BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
24 views

महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का ही डूबा हुआ विस्तार होता है, जहाँ सूर्य का प्रकाश पहुँचने के कारण फाइटोप्लांकटन की प्रचुरता होती है, जिससे यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मतस्यन (Fishing) क्षेत्रों में गिने जाते हैं।
  2. 2. वृहद ज्वार (Spring Tide) की उत्पत्ति तब होती है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में (स्युति या Syzygy की स्थिति में) होते हैं, और यह स्थिति केवल अमावस्या के दिन ही संभव है।
  3. 3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) अंडमान सागर और दक्षिण चीन सागर को आपस में जोड़ती है तथा यह सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) को मलय प्रायद्वीप से अलग करती है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लघु ज्वार (Neap Tide) के समय चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के केंद्र पर समकोण बनाते हैं, जिससे दोनों का गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के प्रभाव को कम कर देता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) उथले पानी वाले क्षेत्र होते हैं जहाँ सूर्य का प्रकाश तल तक पहुँचता है, जिससे प्लवक (Plankton) का विकास होता है और ये क्षेत्र प्रमुख मत्स्यन केंद्र बनते हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि स्युति (Syzygy) की स्थिति अमावस्या और पूर्णिमा दोनों ही दिनों में होती है, अतः वृहद ज्वार अमावस्या और पूर्णिमा दोनों दिन आते हैं, केवल अमावस्या पर नहीं। कथन 3 सही है, मलक्का जलसंधि हिंद महासागर (अंडमान सागर) को प्रशांत महासागर (दक्षिण चीन सागर) से जोड़ती है और सुमात्रा को मलय प्रायद्वीप से अलग करती है। कथन 4 सही है, विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जब चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के सापेक्ष समकोण पर होते हैं तो लघु ज्वार आते हैं। अतः सही विकल्प (b) है।
Share:

