° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच स्थित होते हैं, जहाँ वायु नीचे बैठती है (Subsidence), जिसके परिणामस्वरूप आसमान साफ रहता है और शांत या हल्की हवाएं चलती हैं।
- 2. 'पर्वतीय वर्षा' (Orographic Rainfall) तब होती है जब आर्द्र हवा को किसी पर्वतीय अवरोध के सहारे ऊपर उठने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे हवा ठंडी होकर संतृप्त हो जाती है और पर्वत के पवनाभिमुख (Windward) ढाल पर भारी वर्षा होती है, जबकि इसके विपरीत पाश्र्व या पवनावर्ती (Leeward) ढाल 'वर्षा छाया क्षेत्र' (Rain Shadow Area) बन जाता है।
- 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में स्थित 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) कम वायुदाब का एक ऐसा क्षेत्र होती है जहाँ हवा तेजी से ऊपर उठती है, भारी मूसलाधार वर्षा होती है और अत्यंत तीव्र हवाएं चलती हैं।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Extra-tropical Cyclones) विभिन्न वायु संहतियों (Air Masses) के मिलने से बनने वाले वाताग्र (Fronts) के सहारे विकसित होते हैं, जिनका प्रभाव क्षेत्र व्यापक होता है और इनमें गर्म व ठंडे वाताग्र दोनों का स्पष्ट संचरण देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियों (लगभग 30°-35° अक्षांश) को 'अश्व अक्षांश' कहा जाता है, जहाँ ऊपरी वायुमंडल से ठंडी हवा नीचे बैठती है, जिससे उच्च दाब, शांत मौसम और साफ आसमान की स्थिति बनती है। कथन 2 सही है: पर्वतीय वर्षा में आर्द्र हवाएं पर्वतीय बाधा से टकराकर ऊपर उठती हैं और पवनाभिमुख ढाल पर भारी वर्षा करती हैं, जबकि विपरीत ढाल 'वर्षा छाया क्षेत्र' में बदल जाता है। कथन 3 गलत है: 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) उष्णकटिबंधीय चक्रवात का केंद्र होती है जो शांत, हल्की हवाओं और साफ आसमान (मेघ रहित) वाला क्षेत्र होता है, न कि भारी वर्षा और तीव्र हवाओं वाला (जबकि आँख की दीवार/Eyewall में तीव्र वर्षा और हवाएं होती हैं)। कथन 4 सही है: शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों का निर्माण भिन्न तापमान और आर्द्रता वाली वायु संहतियों के मिलने से बने वाताग्रों के सहारे होता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार चक्रवातों की यह गतिकी पृथ्वी के वायुमंडलीय परिसंचरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Related Questions
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण तथा उनकी भूगर्भीय विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयला उत्पादन का लगभग 98% भाग 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जिसमें एंथ्रेसाइट श्रेणी का उत्तम कोटि का कोयला झारखंड की झरिया और बोकारो खानों से निकाला जाता है।
2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्र खंभात की खाड़ी के शेल्फ पर स्थित है, जहाँ पेट्रोलियम का मुख्य भंडार 'मियोसीन' (Miocene) युग की चूना पत्थर की संरचनाओं में पाया जाता है।
3. भारत में थोरियम के विशाल भंडार केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट' (Monazite) रेत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि यूरेनियम का उत्पादन झारखंड के जादूगोड़ा के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ली क्षेत्र से भी किया जाता है।
4. टर्शरी (Tertiary) कालीन कोयला मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है, जो उच्च गंधक (High Sulphur) और कम राख की विशेषताओं वाला होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयला भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा गोंडवाना कोयला क्षेत्रों (Gondwana Coalfields) में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं और इनमें उच्च कोटि का बिटुमिनस कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है।
