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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र के स्रोतों में 'नलिकूप और कुएँ' (Tubewells and Wells) प्रथम स्थान पर हैं, जिनके द्वारा देश के कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 62% भाग सिंचित होता है, और इनका सर्वाधिक विकास उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा हरियाणा के alluvial plains में हुआ है।
  2. 2. 'धान' (Rice) और 'गन्ना' (Sugarcane) जैसी जल-गहन (Water-intensive) फसलों की अत्यधिक सिंचाई के कारण पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भूजल स्तर (Water Table) में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसे रोकने के लिए सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
  3. 3. 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के 'हर खेत को पानी' घटक का मुख्य उद्देश्य भूजल निष्कर्षण को पूरी तरह प्रतिबंधित करना और देश के सभी कृषि क्षेत्रों में केवल सतही नहरों (Surface Canals) के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित करना है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश में सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) तकनीकों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) में वृद्धि होती है और उर्वरकों की बर्बादी कम होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत में नलकूपों और कुओं द्वारा सिंचाई का प्रतिशत सबसे अधिक (लगभग 62% से अधिक) है, विशेष रूप से उत्तर भारत के जलोढ़ मैदानों में। कथन 2 सही है क्योंकि धान और गन्ने जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलों के अत्यधिक दोहन से भूजल स्तर में भारी गिरावट आई है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के 'हर खेत को पानी' घटक का उद्देश्य सिंचाई के दायरे को बढ़ाना और पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, न कि भूजल निष्कर्षण को पूरी तरह प्रतिबंधित करना। कथन 4 सही है क्योंकि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें जल दक्षता को सुधारने और उर्वरकों के उपयोग को अनुकूलित करने में मदद करती हैं।
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