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Geography
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों, उनकी विवर्तनिक उत्पत्ति तथा मरुस्थलीय एवं पठारी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'ब्लैक फॉरेस्ट' (Black Forest) और 'वास्जेस' (Vosges) पर्वत ब्लॉक पर्वत (Block Mountains) या भ्रंशोथ पर्वतों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनका निर्माण विवर्तनिक तनाव बलों (Tension Forces) के कारण धरातल के धंसने और मध्यवर्ती भाग के स्थिर रहने या ऊपर उठने से हुआ है।
- 2. 'पामीर का पठार', जिसे 'विश्व की छत' (Roof of the World) कहा जाता है, एक अंतरापर्वतीय पठार है जो तियन शान, कुतुएन, हिमालय और हिंदूकुश जैसी विशाल पर्वत श्रेणियों का मिलन स्थल है।
- 3. 'ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल' ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी और पश्चिमी भाग में स्थित एक उष्णकटिबंधीय मरुस्थल है, जहाँ अधिकांश मरुस्थलीय बालू के टीले और बज्जा मैदान पाए जाते हैं, और यह मरुस्थल पूरी तरह से एक शीत मरुस्थल (Cold Desert) का उदाहरण है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार विश्व की सबसे लंबी महाद्वीपीय पर्वत श्रृंखला 'एंडीज पर्वतमाला' है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के सहारे उत्तर से दक्षिण की ओर फैली हुई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 'ब्लैक फॉरेस्ट' (जर्मनी) और 'वास्जेस' (फ्रांस) राइन नदी की भ्रंश घाटी के किनारे स्थित क्लासिक ब्लॉक पर्वत (भ्रंशोथ पर्वत) हैं, जिनका निर्माण तनाव (Tension) बलों के कारण धरातल के टूटने और भू-भाग के धंसने से हुआ है। कथन 2 सही है: पामीर का पठार मध्य एशिया में स्थित एक उच्च अंतरापर्वतीय पठार है जो कई बड़ी पर्वतमालाओं को आपस में जोड़ता है। कथन 3 गलत है क्योंकि 'ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल' एक उष्णकटिबंधीय/उपोष्णकटिबंधीय गर्म मरुस्थल है, न कि शीत मरुस्थल (Cold Desert)। अंटार्कटिक या गोबी जैसे मरुस्थल शीत मरुस्थल की श्रेणी में आते हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार एंडीज पर्वतमाला लगभग 7,000 किलोमीटर की लंबाई के साथ विश्व की सबसे लंबी महाद्वीपीय पर्वत श्रृंखला है, अतः कथन 4 भी सही है। इसलिए सही विकल्प 1, 2 और 4 (यानि विकल्प b) है।
Related Questions
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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियाँ और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के कुल सिंचित क्षेत्र में कुओं और नलकूपों (Wells and Tube wells) का हिस्सा सबसे बड़ा है, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान राज्यों का भूजल निष्कर्षण में प्रमुख स्थान है।
2. 'चावल' (Paddy) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है, जिसके लिए अत्यधिक जल की आवश्यकता होती है और यही कारण है कि पारंपरिक रूप से कम वर्षा वाले पंजाब और हरियाणा राज्यों में भी भूजल आधारित नलकूप सिंचाई के माध्यम से इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
3. 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' (PMKSY) के अंतर्गत 'हर खेत को पानी' और 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' (फसल प्रति बूँद अधिक फसल) घटकों का मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म सिंचाई (ड्रिप और स्प्रिंकलर) प्रणालियों को बढ़ावा देना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में कुल सिंचित कृषि भूमि का सबसे बड़ा हिस्सा सतही नहरों (Canals) की सिंचाई पर निर्भर करता है, जबकि भूजल निकासी का देश के कुल सिंचित क्षेत्र में योगदान अत्यंत नगण्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की वायुमंडलीय पवन प्रणालियों, आर्द्रता और चक्रवातों की गतिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रोज़बी तरंगे' (Rossby Waves) पृथ्वी के क्षोभमंडल और समतापमंडल में प्रवाहित होने वाली विशाल वक्रता वाली लंबी वायुमंडलीय तरंगे हैं, जो उच्च-स्तरीय जेट स्ट्रीम के मेग्नेड और ध्रुवीय भंवर (Polar Vortex) की गति को नियंत्रित करने के साथ-साथ शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों के मार्ग को निर्धारित करती हैं।
