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Geography
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि पद्धतियों (जैसे सूक्ष्म सिंचाई और फसल गहनता) और प्रमुख फसलों के भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र के स्रोतों में नलकूपों और अन्य कुओं (Tube wells and Wells) का हिस्सा सर्वाधिक है, और राज्यवार स्थिति में उत्तर प्रदेश नलकूप सिंचाई द्वारा सबसे अधिक सिंचित क्षेत्रफल वाला राज्य है।
  2. 2. 'टपक सिंचाई' (Drip Irrigation) और 'फव्वारा सिंचाई' (Sprinkler Irrigation) जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अत्यधिक बढ़ाती हैं, और प्रधानमंत्री कृषि सिंचन योजना (PMKSY) के 'पर ड्राप मोर क्रॉप' (Per Drop More Crop) घटक के तहत इनके प्रसार पर विशेष बल दिया जाता है।
  3. 3. भारत में 'फसल गहनता' (Cropping Intensity) देश के सभी राज्यों में एकसमान है, तथा पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में उच्च फसल गहनता का प्रमुख कारण उन्नत सिंचाई सुविधाओं और नहरी तंत्र की उपलब्धता के साथ-साथ धान-गेहूं फसल चक्र का सघन अभ्यास है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार दक्षिणी और पश्चिमी भारत के प्रायद्वीपीय पठारी भागों (जैसे महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश) में धरातलीय विषमताओं और कठोर चट्टानी भू-संरचना के कारण तालाब (Tanks) और कुएँ सिंचाई के पारंपरिक एवं प्रमुख साधन रहे हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत में कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा नलकूपों और कुओं द्वारा सिंचित किया जाता है, जिसमें उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है। कथन 2 सही है क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ जल की बचत और उच्च दक्षता सुनिश्चित करती हैं जिन्हें 'पर ड्राप मोर क्रॉप' योजना का समर्थन प्राप्त है। कथन 3 गलत है क्योंकि फसल गहनता भारत के सभी राज्यों में एकसमान नहीं है, बल्कि यह भौगोलिक, जलवायु और सिंचाई सुविधाओं की उपलब्धता के आधार पर राज्यों में भिन्न-भिन्न होती है। कथन 4 सही है क्योंकि प्रायद्वीपीय भारत के पठारी क्षेत्रों में चट्टानी धरातल के कारण तालाबों और कुओं द्वारा सिंचाई की ऐतिहासिक एवं प्रमुख परंपरा रही है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि में सिंचाई प्रणालियों का विकास क्षेत्रीय भू-आकृति विज्ञान पर गहराई से निर्भर करता है।
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→ भारत के भौगोलिक विस्तार, अक्षांशीय और देशांतर रेखाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत की मुख्य भूमि का विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर अक्षांशों के मध्य है, जिसके कारण देश के सबसे दक्षिणी और सबसे उत्तरी छोर के बीच लगभग 30° का अक्षांशीय विस्तार पाया जाता है। 2. 82°30' पूर्वी देशांतर रेखा को भारत की मानक यम्योत्तर (Standard Meridian) माना गया है, जो उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से गुजरती है और यह रेखा देश के कुल पाँच राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश) से होकर गुजरती है। 3. भारत के सबसे पश्चिमी बिंदु (गुहार मोती, गुजरात) और सबसे पूर्वी बिंदु (किबिथु, अरुणाचल प्रदेश) के बीच देशांतरीय विस्तार लगभग 30° का है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों स्थानों के स्थानीय समय में लगभग दो घंटे (120 मिनट) का अंतर पाया जाता है। 4. कर्क रेखा (23°30' उत्तर) भारत को लगभग दो बराबर भागों में विभाजित करती है और यह देश के कुल नौ राज्यों से होकर गुजरती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → विश्व के महाद्वीपों, देशों की सीमाओं और प्रमुख भू-राजनीतिक रेखाओं (Boundary Lines) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'डुरंड रेखा' (Durand Line) वर्तमान में पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच की सीमा रेखा है, जिसका निर्धारण वर्ष 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव सर मोर्टिमर डुरंड द्वारा किया गया था। 2. 'मैकमोहन रेखा' (McMahon Line) पूर्वी हिमालयी क्षेत्र में भारत और चीन के बीच की सीमा निर्धारित करती है, जिसे 1914 के शिमला समझौते के दौरान सर हेनरी मैकमोहन द्वारा 1914 में प्रतिपादित किया गया था, और चीन इस रेखा को कानूनी रूप से मान्यता प्रदान करता है। 