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Geography
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भारत की मृदाओं (मिट्टी) के वर्गीकरण, उनके खनिज संगठन, निर्माण प्रक्रियाओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लाल और पीली मृदाओं (Red and Yellow Soils) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड (Iron Oxide) के व्यापक प्रसार के कारण होता है, जबकि जल योजन (Hydration) के बाद यही मृदा रासायनिक रूप से पीली दिखाई देती है, और इस मृदा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस तथा ह्यूमस की गंभीर कमी होती है।
- 2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं (Arid and Desert Soils) में घुलनशील लवणों और कैल्शम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे की पर्तों में कैंचियों (Kankar) की परत पाई जाती है, जिसके कारण इस मृदा में नीचे की ओर जल का अंतःस्यंदन (Infiltration) पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है और यह कृषि के लिए पूर्णतः अनुपयुक्त होती है।
- 3. पीटमय और दलदली मृदाओं (Peaty and Marshy Soils) का विकास भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर मृत कार्बनिक पदार्थों के जमा होने से होता है, जिसके कारण इन मृदाओं में 40 से 50 प्रतिशत तक घुलनशील ह्यूमस और अत्यधिक मात्रा में क्षारीय लवण पाए जाते हैं।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और भारी वर्षा के बीच वैकल्पिक रूप से शुष्क और आर्द्र स्थितियों के दौरान होने वाले तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका का पूर्णक्षय हो जाता है और केवल आयरन व एल्युमिनियम के ऑक्साइड ही शेष बचते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लाल और पीली मृदाओं का लाल रंग क्रिस्टलीय और रूपांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण के कारण होता है और जलयोजन के बाद यह पीली दिखती है, जिसमें नाइट्रोजन, ह्यूमस और फॉस्फोरस की कमी होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि शुष्क मृदाओं में कैल्शियम कार्बोनेट की बढ़ती मात्रा के कारण निचली परतों में 'कंकड़' की परत बनती है, लेकिन उचित सिंचाई व्यवस्था और उर्वरकों के प्रयोग से इस मृदा में बाजरा, ज्वार जैसी सूखा-सहिष्णु फसलें उगाई जा सकती हैं, अतः यह पूर्णतः अनुपयुक्त नहीं है। कथन 3 गलत है क्योंकि पीटमय और दलदली मृदाओं में भारी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ और ह्यूमस (लगभग 10-40%) तो होते हैं, किंतु इनमें क्षारीय लवणों की अधिकता नहीं होती बल्कि ये मृदाएं आमतौर पर भारी और अम्लीय प्रकृति की होती हैं। कथन 4 सही है, जैसा कि विकिपीडिया संदर्भ में वर्णित है, लैटेराइट मृदा का निर्माण उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और उच्च तापमान के कारण होने वाले निक्षालन (Leaching) से होता है, जहाँ सिलिका घुल कर बह जाती है और आयरन-एल्युमिनियम के यौगिक बच जाते हैं। अतः केवल कथन 1 और 4 सही हैं।
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पवन प्रणालियों, वायुमंडलीय आर्द्रता और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जेट स्ट्रीम' (Jet Streams) ऊपरी क्षोभमंडल में तीव्र गति से बहने वाली भू-विक्षेपी (Geostrophic) पवनें हैं, जिनका संचरण सामान्यतः पश्चिम से पूर्व की ओर होता है और ये भारतीय मानसून तथा शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के मार्ग को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
2. 'ओस' (Dew) के निर्माण के लिए यह आवश्यक है कि ओस बिंदु (Dew Point) का तापमान 0°C से नीचे हो, ताकि जलवाष्प सीधे बर्फ के सूक्ष्म कणों (पाले) में परिवर्तित हो सके और द्रव रूप में पानी का संक्षेपण न हो।
3. 'एंटीसाइक्लोन' (Anticyclone) या प्रतिचक्रवात में वायुदाब का वितरण केंद्र से बाहर की ओर उच्च से निम्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्तरी गोलार्ध में प्रतिचक्रवात की पवनें घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में बाहर की ओर प्रवाहित होती हैं।
4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे कि कैरिबियन सागर में इन्हें 'हुरिकेन' (Hurricanes), फिलीपींस में 'टाइफून' (Typhoons) और ऑस्ट्रेलिया में 'विली-विलीज' (Willy-Willies) कहा जाता है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, चट्टानों के चक्र (Rock Cycle) और उनके प्रकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बेसाल्ट' (Basalt) एक बहिर्भेदी आग्नेय शैल (Extrusive Igneous Rock) है, जो द्रवित मैग्मा के धरातल पर तेजी से ठंडा होने के कारण छोटे रवेदार (Fine-grained) संरचना बनाती है, जबकि 'ग्रेनाइट' एक अंतर्भेदी आग्नेय शैल (Intrusive Igneous Rock) है जो धीरे-धीरे ठंडा होने के कारण बड़े क्रिस्टलीय कणों से युक्त होती है।