2. देश में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के अधिकांश भंडार टर्शरी युग की तलछटी चट्टानों (Tertiary Sedimentary Rocks) और अपतटीय (Offshore) क्षेत्रों में स्थित हैं, जिसमें मुंबई हाई (Mumbai High) भारत का सबसे बड़ा अपतटीय तेल क्षेत्र है जो खंभात बेसिन के अंतर्गत आता है।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में यूरेनियम के भंडार झारखंड के सिंहभूम क्षेत्र और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना के तुमलापल्ले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर खोजे गए हैं, जबकि थोरियम का विशाल भंडार केरल, तमिलनाडु और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) के रूप में प्रचुरता से उपलब्ध है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश का पहला परमाणु विद्युत गृह तारापुर (Maharashtra) में स्थापित किया गया था, और परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक भारी जल (Heavy Water) का उत्पादन भारत में रासायनिक और उर्वरक निगम के विभिन्न संयंत्रों द्वारा किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की प्रमुख झीलों, जलप्रपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सोंग्लू झील' (Songliu Lake) या 'लोनार झील' (Lonar Lake) महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में स्थित एक क्रेटर झील है, जिसका निर्माण प्लीस्टोसिन काल में उल्कापिंड के आघात (Meteorite Impact) से हुआ था और यह बेसाल्ट चट्टानों में बनी है।
2. 'शिवसमुद्रम जलप्रपात' कावेरी नदी पर कर्नाटक में स्थित एक प्रसिद्ध जलप्रपात है, जिसके समीप ही वर्ष 1902 में एशिया का पहला जलविद्युत गृह (Hydroelectric Power Station) स्थापित किया गया था।
3. 'हीराकुड बांध परियोजना' महानदी पर ओडिशा में निर्मित दुनिया के सबसे लंबे मिट्टी के बांधों (Earthen Dams) में से एक है, जिसके पीछे बने कृत्रिम जलाशय का नाम 'महात्मा गांधी सागर' है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार राजस्थान की 'सांभर झील' भारत की सबसे बड़ी अंतर्देशीय खारे पानी की झील (Inland Salt Lake) है, जिससे देश के कुल नमक उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के प्रमुख उद्योगों और परिवहन अवसंरचना (रेल, राष्ट्रीय राजमार्ग और जलमार्ग) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का प्रथम आधुनिक इस्पात संयंत्र, 'भारतीय लौह एवं इस्पात कंपनी' (IISCO) की स्थापना वर्ष 1906 में पश्चिम बंगाल के कुल्टी में की गई थी, जबकि स्वतंत्रता के पश्चात सार्वजनिक क्षेत्र के तहत स्थापित पहला पूर्णतः एकीकृत इस्पात संयंत्र 'दुर्गापुर इस्पात संयंत्र' था।
2. 'राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-3' (NW-3) केरल में कोट्टापुरम से कोल्लम तक पश्चिम तट नहर, उद्योगमंडल नहर और चंपाकारा नहर के माध्यम से विस्तृत है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 205 किलोमीटर है।
3. उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर (North-South and East-West Corridors), जो स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का हिस्सा हैं, एक-दूसरे को 'झांसी' शहर में पार करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, मोहरोविकिक असंबद्धता (Moho Discontinuity) और चट्टानों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोहरोविकिक असंबद्धता क्रस्ट (Crust) और मेंटल (Mantle) के बीच की सीमा रेखा है, जहाँ भूकंपीय तरंगों (P-waves और S-waves) की गति में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है।
2. पृथ्वी की पपड़ी (Crust) में भार के अनुसार सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व 'सिलिकॉन' है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के क्रोड (Core) में मुख्य रूप से निकल और लोहे की प्रधानता के कारण इसे 'निफे' (NIFE) परत कहा जाता है।
3. चूना पत्थर (Limestone) के अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से कायांतरित होकर संगमरमर (Marble) में परिवर्तित होने की प्रक्रिया को तापीय या संपर्क कायांतरण (Contact Metamorphism) कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ऊपरी मेंटल के ठीक नीचे स्थित 'दुर्बलता मंडल' (Asthenosphere) लगभग 100 किमी से 400 किमी की गहराई तक फैला हुआ एक अत्यधिक श्यान (Viscous) और अर्ध-पिघला हुआ क्षेत्र है, जो विवर्तनिक प्लेटों के संचलन के लिए मैग्मा का मुख्य स्रोत प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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