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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. देश में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत नलकूप और अन्य भूजल सिंचाई (Tube wells and groundwater) है, जिसके बाद दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा नहरों (Canals) का आता है, और पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश में भूजल दोहन का प्रतिशत सबसे अधिक है।
- 2. 'माइक्रोन्यूट्रिएंट्स' और जल की बचत के दृष्टिकोण से 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) सबसे प्रभावी पद्धति है, जिसका सर्वाधिक विस्तार क्षेत्रफल की दृष्टि से महाराष्ट्र और कर्नाटक राज्यों में पाया जाता है।
- 3. भारत में 'सदाबहार क्रांति' (Evergreen Revolution) का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना कृषि उत्पादन को बढ़ाना है, जिसके तहत जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा दिया जा रहा है और सिक्किम भारत का पहला 100% जैविक राज्य घोषित किया गया है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत के कुल खाद्यान्न उत्पादन में चावल का हिस्सा सबसे अधिक है, जबकि मोटे अनाजों (Millets) के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल राजस्थान राज्य में पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा साधन भूजल (नलकूप और अन्य कुएँ) है, जो लगभग 60% से अधिक भाग की सिंचाई करता है, जबकि नहरें दूसरा सबसे बड़ा साधन हैं। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में भूजल सिंचाई का सर्वाधिक विस्तार है। 2. ड्रिप और फव्वारा (Sprinkler) सिंचाई जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ जल उपयोग दक्षता को बढ़ाती हैं, और क्षेत्रफल के मामले में महाराष्ट्र व कर्नाटक अग्रणी हैं। 3. डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा परिकल्पित 'सदाबहार क्रांति' का संबंध पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखते हुए उत्पादन में वृद्धि से है, और सिक्किम देश का पहला पूर्णतः जैविक (Organic) राज्य है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में खाद्यान्न में चावल प्रमुख है तथा बाजरा जैसे मोटे अनाजों का सबसे बड़ा उत्पादक व क्षेत्रफल वाला राज्य राजस्थान है।
Related Questions
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना और उत्पादन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयले के कुल भंडारों और उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों में पाया जाता है, जिनमें दामोदर, सोन और महानदी घाटियाँ प्रमुख हैं, तथा यहाँ का कोयला मुख्य रूप से बिटुमिनस प्रकार का होता है जिसमें एंथ्रेसाइट की तुलना में नमी अधिक होती है।
2. 'टर्तीयक युगीन कोयला' (Tertiary Coal) मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में पाया जाता है, जो उच्च सल्फर सामग्री वाला होता है और इसमें कार्बन की मात्रा गोंडवाना कोयले की तुलना में कम होती है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में पेट्रोलियम के कुल संचित भंडारों का अधिकांश हिस्सा अपतटीय (Offshore) क्षेत्रों जैसे 'बॉम्बे हाई' में केंद्रित है, जबकि ऑनशोर क्षेत्रों में असम का डिगबोई और गुजरात का अंकलेश्वर प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र हैं।
4. भारत में 'यूरेनियम' के सबसे बड़े संचित निक्षेप झारखंड के सिंहभूम ताम्र मेखला तक ही सीमित हैं, और देश के भीतर आंध्र प्रदेश के तुममलापल्ली या तेलंगाना क्षेत्र में यूरेनियम के कोई बड़े भंडार नहीं खोजे गए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ अपने उद्गम से लेकर समुद्र तक पहुँचने के दौरान 'युवावस्था' में होती हैं और मैदानी भागों में पहुँचकर अत्यधिक विसर्पण (Meandering) करती हैं तथा अपने मार्ग को बार-बार बदलकर गोखुर झीलों (Oxbow Lakes) का निर्माण करती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से प्रौढ़ावस्था (Mature stage) में पहुँच चुकी हैं और अपने आधार तल (Base level) को प्राप्त कर चुकी हैं जिसके कारण वे सीधी और स्थिर घाटियों में बहती हैं।
2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे नर्मदा और तापी को छोड़कर) पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, किंतु महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी बड़ी नदियाँ मुहाने पर विशाल 'डेल्टा' (Delta) का निर्माण करती हैं, जबकि पश्चिमी तट की ओर बहने वाली नदियाँ ऐश्चुअरी बनाती हैं।
3. सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'चिनाब' (चंद्र और भागा नदियों के मिलने से बनती है) पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले भारत के हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य से होकर प्रवाहित होती है और यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलती है, जहाँ इसे 'यार्लुंग त्संगपो' कहा जाता है, और यह अरुणाचल प्रदेश में 'दिहांग' नाम से प्रवेश करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा की गतिकी और प्रमुख जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत गहराई लगभग 120 से 200 मीटर तक होती है, और यहाँ सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में पहुँचने के कारण फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) का विकास होता है, जिससे यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्यन क्षेत्रों (Fishing Grounds) में गिना जाता है।
2. 'दैनिक ज्वार' (Diurnal Tide) वह ज्वार है जिसमें प्रत्येक 24 घंटे और 52 मिनट की अवधि में केवल एक बार उच्च ज्वार और एक बार निम्न ज्वार आता है, जबकि 'अर्ध-दैनिक ज्वार' (Semi-diurnal tide) में यह चक्र प्रत्येक दिन में दो बार दोहराया जाता है।
3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) और मलय प्रायद्वीप (मलेशिया) के बीच स्थित है, जो प्रशांत महासागर को दक्षिण चीन सागर के माध्यम से हिंद महासागर से जोड़ती है और यह वैश्विक समुद्री व्यापार का एक अति संवेदनशील और व्यस्त मार्ग है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार वृहद ज्वार (Spring Tide) पूर्णिमा और अमावस्या के दिन उत्पन्न होता है, जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक ही सीधी रेखा में (स्युजी की स्थिति) होते हैं, जिसके कारण उनके गुरुत्वाकर्षण बलों का संचयी प्रभाव अधिकतम होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की मृदा प्रणालियों और उनकी पेडोोजेनिक (मृदा निर्माण) विशेषताओं तथा वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले मानसूनी क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, जिसके कारण इन मृदाओं में सिलिका का निष्कासन हो जाता है तथा आयरन एवं एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं।
2. 'काली मृदा' (Black Soil), जिसे स्थानीय रूप से 'रेगुर मृदा' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसाल्टिक लावा के अपक्षय से बनती है और इसमें 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और सूखने पर चौड़ी-चौड़ी गहरी दरारों से फट जाती है।
3. 'क्षारकीय एवं रेह मृदा' (Alkaline Soils) मुख्य रूप से अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचाई तथा अकुशल जल निकासी के कारण उत्पन्न जलभराव एवं केशिका क्रिया (Capillary action) के परिणामस्वरूप सतह पर सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के जमा होने से बनती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की मिट्टियों को उनकी उर्वरता और उत्पत्ति के आधार पर कुल 8 प्रमुख मृदा समूहों में वर्गीकृत किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की प्रमुख झीलों, जलप्रपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लोकटक झील' (Loktak Lake) पूर्वोत्तर भारत में मीठे पानी की सबसे बड़ी झील है, जिसमें तैरते हुए अद्वितीय वनस्पति और मृदा के अनूठे द्वीप पाए जाते हैं जिन्हें 'फुम्दि' (Phumdis) कहा जाता है, और इसी झील पर 'केइबुम लामजाओ' (Keibul Lamjao National Park) स्थित है जो संगाई हिरण का अंतिम प्राकृतिक आवास है।
2. 'शरावती नदी' पर कर्नाटक राज्य में स्थित 'कुंचिकल जलप्रपात' (Kunchikal Falls) भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात है, जबकि मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी पर स्थित 'धुआँधार जलप्रपात' एक कगार जलप्रपात का प्रमुख उदाहरण है।
3. 'सरदार सरोवर परियोजना' (Sardar Sarovar Project) नर्मदा नदी पर निर्मित एक बहुउद्देशीय परियोजना है, जिससे लाभान्वित होने वाले राज्यों में गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'चिलिका झील' (Chilika Lake) भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है, जो महानदी के मुने पर स्थित होने के कारण सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों के लिए एक प्रमुख आश्रय स्थल बनती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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