Related Questions

→ वायुमंडल की संरचना, विभिन्न परतों और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. क्षोभमंडल (Troposphere) में ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान में होने वाली ह्रास दर (Normal Lapse Rate) औसतन 6.5°C प्रति 1000 मीटर होती है, और इस परत की सीमा को 'क्षोभसीमा' कहते हैं जहाँ जेट धाराएँ (Jet Streams) प्रवाहित होती हैं। 2. समतापमंडल (Stratosphere) ओजोन गैस की उपस्थिति के कारण गर्म रहता है, जो पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है, और इसी परत के निचले हिस्से में मौसम संबंधी घटनाएँ (जैसे बादल, वर्षा, आंधी) सर्वाधिक तीव्रता से घटित होती हैं। 3. पृथ्वी पर पाई जाने वाली 'अश्व अक्षांश' (Horse Latitudes) या उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts) मूल रूप से तापीय कारणों (Thermal Factors) से नहीं बल्कि पृथ्वी के घूर्णन और वायु के अवतलन (Subsidence) जैसी गतिकीय प्रक्रियाओं (Dynamic Factors) के कारण उत्पन्न होती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जिसमें ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान पुनः गिरने लगता है और ऊपरी सीमा पर तापमान -90°C तक पहुँच जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ अपने उद्गम से लेकर मुहाने तक युवावस्था (Youthful stage) से गुजरती हुई सर्पीलाकार मार्ग (Meandering) और विशाल विसप का निर्माण करती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी युवावस्था को पार कर परिपक्व अवस्था में पहुँच चुकी हैं और इनके मार्ग अत्यधिक निश्चित तथा सीधी रेखा में होते हैं। 2. प्रायद्वीपीय नदियों की जल का मुख्य स्रोत मानसूनी वर्षा है, जिसके कारण ग्रीष्म ऋतु में इनका प्रवाह अत्यधिक कम हो जाता है या कई नदियाँ सूख जाती हैं (अनित्यवाही या Non-perennial), जबकि हिमालयी नदियों में जल का स्रोत हिमनद (Glaciers) और वर्षा दोनों होने के कारण ये वर्षभर बहने वाली (Perennial) नदियाँ होती हैं। 3. गोदावरी नदी को 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' कहा जाता है, जो प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और इसका जलग्रहण क्षेत्र महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश राज्यों तक फैला हुआ है। 4. नर्मदा और ताप्ती नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश अन्य नदियों के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरने के बजाय अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuary) का निर्माण करती हैं, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियाँ और प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र (Net Irrigated Area) का सबसे बड़ा हिस्सा 'नदी नहरों' (Canals) के माध्यम से सिंचित होता है, जिसके बाद दूसरा स्थान नलकूपों और अन्य कुओं का आता है। 2. 'शून्य जुताई' (Zero Tillage) या न्यूनतम जुताई तकनीक मृदा के स्वास्थ्य को बनाए रखने, कार्बन संचयन बढ़ाने और फसल अवशेषों को जलाए बिना सीधे बुवाई करने में सहायक होती है, जो विशेष रूप से चावल-गेहूं फसल चक्र में अपनाई जा रही है। 3. 'धान' एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसे अंकुरण और वृद्धि के समय उच्च तापमान (25°C से अधिक) तथा प्रचुर मात्रा में जल की आवश्यकता होती है, और भारत में इसकी खेती मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा 100 सेंटीमीटर से अधिक होती है या कृत्रिम सिंचाई के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'श्री विधि' (System of Rice Intensification - SRI) कम पानी, कम बीज और कम रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से धान की पैदावार बढ़ाने की एक आधुनिक कृषि पद्धति है, जिसकी शुरुआत सबसे पहले मेडागास्कर में हुई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की पर्वत श्रेणियों, दरों और घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'ज़ांस्कर श्रेणी' (Zanskar Range) महान हिमालय के उत्तर में समानांतर रूप से फैली हुई है, जो कश्मीर घाटी को लद्दाख के लेह क्षेत्र से अलग करती है और इसी श्रेणी में 'ज़ोजी ला दर्रा' स्थित है। 2. 'धौलाधार श्रेणी' (Dhauladhar Range) मध्य (लघु) हिमालय का हिस्सा है, जो कांगड़ा और कुल्लू घाटियों को अलग करती है और इस क्षेत्र में स्थित प्रमुख पर्यटक स्थल 'डलहौजी' इसी श्रेणी पर अवस्थित है। 3. 'पालघाट दर्रा' (Palghat Gap) पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रमुख भ्रंश घाटी (Rift Valley gap) है, जो तमिलनाडु के कोयंबटूर को केरल के पलक्कड़ और कोच्चि से जोड़ती है और नीलगिरी व अन्नामलाई पहाड़ियों के बीच स्थित है। 4. 'चुम्बी घाटी' (Chumbi Valley) भारत, भूटान और तिब्बत (चीन) की त्रिसंधि (Tri-junction) के पास स्थित एक सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण घाटी है, जो नाथू ला और जेलेप ला दरों के माध्यम से सिक्किम को तिब्बत से जोड़ती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की मिट्टियों (मृदा) के वर्गीकरण और उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'काली मृदा' (Regur Soil) का निर्माण मुख्य रूप से दक्कन ट्रैप क्षेत्र में बेसाल्टिक लावा के अपक्षय से हुआ है, और इसमें जल धारण करने की उच्च क्षमता पाई जाती है, जिसके कारण सूखने पर इसमें गहरी दरारें पड़ जाती हैं जो स्वतः जुताई (Self-ploughing) का कार्य करती हैं। 2. 'लैटेराइट मृदा' उच्च तापमान और भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र निक्षालन (Leaching) प्रक्रिया का परिणाम है, जिसमें सिलिका का निक्षालन हो जाता है और मृदा में लौह ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह ईंट बनाने के लिए अत्यधिक उपयुक्त होती है। 3. 'लाल और पीली मृदा' का लाल रंग क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों में लौह (Iron) के व्यापक विसरण के कारण होता है, जबकि इसका पीला रंग इसमें जलयोजन (Hydration) की स्थिति के कारण प्रकट होता है और यह मृदा सामान्यतः उपजाऊ होती है जिसमें नाइट्रोजन और ह्यूमस प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils) भारत के कुल क्षेत्रफल के सबसे बड़े हिस्से पर पाई जाती है, जो मुख्य रूप से उत्तरी मैदानों और नदी घाटियों में फैली हुई है और यह देश की कृषि अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.