2. 'वाष्प दाब अधिशेष' (Vapour Pressure Deficit - VPD) संतृप्त वाष्प दाब और वास्तविक वाष्प दाब के बीच का अंतर है, जो वायुमंडल की नमी की मांग को दर्शाता है; उच्च VPD पौधों में वाष्पोसर्जन की दर को बढ़ा देता है और गंभीर सूखे जैसी स्थितियों का कारण बनता है।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के निर्माण के लिए महासागरीय सतह का तापमान कम से कम 27°C होना आवश्यक है, क्योंकि इससे पर्याप्त मात्रा में गुप्त ऊष्मा (Latent Heat) की आपूर्ति होती है, जो चक्रवात के कोर में मजबूत अभिसरण (Convergence) और आरोही वायु धाराओं को ऊर्जा प्रदान करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कोरिओलिस बल' (Coriolis Force) भूमध्य रेखा पर अधिकतम होता है, यही कारण है कि भूमध्य रेखा के ठीक 5 डिग्री उत्तर और दक्षिण के अक्षांशों के बीच उष्णकटिबंधीय चक्रवात प्रणालियाँ सर्वाधिक तीव्रता से उत्पन्न होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनकी संरचनात्मक विशेषताओं तथा भूमंडलीय वायुदाब पेटियों (Global Pressure Belts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वायुमंडल के कुल द्रव्यमान का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा केवल शुरुआती 32 किलोमीटर की ऊँचाई के भीतर ही केंद्रित है, जिसमें नाइट्रोजन और ऑक्सीजन जैसी स्थायी गैसों का अनुपात लगभग स्थिर रहता है।
2. 'समताप मंडल' (Stratosphere) के निचले भाग में ओजोन गैस की अधिकता पाई जाती है, जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करती है, जिसके कारण इस परत में ऊँचाई के साथ तापमान में वृद्धि होती है और यह वाणिज्यिक विमानों के उड़ान भरने के लिए आदर्श स्थिति प्रदान करती है।
3. विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low-Pressure Belt) और ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी (Polar High-Pressure Belt) दोनों ही तापीय रूप से प्रेरित (Thermally Induced) पेटियाँ हैं, जबकि उपोष्ण कटिबंधीय उच्च और उप-ध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटियाँ गतिक रूप से प्रेरित (Dynamically Induced) होती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जहाँ ऊँचाई के साथ तापमान में तीव्र गिरावट आती है और इस परत के ऊपरी हिस्से (मेसोपॉज) में तापमान गिरकर -100°C तक पहुँच जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वायुमंडल की विभिन्न परतों, तापमान की ऊर्ध्वाधर प्रवणता और वैश्विक वायुदाब पेटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षोभसीमा (Tropopause) पर तापमान ध्रुवों के ऊपर लगभग -45°C और विषुवत वृत्त के ऊपर लगभग -80°C होता है, जिसका मुख्य कारण विषुवतीय क्षेत्रों में शक्तिशाली संवहन धाराओं (Convection Currents) द्वारा ऊष्मा का अधिक ऊँचाई तक परिवहन करना है।
2. मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जहाँ ऊँचाई के साथ तापमान में तीव्र गिरावट आती है और इस परत के ऊपरी सीमा (मेसोपॉज) पर तापमान घटकर -90°C से -100°C तक पहुँच जाता है।
3. उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High-Pressure Belts) जिन्हें 'अश्व अक्षांश' भी कहा जाता है, पूर्णतः तापीय कारणों (Thermal Factors) से विकसित होती हैं क्योंकि यहाँ ध्रुवों से आने वाली ठंडी हवाएँ उतरती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी पर वायुदाब पेटियों का यह वितरण स्थायी नहीं रहता, बल्कि सूर्य की आभासी उत्तरायण और दक्षिणायन गति (Uttarayan and Dakshinayan) के साथ ये सभी पेटियाँ उत्तर और दक्षिण की ओर विस्थापित होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) तथा हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सिंधु नदी प्रणाली' के अंतर्गत आने वाली सतलज, व्यास और रावी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) नदियों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो हिमालय के उत्थान से पहले से बह रही हैं और इन्होंने गहरे गार्ज का निर्माण किया है।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से 'वृक्षाकार' (Dendritic) अपवाह पैटर्न का अनुसरण करती हैं, जिनमें गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरते समय बड़े और उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं।
3. 'नर्मदा और तापी' नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की उन प्रमुख नदियों में शामिल हैं जो पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में गिरती हैं, और ये नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर बहने के कारण डेल्टा का निर्माण न करके ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं।
4. 'कोसी नदी' को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो अपने मार्ग परिवर्तन (Course shifting) और भारी मात्रा में अवसाद (Silt) लाने के लिए कुख्यात है, और यह गंगा नदी में मिलने से पहले सोन नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी के रूप में जुड़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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