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Geography
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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियाँ और प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों (Micro-irrigation systems) जैसे टपक सिंचाई (Drip irrigation) और फव्वारा सिंचाई (Sprinkler irrigation) को बढ़ावा देने वाली केंद्र सरकार की प्रमुख योजना 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के तहत 'हर खेत को पानी' और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) के घटकों पर विशेष बल दिया जाता है।
- 2. 'धान' (Paddy) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसके लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), उच्च आर्द्रता और वार्षिक वर्षा 100 सेमी से अधिक की आवश्यकता होती है, और इसे पारंपरिक रूप से पुड्डलिंग (Puddling) विधि द्वारा रोपा जाता है जो मृदा की पारगम्यता को कम करती है।
- 3. भारत में 'गेहूं' (Wheat) रबी की एक प्रमुख फसल है जिसके सफल उत्पादन के लिए मध्यम तापमान और मध्यम वर्षा (50 से 75 सेमी) की आवश्यकता होती है, तथा इसके पकने के समय तेज धूप और ठंडे वातावरण के स्थान पर अत्यधिक उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में कुल बोए गए क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा चावल और गेहूं जैसी खाद्य फसलों के अंतर्गत आता है, जबकि वाणिज्यिक और नकदी फसलों का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) का मुख्य उद्देश्य 'हर खेत को पानी' के साथ-साथ 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' के माध्यम से जल उपयोग दक्षता को बढ़ाना है। कथन 2 सही है क्योंकि धान की खेती के लिए उच्च तापमान, आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है, और पुड्डलिंग (मृदा का पंकिलकरण) प्रक्रिया पानी के रिساव (percolation) को रोककर जल को रोके रखने में मदद करती है। कथन 3 गलत है क्योंकि गेहूं के पकने के समय तेज धूप और ठंडे, शुष्क मौसम या मध्यम तापमान की आवश्यकता होती है; इस समय अत्यधिक उच्च तापमान फसल के लिए हानिकारक होता है। कथन 4 सही है, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत के कृषि पैटर्न में खाद्यन्न फसलों (विशेषकर चावल और गेहूं) का वर्चस्व है।
Related Questions
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पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनकी ऊष्मीय विशेषताओं और वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'क्षोभमंडल' (Troposphere) की ऊँचाई विषुवत वृत्त पर सबसे अधिक होती है, क्योंकि यहाँ तीव्र संवहन धाराओं (Convectional currents) के कारण गर्म वायु ऊपर उठती है, जबकि ध्रुवों पर यह सबसे कम होती है।
2. 'तापमंडल' (Thermosphere) के अंतर्गत आने वाली 'आयनमंडल' (Ionosphere) परत में विद्युत आवेशित कण (आयन्स) पाए जाते हैं, जो रेडियो तरंगों को पृथ्वी पर परावर्तित करते हैं, और इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान में लगातार भारी गिरावट दर्ज की जाती है।
3. 'उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी' (Subtropical High Pressure Belt) का निर्माण मुख्य रूप से पृथ्वी के घूर्णन जनित अपकेंद्रीय बल और विषुवत रेखा से ऊपर उठी गर्म हवाओं के ठंडे होकर 30°-35° अक्षांशों के पास नीचे बैठने (Subsidence) के कारण होता है।
4. 'ध्रुवीय पूर्वपवनें' (Polar Easterlies) उच्च वायुदाब वाले ध्रुवीय क्षेत्रों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटियों की ओर प्रवाहित होने वाली ठंडी पवनें हैं, जो कोरियोगिस बल के प्रभाव से उत्तरी गोलार्ध में उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में मिलने वाला अधिकांश धात्विक कोयला गोंडवाना क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जिसमें सल्फर की मात्रा अत्यंत कम और वाष्पशील पदार्थों की अधिकता होती है, और यह देश के कुल कोयला भंडार का लगभग 98 प्रतिशत भाग है।
2. देश में पेट्रोलियम के प्राचीनतम भंडार असम के 'डिगबोई' क्षेत्र में खोजे गए थे, जो टर्शरी युग की अवसादी शैल संरचनाओं से संबंधित हैं और यह एशिया का सबसे पहला कार्यरत तेल कुआँ है।