3. '38वीं समानांतर रेखा' (38th Parallel) उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को विभाजित करती है, जबकि '49वीं समानांतर रेखा' (49th Parallel) संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा के बीच की सबसे लंबी अशांत रहित सीमा बनाती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'मैगिनॉट रेखा' (Maginot Line) द्वितीय विश्व युद्ध से पहले फ्रांस द्वारा जर्मनी की संभावित सीमा पर बनाई गई कंक्रीट की एक मजबूत रक्षात्मक और दुर्भेद्य किलेबंदी रेखा थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की मृदा प्रणालियों, उनकी पेडोोजेनिक (मृदा निर्माण) विशेषताओं और भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'लैटेराइट मृदा' (Laterite Soil) का विकास उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले मानसूनी क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) की प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका के निष्कासन के बाद आयरन और एल्युमिनियम के ऑक्साइड प्रचुर मात्रा में शेष बच जाते हैं, और ये मृदाएँ ईंट बनाने के लिए अत्यंत उपयुक्त होती हैं। 2. 'काली मृदा' (Black Soil) मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप के बेसाल्टिक लावा के अपक्षय से बनती है और इसमें 'स्वतः जुताई' (Self-ploughing) का विशेष गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह चिपचिपी और सूखने पर चौड़ी-चौड़ी गहरी दरारों से फट जाती है। 3. 'क्षारकीय एवं रेह मृदा' (Alkaline Soils) मुख्य रूप से अर्ध-शुष्क और शुष्क क्षेत्रों में नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचाई तथा अकुशल जल निकासी के कारण उत्पन्न जलभराव एवं केशिका क्रिया (Capillary action) के परिणामस्वरूप सतह पर सोडियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम के लवणों के जमा होने से बनती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश की मिट्टियों को उनकी उत्पत्ति, संरचना और उर्वरता के आधार पर कुल 8 प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के प्रमुख पर्वतीय दर्रों और उनकी भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'खारदुंग ला दर्रा' (Khardung La) लद्दाख श्रेणी में स्थित है, जो लेह को नुबरा और श्योक घाटियों से जोड़ता है और यह सियाचिन ग्लेशियर तक पहुँचने का एकमात्र सड़क मार्ग है। 2. 'माना दर्रा' (Mana Pass) उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में जास्कर श्रेणी में स्थित है, जो भारत को तिब्बत के ज़ांगसु क्षेत्र से जोड़ता है और यह प्राचीन काल में भारतीय उपमहाद्वीप और तिब्बत के बीच व्यापारिक मार्ग रहा है। 3. 'इम्ला दर्रा' (Imla Pass) या 'इम्ला-चुम्बी घाटी मार्ग' सिक्किम और भूटान के बीच सीमा रेखा पर स्थित एक प्रमुख दर्रा है जो तवांग क्षेत्र को नियंत्रित करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं? → भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के भौगोलिक वितरण तथा उनकी भूगर्भीय विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में कोयले के कुल संचित भंडारों का लगभग 98% हिस्सा 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, सोन, महानदी और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं, तथा यहाँ का अधिकांश कोयला उच्च कोटि का एन्थ्रेसाइट प्रकार का है। 2. 'टर्तीयक युगीन कोयला' (Tertiary Coal) मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है, जिसकी प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें उच्च सल्फर सामग्री (High Sulphur Content) पाई जाती है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के कुल संचित भंडारों का सबसे बड़ा हिस्सा अपतटीय (Offshore) क्षेत्रों, विशेष रूप से पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र के 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) में स्थित है। 4. भारत में 'थोरियम' के विशाल संचित भंडार तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sands) में पाए जाते हैं, जो मुख्य रूप से केरल के तटीय क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जबकि यूरेनियम के प्रमुख भंडार झारखंड के जादूगोड़ा खान से निकाले जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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