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Geography
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भारतीय मृदा विज्ञान और उनके सूक्ष्मपोषक तत्वों (Micro-nutrients) की कमी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत की अधिकांश जलोढ़ और लाल मिट्टियों में नाइट्रोजन (Nitrogen) और ह्यूमस (Humus) की मात्रा सामान्यतः बहुत कम पाई जाती है, जिसके कारण भारतीय कृषि में यूरिया जैसे नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग करना पड़ता है।
- 2. 'काली मिट्टी' (Regur Soil) में चूना (Lime), मैग्नीशियम, पोटाश और कैल्शियम कार्बोनेट की प्रचुरता होती है, परंतु इसमें फॉस्फोरस (Phosphorus) और नाइट्रोजन की भारी कमी पाई जाती है।
- 3. 'लैटेराइट मिट्टी' में सिलिका के तीव्र निक्षालन (Leaching) के कारण लोहे और एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बच जाते हैं, जिससे यह मिट्टी अत्यधिक अम्लीय हो जाती है और इसमें चूना या जिप्सम मिलाकर इसकी उर्वरता बढ़ाई जाती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा किए गए मृदा स्वास्थ्य सर्वेक्षणों में यह पाया गया है कि देश की कृषि योग्य मिट्टियों में जस्ते (Zinc) की कमी सबसे व्यापक रूप से फैली हुई है, जो फसल उत्पादन को प्रभावित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारतीय मृदाओं की मुख्य विशेषता यह है कि ये सदियों से कृषि कार्य के कारण जैविक पदार्थों (ह्यूमस) और नाइट्रोजन की दृष्टि से क्षीण हो चुकी हैं। जलोढ़ और लाल मिट्टियों में नाइट्रोजन व ह्यूमस की कमी होती है। दक्कन के पठार की काली मृदा (रेंगूर) में पोटाश, चूना और मैग्नीशियम प्रचुर मात्रा में होते हैं, लेकिन फॉस्फोरस और नाइट्रोजन की इसमें कमी होती है। लैटेराइट मिट्टी अत्यधिक अम्लीय होती है क्योंकि भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में सिलिका का निक्षालन हो जाता है, जिससे लोहे और एल्युमिनियम के ऑक्साइड बच जाते हैं; इस अम्लता को कम करने के लिए चूना मिलाया जाता है। इसके अतिरिक्त, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय मृदाओं में सूक्ष्म पोषक तत्वों में 'जस्ता' (Zinc) की कमी सबसे अधिक पाई जाती है, जिसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत जस्ते के प्रयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
Related Questions
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पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, चक्रवातों और आर्द्रता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोज़बी तरंगे' (Rossby Waves) क्षोभमंडल के ऊपरी स्तरों में बहने वाली लंबी और घुमावदार वायुमंडलीय तरंगे हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन (कोरिऑलिस बल) और तापमान के क्षैतिज ढाल के कारण उत्पन्न होती हैं तथा जेट स्ट्रीम के मार्ग को नियंत्रित करती हैं।
2. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के विपरीत, शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate/Extra-tropical Cyclones) केवल महासागरीय सतह पर ही विकसित होते हैं और इनमें किसी भी प्रकार के वाताग्र (Fronts) का निर्माण नहीं होता है।
3. वायुमंडल में संतृप्त हवा का तापमान जब 'ड्यू पॉइंट' (ओसांक) से नीचे गिर जाता है, तब संघनन (Condensation) की प्रक्रिया के माध्यम से बादलों का निर्माण होता है, जिसमें 'पर्वतीय वर्षा' (Orographic Rainfall) के दौरान पवन-विमुख ढाल (Leeward Slope) वाले क्षेत्र को 'वृष्टिछाया क्षेत्र' कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में चक्रवातों के भीतर हवाओं का संचरण घड़ी की सुइयों की दिशा में (Clockwise) होता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में यह घड़ी की सुइयों के विपरीत दिशा (Anti-clockwise) में होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय जलधाराओं और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गल्फ स्ट्रीम' (Gulf Stream) एक गर्म जलधारा है जो मैक्सिको की खाड़ी से निकलकर उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित होती है और पश्चिमी यूरोप के तटीय क्षेत्रों में शीतकाल में भी बंदरगाहों को बर्फ से मुक्त रखने में सहायता करती है।
2. 'लैब्राडोर जलधारा' (Labrador Current) एक ठंडी जलधारा है जो आर्कटिक महासागर से दक्षिण की ओर बहती है और न्यूफाउंडलैंड के पास गल्फ स्ट्रीम से मिलकर दुनिया के सबसे प्रमुख मतस्य क्षेत्रों (Fishing Grounds) का निर्माण करती है।
