त्वरित लिंक्स
Geography
1 views
भारत के प्रमुख उद्योगों, परिवहन अवसंरचना (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और जलमार्ग) तथा विनिर्माण गलियारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारा' (NS-EW Corridor) परियोजना के तहत उत्तर में श्रीनगर को दक्षिण में कन्याकुमारी से तथा पूर्व में पोरबंदर को पश्चिम में सिलचर (यह संयोजन विपरीत है, पोरबंदर पश्चिम में और सिलचर पूर्व में है) से जोड़ने वाली कुल लगभग 7,300 किलोमीटर लंबी राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का विकास किया जा रहा है।
- 2. 'पूर्वी समर्पित माल गलियारा' (EDFC) लुधियाना (पंजाब) से शुरू होकर हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के दनकुनी तक लगभग 1,835 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है, और यह पूरी तरह से कोयला, इस्पात तथा खाद्यान्न ढुलाई के लिए समर्पित है।
- 3. भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों के संबंध में, राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2) सदिया से धुबरी के बीच ब्रह्मपुत्र नदी पर लगभग 891 किलोमीटर की लंबाई में स्थित है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र को मुख्य भूमि से जोड़ता है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार देश का पहला आधुनिक एकीकृत इस्पात संयंत्र राउरकेला में पश्चिम जर्मनी के सहयोग से स्थापित किया गया था, जो सार्वजनिक क्षेत्र का प्रमुख उपक्रम है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि 'उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम गलियारा' (NS-EW Corridor) के तहत उत्तर में श्रीनगर को दक्षिण में कन्याकुमारी से (उत्तर-दक्षिण) तथा पश्चिम में **पोरबंदर** को पूर्व में **सिलचर** (पूर्व-पश्चिम) से जोड़ा जाता है, प्रश्न में पोरबंदर और सिलचर की अवस्थिति को विपरीत कर दिया गया है। कथन 2 सत्य है क्योंकि 'पूर्वी समर्पित माल गलियारा' (EDFC) लुधियाना (पंजाब) से दनकुनी (पश्चिम बंगाल) तक लगभग 1,835 किमी लंबा है और यह कोयला, खनिज एवं माल ढुलाई के लिए है। कथन 3 सत्य है क्योंकि राष्ट्रीय जलमार्ग-2 (NW-2) ब्रह्मपुत्र नदी पर सदिया से धुबरी के मध्य स्थित है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की परिवहन व औद्योगिक नीतियां देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अतः केवल कथन 2 और 3 सही हैं।
Related Questions
→
भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और उनमें स्थित घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'पीर पंजाल' श्रेणी लघु हिमालय (या मध्य हिमालय) की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण श्रेणी है, जो कश्मीर घाटी को जम्मू क्षेत्र से अलग करती है और इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध 'बनिहाल दर्रा' स्थित है जो जवाहर सुरंग के माध्यम से सड़क संपर्क प्रदान करता है।
2. 'काराकोरम श्रेणी' को 'उच्च एशिया की रीढ़' (Backbone of High Asia) कहा जाता है, जिसमें भारत की सबसे ऊंची चोटी के-2 (गॉडविन ऑस्टिन) अवस्थित है, और इसी श्रेणी के अंतर्गत 'सियाचिन' और 'बाल्टोरो' जैसे विशाल ग्लेशियर पाए जाते हैं।
3. 'कुल्लू घाटी' (Kullu Valley) धौलाधार और पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य स्थित एक प्रसिद्ध अनुप्रस्थ घाटी है, जिसे 'देवों की घाटी' भी कहा जाता है, और यहीं से 'ब्यास' नदी प्रवाहित होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'शांत घाटी' (Silent Valley) केरल के पलक्कड़ जिले में नीलगिरी पहाड़ियों के भीतर स्थित है, जो अपने अत्यधिक समृद्ध उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावनों और दुर्लभ सिंह-पुच्छ मकाक (Lion-tailed macaque) की आबादी के लिए विश्वविख्यात है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भौगोलिक अवस्थिति, भूगर्भीय संरचना और उनके भंडारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार (लगभग 98% से अधिक) 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित है, और यह गैर-कोकिंग और उच्च राख (High Ash) तथा कम गंधक (Low Sulphur) वाला कोयला होता है।
2. 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) क्षेत्र जो कि अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्र है, खंभात की खाड़ी के शेल्फ पर स्थित है और यहाँ का मुख्य तेल उत्पादन 'मियोसीन' (Miocene) युग की चूना पत्थर (Limestone) संरचनाओं से प्राप्त होता है।
