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Geography
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भारतीय जलवायु और मानसून के संदर्भ में, 'अल-निनो दक्षिणी दोलन' (ENSO) और भारतीय मानसून की अन्योन्य क्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. अल-निनो (El Nino) घटना के दौरान दक्षिण अमेरिकी तट के पास पेरू के ठंडे पानी का स्थान गर्म जलधारा द्वारा ले लिया जाता है, जिससे प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया) में उच्च वायुदाब और पूर्वी भाग में निम्न वायुदाब विकसित हो जाता है, जो भारतीय मानसून को कमजोर कर देता है।
  2. 2. 'ला-निना' (La Nina) को अल-निनो के विपरीत अवस्था माना जाता है, जिसमें पश्चिमी प्रशांत महासागर में असामान्य रूप से उच्च तापमान और पूर्वी प्रशांत महासागर में ठंडा जल पाया जाता है, जो भारत में सामान्य से अधिक मानसूनी वर्षा और बाढ़ जैसी स्थितियों को प्रेरित करता है।
  3. 3. 'इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) का 'धनात्मक चरण' (Positive IOD) पश्चिमी हिंद महासागर (अफ़्रीकी तट) को गर्म और पूर्वी हिंद महासागर (इंडोनेशियाई तट) को ठंडा करता है, जो अल-निनो के नकारात्मक प्रभावों को आंशिक रूप से बेअसर करके भारत में अच्छी मानसून वर्षा सुनिश्चित करने में सहायक होता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अल-निनो शब्द का मूल स्पेनिश भाषा से है जिसका शाब्दिक अर्थ 'छोटा बालक' या 'ईसा मसीह' होता है, क्योंकि यह गर्म जलधारा आमतौर पर क्रिसमस के आसपास दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर और पेरू के तट पर प्रकट होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। अल-निनो घटना के दौरान पेरू के तट पर गर्म जलधारा के उभरने से प्रशांत महासागर में वायुदाब की सामान्य स्थिति उलट जाती है, जिससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है। इसके विपरीत, ला-निना भारत में मानसूनी वर्षा को बढ़ाता है। इंडियन ओशन डिपोल (IOD) का धनात्मक चरण पश्चिमी हिंद महासागर को गर्म करके भारतीय मानसून को मजबूती प्रदान करता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह मौसमी और महासागरीय परिघटना वैश्विक मौसम को बड़े पैमाने पर प्रभावित करती है।
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनकी दिशा तथा विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से उत्पन्न होकर उत्तर-पूर्वी अटलांटिक महासागर की ओर प्रवाहित होती है, और पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में भी बंदरगाहों को बर्फ से मुक्त रखने में मदद करती है। 2. 'पेरूवियन जलधारा' (या हम्बोल्ट जलधारा) प्रशांत महासागर की एक ठंडी जलधारा है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है और यहाँ 'एल नीनो' (El Niño) परिघटना के विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। 3. 'बेंगुएला जलधारा' (Benguela Current) उत्तरी अटलांटिक महासागर में प्रवाहित होने वाली एक प्रमुख ठंडी जलधारा है, जो अफ्रीका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर दिशा की ओर बहती है और कालाहारी मरुस्थल के निर्माण में सहायक है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय जलधाराओं के संचलन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस बल), प्रचलित हवाएँ, तापमान और लवणता में भिन्नता शामिल हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इन चक्रवातों के विकास के लिए समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक है, जिससे प्रचुर मात्रा में आर्द्रता और ऊर्जा मिल सके। 2. कोरियोलिस बल (Coriolis Force) की अनुपस्थिति के कारण ये चक्रवात भूमध्य रेखा (Equator) के बिल्कुल निकट अत्यधिक शक्तिशाली रूप लेते हैं। 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र को 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) कहा जाता है, जहाँ वायुदाब न्यूनतम और मौसम सामान्यतः शांत, मेघहीन होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ अपने उद्गम से लेकर समुद्र तक पहुँचने के दौरान 'युवावस्था' में होती हैं और मैदानी भागों में पहुँचकर अत्यधिक विसर्पण (Meandering) करती हैं तथा अपने मार्ग को बार-बार बदलकर गोखुर झीलों (Oxbow Lakes) का निर्माण करती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से प्रौढ़ावस्था (Mature stage) में पहुँच चुकी हैं और अपने आधार तल (Base level) को प्राप्त कर चुकी हैं जिसके कारण वे सीधी और स्थिर घाटियों में बहती हैं। 2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे नर्मदा और तापी को छोड़कर) पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, किंतु महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी बड़ी नदियाँ मुहाने पर विशाल 'डेल्टा' (Delta) का निर्माण करती हैं, जबकि पश्चिमी तट की ओर बहने वाली नदियाँ ऐश्चुअरी बनाती हैं। 3. सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'चिनाब' (चंद्र और भागा नदियों के मिलने से बनती है) पाकिस्तान में प्रवेश करने से पहले भारत के हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर राज्य से होकर प्रवाहित होती है और यह सिंधु की सबसे बड़ी सहायक नदी है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट चेमायुंगडुंग ग्लेशियर से निकलती है, जहाँ इसे 'यार्लुंग त्संगपो' कहा जाता है, और यह अरुणाचल प्रदेश में 'दिहांग' नाम से प्रवेश करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धताओं (Discontinuities) और चट्टानों (शैल) के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मोहरोविसिक असंबद्धता' (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जबकि 'गुटेनबर्ग असंबद्धता' (Gutenberg Discontinuity) ऊपरी मेंटल और निचले मेंटल को एक-दूसरे से अलग करती है। 2. आग्नेय चट्टानों (Igneous Rocks) को प्राथमिक चट्टान भी कहा जाता है, क्योंकि इनका निर्माण मैग्मा या लावा के ठंडे होने और जमने से होता है, और बेसाल्ट तथा ग्रेनाइट इसके प्रमुख उदाहरण हैं। 3. कायांतरण प्रक्रिया के दौरान, मूल चूना पत्थर (Limestone) अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से 'संगमरमर' (Marble) में परिवर्तित हो जाता है, जो एक गैर-पर्दार (Non-foliated) कायांतरित चट्टान है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी की बाहरी क्रस्ट या भूपर्पटी में भार के अनुसार सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व 'ऑक्सीजन' है, जिसके बाद सिलिकॉन और एल्युमिनियम का स्थान आता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत में सिंचाई पद्धतियों, जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) और प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों में फसलों के पैटर्न के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणाली) पारंपरिक बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation) की तुलना में जल उपयोग दक्षता को काफी हद तक बढ़ा देती है और इससे भूजल स्तर के अवक्षय को नियंत्रित करने में सीधी मदद मिलती है। 2. भारत में 'शून्य जुताई' (No-Till Farming) तकनीक का मुख्य लाभ यह है कि यह मृदा के कार्बनिक पदार्थों के क्षरण को रोकती है, नमी बनाए रखती है और पारंपरिक जुताई की तुलना में ऊर्जा तथा श्रम लागत को कम करती है। 3. सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को अपनाने में भारत के सभी राज्य समान रूप से प्रगति पर हैं, और उत्तर भारत के मैदानी राज्य सबसे उन्नत ड्रिप सिंचाई नेटवर्क वाले क्षेत्र माने जाते हैं। 4. फसल विविधीकरण (Crop Diversification) के तहत जल-गहन फसलों (जैसे धान और गन्ना) के स्थान पर दलहन और तिलहन जैसी कम पानी की आवश्यकता वाली फसलों को बढ़ावा देना अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में स्थायी कृषि के लिए अनिवार्य माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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