3. दक्षिणी गोलार्ध की 'पेरू जलधारा' (Humbolt Current) एक गर्म जलधारा है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर की ओर बहती है और इसके तट पर 'अल नीनो' की घटना को प्रेरित करती है।
4. 'कुइरोशियो जलधारा' (Kuroshio Current) प्रशांत महासागर की एक गर्म जलधारा है, जिसे जापान की 'काली धारा' भी कहा जाता है, क्योंकि इसका जल अत्यधिक स्पष्ट और गहरे नीले रंग का होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में ऊर्जा संसाधनों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और परमाणु खनिज) के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना और उत्पादन प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयला उत्पादन का लगभग 98 प्रतिशत भाग गोंडवाना युगीन अवसादी चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में केंद्रित है, जबकि टर्शियरी युगीन कोयला मुख्य रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड में पाया जाता है जिसमें गंधक (Sulfur) की मात्रा अधिक होती है।
2. देश में कच्चे तेल (Petroleum) और प्राकृतिक गैस के अधिकांश भंडार टर्शियरी काल के वलित पर्वतीय क्षेत्रों और अपतटीय (Offshore) द्रोणियों में स्थित हैं, जिसमें 'मुंबई हाई' भारत का सबसे बड़ा अपतटीय कच्चा तेल उत्पादक क्षेत्र है तथा 'कृष्णा-गोदबारी बेसिन' (KG Basin) प्राकृतिक गैस के अपार भंडारों के लिए जाना जाता है।
3. भारत में 'यूरेनियम' के प्रमुख निक्षेप मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम की कायांतरित चट्टानों में पाए जाते हैं, जिसमें झारखंड का 'जादूगोड़ा' क्षेत्र और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना की सीमा पर स्थित 'तुಮ್ಮलपल्ले' यूरेनियम के विशाल भंडारों के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'थोरियम' का सबसे प्रमुख स्रोत 'मोनाज़ाइट रेत' है, जो मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की बालू में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है, और भारत विश्व में थोरियम के सबसे बड़े भंडारों वाले देशों में अग्रणी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय मानसून की उत्पत्ति, तंत्र और वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में तिब्बत के पठार का अत्यधिक गर्म होना क्षोभमंडल के ऊपरी स्तर पर 'उपोष्ण कटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम' (Tropical Easterly Jet Stream) को जन्म देता है, जो भारतीय उपमहाद्वीप पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की हवाओं को तेजी से आकर्षित करने में सहायक होती है।
2. 'सोमालिया जेट स्ट्रीम' (Somalia Jet Stream) ग्रीष्मकाल में पूर्वी अफ्रीका के तट के सहारे उत्तर-पूर्व दिशा में बहती हुई अरब सागर की मानसून हवाओं को तीव्र गति प्रदान करती है।
3. 'मैडेन-जुलियन दोलन' (Madden-Julian Oscillation - MJO) एक महासागरीय-वायुमंडलीय परिघटना है, जिसके भारतीय महासागर के ऊपर 'कमजोर चरण' (Suppressed Phase) में होने पर भारतीय मानसून के दौरान वर्षा में सामान्य से अधिक वृद्धि होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों—पर्वतों, पठारों, मैदानों और मरुस्थलों की उत्पत्ति एवं विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अटाकामा मरुस्थल' (Atacama Desert) दक्षिण अमेरिका में एंडीज पर्वतमाला और प्रशांत महासागर के मध्य स्थित एक अति-शुष्क मरुस्थल है, जिसके अत्यधिक शुष्क होने का प्रमुख कारण 'पेरूवियन (हम्बोल्ड) ठंडी जलधारा' का तट के सहारे प्रवाहित होना और वृष्टिछाया प्रभाव है।
2. 'कॉलोराडो का पठार' (Colorado Plateau) एक अंतर-पर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का उदाहरण है, जो अंतर्जात बलों द्वारा धरातल के उत्थान के पश्चात बहने वाली नदियों द्वारा गहरी महाखड्डों (Canyons) के निर्माण के लिए विश्व प्रसिद्ध है।
3. 'पश्चिमी सिडनी का मैदान' या 'ऑस्ट्रेलीयाई आंतरिक बेसिन' मुख्य रूप से विवर्तनिक ताकतों और नदियों के संचयन (Deposition) से बने मैदानों के अंतर्गत आते हैं, जबकि उत्तरी मैदान संरचनात्मक दृष्टि से अग्र-गर्त (Foredeep) मैदानों के उदाहरण हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मरुस्थलीय क्षेत्रों में 'बजादा' (Bajada) कई जलोढ़ शंकुओं के मिलने से बनी एक मंद ढाल वाली निक्षेपण स्थलाकृति है, जो पर्वतीय तलहटी के सहारे विकसित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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