3. भारत में थोरियम का सबसे बड़ा भंडार केरल और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट' (Monazite) रेत में पाया जाता है, जबकि यूरेनियम के प्रमुख भंडार झारखंड के जादूगोड़ा के अलावा हाल ही में आंध्र प्रदेश के तुम्मलापल्ली क्षेत्र में डोलोमाइट चट्टानों में खोजे गए हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में टर्शरी (Tertiary) कालीन कोयला मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों (जैसे असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नागालैंड) में पाया जाता है, जिसमें कार्बन की मात्रा कम और गंधक की मात्रा उच्च होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, विवर्तनिकी और चट्टानों के गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट (पपड़ी) और मेंटल के ऊपरी हिस्से के बीच सीमा बनाती है, जहाँ प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) की गति में अचानक तीव्र वृद्धि दर्ज की जाती है।
2. 'बेसाल्टिक मैग्मा' के ठंडा होने से निर्मित आग्नेय चट्टानें अधिक घनत्व वाली और फेरोमैग्नेशियन खनिजों से युक्त होती हैं, जिन्हें 'माफिक' (Mafic) चट्टानें कहा जाता है, जबकि ग्रेनाइट जैसी चट्टानें 'फेल्सिक' (Felsic) श्रेणी में आती हैं।
3. 'निस' (Gneiss) एक रूपांतरित चट्टान है जो ग्रेनाइट के क्षेत्रीय कायांतरण (Regional Metamorphism) के परिणामस्वरूप बनती है और इसमें खनिज पदार्थों का पट्टियों या बैंड (Banding) के रूप में पुनर्व्यवस्थित होना इसकी प्रमुख विशेषता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg Discontinuity) लोअर मेंटल और बाहरी क्रोड (Outer Core) के बीच स्थित है, जहाँ से एस-तरंगें (S-waves) आगे नहीं गुजर पाती हैं क्योंकि बाहरी क्रोड तरल अवस्था में है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं और उनके जल-प्रवाह तंत्र के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि उन्हें जल वर्षा के अतिरिक्त हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से भी प्राप्त होता है, जबकि अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ अनित्य (Seasonal) या मानसूनी होती हैं जो केवल वर्षा पर निर्भर करती हैं।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ पुराने पठार पर अपने आधार तल (Base Level) को प्राप्त कर चुकी हैं और परिपक्व अवस्था में होने के कारण विसर्पण (Meandering) जैसी स्थलाकृतियाँ बहुत कम बनाती हैं, जबकि उत्तर भारत के मैदानों में बहने वाली हिमालयी नदियाँ अपने युवा चरण में अत्यधिक विसर्पण और मार्ग परिवर्तन के लिए जानी जाती हैं।
3. 'नर्मदा' और 'तापी' नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की अधिकांश अन्य नदियों के विपरीत पूर्व की ओर बहकर बंगाल की खाड़ी में गिरने के बजाय भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होते हुए पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं और अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuary) का निर्माण करती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी गोदावरी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' भी कहा जाता है, जिसका उद्गम महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर (नासिक) से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय नितल के उच्चावच में 'महाद्वीपीय मग्नतट' (Continental Shelf) सबसे उथला भाग होता है, जिसकी औसत गहराई 120 से 200 मीटर तक होती है और यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मतस्यन (Fishing) क्षेत्रों के रूप में जाना जाता है।
2. 'सिजीजी' (Syzygy) की स्थिति वह खगोलीय दशा है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक ही सीधी रेखा में होते हैं, और इस दौरान गुरुत्वाकर्षण बलों के संयुक्त प्रभाव से दीर्घ ज्वार (Spring Tide) उत्पन्न होता है।
3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) हिंद महासागर को प्रशांत महासागर (दक्षिण चीन सागर) से जोड़ती है और यह सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) को मलय प्रायद्वीप से अलग करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लघु ज्वार (Neap Tide) के समय चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के केंद्र पर समकोण बनाते हैं, जिससे दोनों के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित करते हैं और इस कारण सामान्य ज्वार की तुलना में ज्वार की ऊँचाई कम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.