त्वरित लिंक्स
Geography
21 views
भारतीय मानसून की क्रियाप्रणाली, वर्षा के स्थानिक वितरण और मानसूनी तंत्र को प्रभावित करने वाले कारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'बंगाल की खाड़ी शाखा' जब म्यांमार के अराकान योमा पर्वत से टकराती है, तो इसका एक उप-घटक विक्षेपित होकर पूर्वोत्तर भारत की ओर मुड़ जाता है, जिससे मेघालय के पठारी क्षेत्रों (जैसे मावसिनराम और चेरापूंजी) में विश्व की सर्वाधिक वार्षिक वर्षा दर्ज होती है।
- 2. 'अल नीनो' (El Nino) और दक्षिण दोलन (ENSO) का भारतीय मानसून पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि अल नीनो के कारण प्रशांत महासागर के पूर्वी तट (पेरू के पास) पर उच्च वायुदाब और पश्चिमी प्रशांत (ऑस्ट्रेलिया/इंडोनेशिया) के पास निम्न वायुदाब बनता है, जिससे भारत में मानसूनी हवाएँ कमजोर हो जाती हैं।
- 3. 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) भूमध्य सागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय प्रणालियाँ हैं, जो जेट स्ट्रीम के प्रभाव से पूर्व की ओर बहते हुए शीतकाल में उत्तर-पश्चिम भारत में वर्षा (रबी की फसलों के लिए वरदान) और हिमालयी क्षेत्रों में भारी हिमपात का कारण बनती हैं।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार तिब्बत के पठार का ग्रीष्मकाल में अत्यधिक गर्म होना और वहाँ उच्च क्षोभमंडलीय प्रति-चक्रवात (High Tropospheric Anti-cyclone) का बनना, दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन और उसके स्थायित्व के लिए एक मुख्य नकारात्मक (अवरोधक) कारक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बंगाल की खाड़ी की शाखा जब अराकान योमा से टकराती है तो इसका विक्षेपण उत्तर-पूर्वी भारत की गारो, खासी और जयंतिया पहाड़ियों की कीपनुमा आकृति में होता है जिससे मावसिनराम में अत्यधिक वर्षा होती है। कथन 2 गलत है क्योंकि अल नीनो के दौरान पूर्वी प्रशांत महासागर में 'निम्न वायुदाब' और पश्चिमी प्रशांत में 'उच्च वायुदाब' बनता है (सामान्य का विपरीत), जिससे भारत में मानसून कमजोर होता है। कथन 3 सही है क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ भूमध्य सागर से उठकर जेट स्ट्रीम के साथ भारत पहुँचते हैं और शीतकालीन वर्षा लाते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि तिब्बत के पठार का गर्म होना और वहाँ प्रति-चक्रवात का बनना मानसून को 'कमजोर' नहीं बल्कि इसे 'आकर्षित और शक्तिशाली' बनाने में धनात्मक रूप से सहायक होता है। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का निर्माण करती हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी अस्तित्व में थीं और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों (गार्ज व कैन्यन) का निर्माण करते हुए अपने मार्ग पर बनी रहीं।
2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश प्रमुख नदियाँ (जैसे- गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पश्चिम घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुए अरब सागर में मिलती हैं।
3. प्रायद्वीपीय नदियों का अपवाह तंत्र युवा अवस्था (Youthful Stage) का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि ये नदियाँ अत्यधिक घुमावदार मार्ग (Meanders) बनाती हैं और अपने विस्तृत जलोढ़ मैदानों में बड़े पैमाने पर विसर्पण तथा गोखुर झीलों (Oxbow lakes) का निर्माण करती हैं।
4. हिमालयी नदियों का जल स्रोत मुख्य रूप से हिमनद (Glaciers) और वर्षा दोनों होते हैं, जिसके कारण ये बारहमासी (Perennial) होती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर होने के कारण अनित्य (Non-perennial या Seasonal) प्रकृति की होती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