3. भारत के झारखंड राज्य में स्थित 'जादूगोड़ा' और 'नरवापहाड़' की खदानें यूरेनियम के उत्पादन के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं, जहाँ यह खनिज मुख्य रूप से शिष्ट और नाइस जैसी कायांतरित चट्टानों से निकाला जाता है।
4. देश में थोरियम का मुख्य स्रोत 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite) है, जो केवल केरल के तटों तक ही सीमित है और इसके अपतटीय भंडारों में अन्यत्र कहीं भी इसका विस्तार नहीं पाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय मानसून की उत्पत्ति और उसकी दीर्घकालिक विविधताओं को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'तिब्बती पठार का तापीय कारक' (Thermal Factor of Tibetan Plateau) ग्रीष्मकाल में एक विशाल उच्च-तुंगता वाले हीट-इंजन के रूप में कार्य करता है, जो लगभग 9 किमी की ऊँचाई पर एक प्रबल प्रति-चक्रवात का निर्माण करके उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम को जन्म देता है।
2. 'माडागास्कर के पूर्व में मस्कारेन उच्च वायुदाब' (Mascarene High) की तीव्रता में होने वाले उतार-चढ़ाव दक्षिणी गोलार्ध से आने वाली व्यापारिक हवाओं को दाब प्रवणता प्रदान करते हैं, जिससे सोमाली जेट की गति और भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी वर्षा की मात्रा सीधे तौर पर नियंत्रित होती है।
3. 'हिंद महासागर द्विध्रुव' (Indian Ocean Dipole - IOD) की 'सकारात्मक चरण' (Positive Phase) के दौरान पश्चिमी हिंद महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जो भारत में मानसून को कमजोर करता है और गंभीर सूखे की स्थिति उत्पन्न करता है।
4. 'उत्तरी अटलांटिक दोलन' (NAO) और 'यूरेशियाई बर्फ आवरण' की स्थिति भी अप्रत्यक्ष रूप से भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के प्रदर्शन को प्रभावित करती है, क्योंकि शीतकालीन हिमपात का अधिक होना ग्रीष्मकाल में तापीय gradients को बाधित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की पर्वत प्रणालियों और घाटियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'महान हिमालय' (Greater Himalaya) या हिमाद्रि श्रेणी में ही भारत की सर्वोच्च चोटी 'कंचनजंगा' (Kanchenjunga) स्थित है, जो सिक्किम और नेपाल की सीमा पर अवस्थित है।
2. 'कश्मीर घाटी' (Kashmir Valley) एक विस्तृत अनुदैर्ध्य (Longitudinal) घाटी है, जो पीर पंजाल श्रेणी और मुख्य महान हिमालय के बीच स्थित है और जहाँ 'करेवा' (Karewa) निक्षेप पाए जाते हैं।
3. 'स्पीति घाटी' (Spiti Valley) हिमाचल प्रदेश के उत्तर-पूर्वी भाग में लद्दाख श्रेणी और जांसकर श्रेणी के बीच स्थित एक शुष्क शीत मरुस्थलीय घाटी है, जिससे होकर 'चिनाब' नदी प्रवाहित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की मृदा (मिट्टी) के वर्गीकरण और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मिट्टी (Red and Yellow Soils) का रंग मुख्य रूप से रवेदार और कायांतरित चट्टानों में लौह ऑक्साइड के व्यापक प्रसार के कारण लाल होता है, तथा जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रूप में परिवर्तित हो जाती है, जो प्रायद्वीपीय भारत के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बहुतायत से पाई जाती है।
2. लैटेराइट मिट्टी (Laterite Soils) उच्च तापमान और अत्यधिक भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) के परिणामस्वरूप बनती है, जिसमें ह्यूमस की मात्रा बहुत कम होती है और यह मिट्टी काजू, टपका (Tapioca) तथा चाय-कॉफ़ी जैसी बागानी फसलों के लिए अत्यधिक उपयुक्त मानी जाती है।
3. क्षारीय और लवणीय मिट्टी (Alkaline and Saline Soils), जिसे स्थानीय भाषा में 'कल्लर', 'रैद' या 'उसर' भी कहा जाता है, मुख्य रूप से शुष्क और अर्द्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचित क्षेत्रों में जल निकास (Drainage) की समस्या के कारण विकसित होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार काली मृदा (Black Soils), जिसे 'रेगुर' या 'कपास वाली काली मिट्टी' भी कहा जाता है, का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसाल्ट चट्टानों के अपक्षय से हुआ है, और इसमें जल धारण करने की अद्भुत क्षमता के साथ-साथ भीगने पर चिपचिपी और सूखने पर गहरी चौड़ी दरारें पड़ने की विशिष्ट भौतिक विशेषता पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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