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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा साधन 'नलकूप और अन्य कुएँ' (Tubewells and Wells) हैं, जिनका देश के कुल सिंचित क्षेत्र में योगदान लगभग 60% से अधिक है, और उत्तर प्रदेश राज्य में नलकूपों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई की जाती है।
  2. 2. 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) और 'sprinkler irrigation' जैसी सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) पद्धतियाँ जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अत्यधिक बढ़ाती हैं, तथा राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन के तहत महाराष्ट्र राज्य में ड्रिप सिंचाई का क्षेत्रफल सबसे अधिक है।
  3. 3. 'धान' (Rice) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसके लिए उच्च तापमान (25°C से अधिक), उच्च आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वर्षा की आवश्यकता होती है, किंतु 'पंजाब' और 'हरियाणा' जैसे राज्यों में इसे व्यापक भूजल दोहन और नहरों की प्रचुरता के कारण बिना पर्याप्त मानसूनी वर्षा के भी सफलतापूर्वक उगाया जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत को उसकी कृषि-पारिस्थितिक स्थितियों (Agro-ecological zones) के आधार पर योजना आयोग द्वारा कुल 15 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic zones) में विभाजित किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों में भूजल आधारित नलकूप और कुएँ सर्वोच्च स्थान पर हैं (लगभग 62-63%), जिसमें उत्तर प्रदेश अग्रणी है। सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और महाराष्ट्र इसमें शीर्ष राज्यों में शामिल है। पंजाब और हरियाणा में हरित क्रांति के प्रभाव के तहत भूजल के अत्यधिक दोहन और नहर नेटवर्क के बल पर धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है, जबकि इसकी मूल जलवायु दशाएँ उच्च वर्षा वाली होती हैं। इसके अतिरिक्त, योजना आयोग ने देश को 15 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वर्गीकृत किया है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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