सौर मंडल के ग्रहों, उनकी आंतरिक संरचना, वायुमंडलीय विशेषताओं और खगोलीय गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शुक्र (Venus) और अरुण (Uranus) सौर मंडल के ऐसे दो ग्रह हैं जिनके घूर्णन की दिशा (Rotation Direction) अधिकांश अन्य ग्रहों के विपरीत यानी पूर्व से पश्चिम (Retrograde Rotation) की ओर है, जिसके कारण इन ग्रहों पर सूर्य पश्चिम में उगता है और पूर्व में अस्त होता है।
2. 'गैनीमेड' (Ganymede), जो बृहस्पति का सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह है, आकार में बुध ग्रह से भी बड़ा है और यह सौर मंडल का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसके पास अपना स्वयं का आंतरिक चुंबकीय क्षेत्र (Intrinsic Magnetic Field) मौजूद है।
3. क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच स्थित है, और इसमें पाए जाने वाले सबसे बड़े पिंड 'सेरेस' (Ceres) को अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा 'बौने ग्रह' (Dwarf Planet) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शनि ग्रह का घनत्व जल के घनत्व से भी कम (लगभग 0.687 g/cm³) है, जिसका अर्थ है कि यदि इसे किसी विशाल जलकुंड में रखा जाए, तो यह तैरेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के संबंध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. देश के कुल सिंचित क्षेत्रफल में 'नलकूपों और अन्य कुओं' (Tube wells and Wells) का हिस्सा सबसे अधिक है, जिसके पश्चात 'नहरों' (Canals) का स्थान आता है।
2. 'परिशुद्ध कृषि' (Precision Agriculture) और सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ (ड్రిप और फव्वारा सिंचाई) जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अधिकतम करती हैं और उर्वरकों के रिसाव (Leaching) को कम करती हैं।
3. भारत में 'बाजरा' और 'ज्वार' जैसी मोटे अनाजों (Millets) की फसलें मुख्य रूप से वर्षा-आधारित (Rainfed) क्षेत्रों में उगाई जाती हैं, जिन्हें बहुत कम जल की आवश्यकता होती है और ये शुष्क जलवायु के प्रति अत्यधिक सहनशील होती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में कुल बोए गए क्षेत्र का सबसे बड़ा भाग 'गेहूँ' की फसल के अंतर्गत आता है, जो देश की एकमात्र सर्वप्रमुख खाद्य फसल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वायुमंडल की विभिन्न परतों और वायुदाब पेटियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. क्षोभमंडल (Troposphere) में ऊंचाई के साथ तापमान में प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1°C की दर से ह्रास होता है, जिसे 'सामान्य ताप ह्रास दर' (Normal Lapse Rate) कहा जाता है, और इसी परत में मौसम संबंधी सभी घटनाएं घटित होती हैं।
2. आयनमंडल (Ionosphere) में स्थित 'थर्मोस्फीयर' (Thermosphere) में ऊंचाई के साथ तापमान अत्यधिक तेजी से बढ़ता है, जिसका प्रमुख कारण यहां गैसों के अणुओं द्वारा सूर्य के एक्स-रे और पराबैंगनी विकिरणों का अवशोषण होना है।
3. भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low Pressure Belt) का निर्माण मुख्य रूप से पृथ्वी के घूर्णन बल (Coriolis Force) के कारण हवाओं के विक्षेपण से होने वाले 'गतिकीय कारकों' (Dynamic Factors) द्वारा होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इन चक्रवातों के विकास के लिए समुद्री सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक है, जिससे प्रचुर मात्रा में आर्द्रता और ऊर्जा मिल सके।
2. कोरियोलिस बल (Coriolis Force) की अनुपस्थिति के कारण ये चक्रवात भूमध्य रेखा (Equator) के बिल्कुल निकट अत्यधिक शक्तिशाली रूप लेते हैं।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात के केंद्र को 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) कहा जाता है, जहाँ वायुदाब न्यूनतम और मौसम सामान्यतः शांत, मेघहीन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.