त्वरित लिंक्स
Geography
1 views
भारत में कृषि पद्धतियों, फसल विविधीकरण और कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'राष्ट्रीय कृषि आयोग' (National Commission on Agriculture) द्वारा भारत को कुल 15 मुख्य कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है, जो मुख्य रूप से मृदा के प्रकार, जलवायु, वर्षा और तापमान की विशेषताओं पर आधारित हैं।
- 2. 'बहु-फसलीय प्रणाली' (Multiple Cropping) के अंतर्गत एक ही कृषि वर्ष में एक ही खेत में एक के बाद एक दो या दो से अधिक फसलें उगाई जाती हैं, जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों में अधिक सफल होती हैं जहाँ सिंचाई के विश्वसनीय साधन और वर्षभर अनुकूल तापमान उपलब्ध रहता है।
- 3. भारत में 'धान की सीधी बुवाई' (Direct Seeded Rice - DSR) पारंपरिक पुड्डलिंग (Puddling) विधि की तुलना में भूजल निष्कर्षण को कम करती है, मीथेन गैस के उत्सर्जन को घटाती है और श्रम की आवश्यकता को भी काफी हद तक कम करती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'रबी' की फसलों की बुवाई अक्टूबर-नवंबर के दौरान शीतकाल के आरंभ में की जाती है और इनकी कटाई मार्च-अप्रैल के महीने में की जाती है, जिन्हें बढ़ने के समय ठंडे मौसम और पकने के समय चमकीली धूप की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सही हैं। 1. योजना आयोग (अब नीति आयोग) और राष्ट्रीय कृषि आयोग ने भारत को 15 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) में विभाजित किया है। 2. बहु-फसलीय प्रणाली (Multiple Cropping) में भूमि के एक ही टुकड़े पर एक वर्ष में दो या दो से अधिक फसलें उगाई जाती हैं, जिससे भूमि उपयोग की तीव्रता बढ़ती है। 3. धान की सीधी बुवाई (DSR) पारंपरिक रोपाई (Puddling) की तुलना में जल संरक्षण, कम ग्रीनहाउस गैस (मीथेन) उत्सर्जन और श्रम की बचत के मामले में अत्यधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ तकनीक मानी जाती है। 4. रबी फसलें (जैसे गेहूँ, चना, सरसों) शीतकालीन फसलें हैं जिन्हें अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है और मार्च-अप्रैल में काटा जाता है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि देश की अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा का एक मुख्य स्तंभ है।
Related Questions
→
महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches) महासागरीय नितल के सबसे गहरे भाग होते हैं, जो सामान्यतः सक्रिय विवर्तनिक प्लेट सीमाओं (विनाशात्मक प्लेट किनारों) के सहारे द्वीप चापों या पर्वतीय श्रेणियों के सामानांतर पाए जाते हैं, और 'मरियाना गर्त' इसका सर्वोत्तम उदाहरण है।
2. जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीध में (Syzygy की स्थिति में) होते हैं, तब संयुक्त गुरुत्वाकर्षण बल के कारण दीर्घ ज्वार (Spring Tide) उत्पन्न होता है, जो महीने में केवल एक बार अमावस्या के दिन आता है।
3. 'डेविस जलसंधि' (Davis Strait) बैफिन खाड़ी को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है और यह ग्रीनलैंड तथा बेफिन द्वीप के मध्य स्थित है, जो विश्व की सबसे चौड़ी जलसंधि होने के साथ-साथ 'लाब्रडोर जलधारा' के प्रवाह क्षेत्र के रूप में भी जानी जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
अफ्रीका महाद्वीप को यूरोप से कौन सा जलडमरूमध्य अलग करता है?
→
भारत की 2011 की जनगणना के अंतिम आँकड़ों और बी.एस. गुहा (B.S. Guha) के भारतीय मानवजातीय (Racial) वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की जनगणना 2011 के अनुसार, देश की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों (SCs) का सर्वोच्च प्रतिशत पंजाब राज्य में दर्ज किया गया है, जबकि कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों (STs) का सर्वाधिक अनुपात लक्षद्वीप में पाया जाता है।
2. नृविज्ञानशास्त्री बी.एस. गुहा के वर्गीकरण के अनुसार, 'नॉर्डिक' (Nordic) प्रजाति के लोग मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत (जैसे पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्से) में पाए जाते हैं, जिन्हें इंडो-आर्यन भाषाओं से जोड़ा जाता है।
3. भारत के भाषाई परिवारों में 'द्रविड़' भाषा परिवार बोलने वालों का कुल प्रतिशत 'आस्ट्रिक' और 'चीनी-तिब्बती' दोनों की संयुक्त संख्या से कम है, और देश में दूसरा सबसे बड़ा भाषाई परिवार आस्ट्रिक ही है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जल प्रबंधन और प्रमुख फसलों की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सूक्ष्म सिंचाई' (Micro-irrigation) के अंतर्गत ड्रिप और फव्वारा पद्धतियाँ आती हैं, जो वाष्पोत्सर्जन और भूजल रिसाव से होने वाले जल के नुकसान को न्यूनतम करती हैं तथा जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अधिकतम बढ़ाती हैं।
2. देश में 'सतही सिंचाई' (Surface Irrigation) की तुलना में 'भूमिगत जल सिंचाई' (Groundwater Irrigation) का कुल सिंचित क्षेत्र में योगदान सबसे अधिक है, जिसमें नलकूपों और कुओं की प्रमुख भूमिका है।
3. 'धान' (Paddy) की पारंपरिक रोपाई विधि में अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है, जिसके विपरीत 'प्रत्यक्ष बीज बुवाई' (Direct Seeded Rice - DSR) तकनीक में नर्सरी तैयार करने और खेतों में पानी भरकर रखने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे मीथेन उत्सर्जन और जल की खपत में भारी कमी आती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में ड्रिप सिंचाई तकनीक को अपनाने में 'उत्तर प्रदेश' राज्य का देश में प्रथम स्थान है, जो कुल सूक्ष्म सिंचित क्षेत्रफल का आधे से अधिक भाग कवर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, वायुदाब पेटियों और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोरिंग फोर्टिज़' (Roaring Forties), 'फ्यूरियस फिफ्टीज़' (Furious Fifties) और 'श्रीकिंग सिक्सटीज़' (Shrieking Sixties) दक्षिणी गोलार्ध के उन अक्षांशों में तीव्र गति से बहने वाली पश्चिमी पवनें हैं, जहाँ विशाल महासागरीय विस्तार के कारण कोई बड़ा भू-भाग इनके मार्ग में अवरोध उत्पन्न नहीं करता।
2. 'रोज़बी तरंगें' (Rossby Waves) क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों में बहने वाली लंबी तरंगें हैं, जो जेट स्ट्रीम के मार्ग में उत्तर और दक्षिण की ओर बड़े वक्र बनाती हैं और मध्य अक्षांशों में मौसम के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करती हैं।
3. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Temperate Cyclones) की उत्पत्ति मुख्य रूप से 'वाताग्रजनन' (Frontogenesis) की प्रक्रिया द्वारा होती है, जहाँ उष्ण और शीत वायुराशियाँ आपस मिलती हैं, और ये चक्रवात केवल महासागरीय सतह तक सीमित न होकर स्थलीय भागों पर भी सक्रिय रहते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) को उत्तरी गोलार्ध में 'टाइफून' (Typhoon) और दक्षिणी गोलार्ध में 'हरिकेन' (Hurricane) के नाम से जाना जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.