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Geography
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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. देश में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत नलकूप और अन्य भूजल सिंचाई (Tube wells and groundwater) है, जिसके बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा नहरों (Canals) का आता है, और उत्तर प्रदेश में भूजल सिंचाई का सर्वाधिक विस्तार पाया जाता है।
  2. 2. 'सिंचित शुष्क कृषि' (Dryland Farming) उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा कृषि के लिए अपर्याप्त होती है, और यहाँ मुख्य रूप से ज्वार, बाजरा, रागी और दलहनी फसलें उगाई जाती हैं जिनमें जल की कम आवश्यकता होती है।
  3. 3. 'धान की गहन निर्वाह कृषि' (Intensive Subsistence Farming) पूर्वी भारत के उच्च वर्षा वाले जलोढ़ मैदानों में प्रधानता से की जाती है, जहाँ मानसून की अनिश्चितता के बावजूद ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन दोनों ऋतुओं में चावल की सघन खेती होती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में जायद (Zaid) फसल चक्र मुख्य रूप से रबी और खरीफ के बीच ग्रीष्मकाल में मार्च से जून के मध्य अपनाया जाता है, जिसमें तरबूज, खरबूज, ककड़ी और चारा फसलें प्रमुख रूप से उगाई जाती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत नलकूप और अन्य भूजल स्रोत हैं (लगभग 60% से अधिक), और इसके बाद नहरों का स्थान आता है। उत्तर प्रदेश देश में नलकूप सिंचाई में अग्रणी है। कथन 2 सही है क्योंकि शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में जहाँ सिंचाई के साधन सीमित हैं, शुष्क भूमि कृषि अपनाई जाती है और इसमें मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा) तथा दलहन उगाए जाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि चावल की गहन निर्वाह कृषि में मुख्य रूप से मानسون वर्षा पर निर्भरता या मानसूनी ऋतु (खरीफ) में धान प्रमुख होता है; शीतकाल में उत्तर भारत में मुख्य फसलें गेहूं, जौ आदि (रबी) होती हैं, न कि दोनों ऋतुओं में चावल की सघन खेती। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार कथन 4 बिल्कुल सही है, जायद फसलें गर्मियों के छोटे मौसम में उगाई जाने वाली फसलें हैं जिनमें जल की अधिक आवश्यकता वाले कद्दू, तरबूज आदि शामिल हैं। अतः विकल्प (a) सही है।
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