2. 'क्वार्टजाइट' (Quartzite) और 'संगमरमर' (Marble) क्रमशः बलुआ पत्थर (Sandstone) और चूना पत्थर (Limestone) के तापीय या स्पर्श कायांतरण (Thermal Metamorphism) के परिणामस्वरूप बनने वाली गैर-पर्येत (Non-foliated) कायांतरित चट्टानें हैं।
3. 'सिफ़' (Sill) और 'डाइक' (Dyke) मैग्मा के अंतर्भेदी रूपों के उदाहरण हैं, जहाँ सिफ़ मैग्मा का क्षैतिज (Horizontal) या कम झुकाव वाला संस्तर होता है, जबकि डाइक मैग्मा का दीवार जैसी लंबवत (Vertical) संरचना में जमाव होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) पृथ्वी के धरातल पर अपक्षय और अपरदन के एजेंटों द्वारा निक्षेपित पदार्थों के संपीड़न एवं समेकन (Lithification) से बनती हैं, और ये चट्टानें पर्णयुक्त (Layered or Stratified) होती हैं जिनमें जीवाश्म (Fossils) पाए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की संरचना, विसर्जन और मार्ग संबंधी विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और तापी नदियाँ भ्रंश घाटी (Rift Valley) से होकर पश्चिम की ओर बहती हैं और डेल्टा के स्थान पर ऐश्चुअरी (Estuary) बनाती हैं।
2. हिमालयी अपवाह तंत्र के अंतर्गत सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदियाँ 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) अपवाह का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी विद्यमान थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ अपनी घाटियों को गहरा करके गार्ज (Gorges) का निर्माण किया है।
3. दक्षिण भारत की 'तुंगभद्रा' नदी कृष्णा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है, जो स्वयं तुंगा और भद्रा नदियों के संगम से बनती है, और इस नदी बेसिन में प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगर 'हम्पी' अवस्थित है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय नदियों में 'गोदावरी' नदी सबसे बड़ी नदी प्रणाली है, जिसे इसकी लंबाई और बड़े जलग्रहण क्षेत्र के कारण 'वृद्ध गंगा' या 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है, और यह महाराष्ट्र के नासिक जिले से निकलती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जेट स्ट्रीम (Jet Streams), वायुमंडलीय दाब पेटियों और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. उपोष्णकटिबंधीय जेट स्ट्रीम (Subtropical Jet Stream) मुख्य रूप से क्षोभसीमा के पास 20° से 30° अक्षांशों के बीच पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होने वाली तीव्र क्षैतिज वायु धाराएँ हैं, जो भारतीय मानसून के आगमन और विच्छेद (Break in Monsoon) को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
2. 'फैरेल का नियम' (Ferrel's Law) के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में कोई भी पवन अपनी मूल दिशा से दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित हो जाती है, जिसका मुख्य कारण पृथ्वी का घूर्णन और उत्पन्न होने वाला कोरिऑलिस बल है।
3. शीतोष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) की उत्पत्ति मुख्य रूप से उष्ण और ठंडी वायु राशियों (Air Masses) के मिलने से बनने वाले वाताग्र (Fronts) के सहारे होती है, और ये पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते हुए भारत के उत्तर-पश्चिम में सर्दियों के दौरान 'पश्चिमी विक्षوب' (Western Disturbances) के रूप में वर्षा लाते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) को बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में 'चक्रवात' कहा जाता है, जबकि प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग में इन्हें 'टायफून' (Typhoons) और कैरिबियन सागर में 'हरिकेन' (Hurricanes) के नाम से जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक विवर्तनिक शक्तियों, भूकंपीय यंत्र विज्ञान (Seismology), ज्वालामुखी के प्रकार और सुनामी की उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के समय सबसे पहले अभिकेन्द्र (Epicenter) पर पहुँचने वाली प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) प्रकृति की होती हैं, जो ठोस, तरल और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि द्वितीयक तरंगें (S-waves) केवल ठोस माध्यम में ही गति करती हैं।
2. स्ट्रोम्बोली (Stromboli) ज्वालामुखी को 'भूमध्यसागर का प्रकाशस्तंभ' कहा जाता है, जो एक प्रकार का शांत विदारक उद्गार वाला ज्वालामुखी है जिसमें अत्यधिक चिपचिपा और सिलिका-युक्त अम्लीय लावा निकलता है।
3. सुनामी (Tsunami) लहरें खुले महासागर में बहुत कम ऊँचाई और लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, लेकिन तटीय उथले पानी में पहुँचने पर इनकी गति और तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है जबकि ऊँचाई अत्यधिक कम हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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