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Geography
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण, उनकी उत्पत्ति और विशिष्ट भंडारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कोयले के कुल भंडार का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा गोंडवाना क्रम की चट्टानों में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं और इनमें उच्च कोटि का कोकिंग व नॉन-कोकिंग बिटुमिनस कोयला प्रचुर मात्रा में मिलता है।
  2. 2. देश में लिग्नाइट कोयला (भूरा कोयला) के प्रमुख भंडार मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत के बाहर टर्शरी युग की चट्टानों में मिलते हैं, जिसमें तमिलनाडु का नेवेली (Neyveli) क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा लिग्नाइट उत्पादक क्षेत्र है, जबकि राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर में भी इसके छोटे भंडार मौजूद हैं।
  3. 3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक थोरियम का विशाल भंडार केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) के रूप में प्रचुरता से उपलब्ध है, जिसका निष्कर्षण मोनाज़ाइट अयस्क से किया जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के अधिकांश उत्पादक भंडार टर्शरी युग की अपतटीय (Offshore) और भू-आवेष्ठित तलछटी बेसिनों में स्थित हैं, जिसमें 'मुंबई हाई' भारत का सबसे बड़ा अपतटीय तेल क्षेत्र है जो खंभात बेसिन के अंतर्गत आता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। भारत में कोयला संसाधन दो प्रमुख भू-वैज्ञानिक युगों यानी गोंडवाना (लगभग 98% भंडार) और टर्शरी युग में पाए जाते हैं। गोंडवाना कोयला उच्च कोटि का बिटुमिनस होता है जो दामोदर (झारखंड-पश्चिम बंगाल), सोन, महानदी और गोदावरी घाटियों में मिलता है। लिग्नाइट कोयला (भूरा कोयला) टर्शरी काल का है, जिसके सबसे बड़े भंडार तमिलनाडु के नेवेली में स्थित हैं। भारत में थोरियम के लिए मोनाज़ाइट बालू केरल और अन्य तटीय राज्यों में प्रचुर मात्रा में मिलती है। इसके अलावा, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश में पेट्रोलियम के अधिकांश भंडार टर्शरी युग की तलछटी चट्टानों और अपतटीय क्षेत्रों जैसे मुंबई हाई में संकेंद्रित हैं।
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