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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र के अंतर्गत सबसे बड़ा हिस्सा नलकूपों (Tube wells) और अन्य कुओं का है, जिसके बाद दूसरा स्थान नहरों (Canals) का आता है, और कुल सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और फव्वारा) के संचयी क्षेत्रफल में राजस्थान और महाराष्ट्र देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हैं।
  2. 2. 'धान की गहनता प्रणाली' (System of Rice Intensification - SRI) पारंपरिक रोपण विधि की तुलना में कम पानी, कम बीज और कम रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करती है, जिसमें पौधों के बीच अधिक दूरी और मिट्टी के अंतःक्षेत्रीय वायुवीजन (Aeration) पर जोर दिया जाता है।
  3. 3. 'शून्य जु tillage' (Zero Tillage) तकनीक का उपयोग मुख्य रूप से गेहूँ और धान जैसी फसलों में मृदा के जैविक कार्बन को संरक्षित करने, खरपतवारों के नियंत्रण और अवशेषों के प्रबंधन के लिए किया जाता है, जिससे जल उपयोग दक्षता में कमी आती है और वाष्पीकरण बढ़ता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में वर्ष भर उगाई जाने वाली 'जायद' फसलें मुख्य रूप से रबी और खरीफ के बीच के अंतराल (मार्च से जून) में उगाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से तरबूज, ककड़ी, खीरा और चारे की फसलों के रूप में जल-कुशल और कम अवधि वाली होती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा स्रोत भूजल (नलकूप और कुएं) है, इसके बाद नहरें आती हैं, और सूक्ष्म सिंचाई में राजस्थान और महाराष्ट्र अग्रणी हैं। कथन 2 सही है क्योंकि SRI तकनीक में कम जल, कम बीज और बेहतर वायुवीजन का उपयोग होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि शून्य जुताई (Zero Tillage) से जल उपयोग दक्षता बढ़ती है, वाष्पीकरण और मृदा क्षरण कम होता है, न कि जल उपयोग दक्षता में कमी आती है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की कृषि ऋतुओं में जायद फसलें ग्रीष्मकालीन अल्पकालिक फसलें हैं। अतः सही विकल्प (a) है।
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