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Geography
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भारत के प्रमुख उद्योगों, परिवहन अवसंरचना (राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल और जलमार्ग) तथा औद्योगिक गलियारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा' (DMIC) परियोजना भारत की एक प्रमुख अवसंरचना पहल है, जिसे जापान के तकनीकी और आर्थिक सहयोग से 'पश्चिमी समर्पित रेल माल गलियारे' (WDFC) के समानांतर विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना है।
- 2. 'राष्ट्रीय जलमार्ग-3' (NW-3), जिसे 'पश्चिम तटीय नहर' भी कहा जाता है, केरल राज्य में कोट्टापुरम से कोल्लम तक लगभग 168 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है और यह पूरी तरह से अंतर्देशीय नौकायन के लिए नेविगएबल जलमार्ग है।
- 3. भारत का पहला आधुनिक और बड़े पैमाने पर स्थापित एकीकृत इस्पात संयंत्र 'टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी' (TISCO) के रूप में वर्ष 1907 में साकची (झारखंड में वर्तमान जमशेदपुर) में स्थापित किया गया था, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र का पहला पूर्ण एकीकृत संयंत्र राउरकेला था।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार स्वतंत्रता के पश्चात सोवियत संघ के सहयोग से स्थापित 'भिलाई इस्पात संयंत्र' को विशेष रूप से भारी रेल पटरियों (Rail Tracks) और भारी संरचनात्मक इस्पात के उत्पादन के लिए डिजाइन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारा (DMIC) जापान के सहयोग से WDFC के समानांतर विकसित किया जा रहा है। 2. राष्ट्रीय जलमार्ग-3 (NW-3) केरल की पश्चिम तटीय नहर (कोट्टापुरम से कोल्लम) पर स्थित है। 3. TISCO की स्थापना 1907 में साकची (जमशेदपुर) में हुई थी। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भिलाई इस्पात संयंत्र को सोवियत संघ की सहायता से छत्तीसगढ़ में स्थापित किया गया था जो भारी रेल पटरियों के उत्पादन के लिए विख्यात है।
Related Questions
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भारत के अपवाह तंत्र और नदियों की प्रकृति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ अपने उद्गम स्रोत से लेकर मुहानों तक 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का निरंतर प्रदर्शन करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अपने संपूर्ण मार्ग में कभी भी अपनी युवावस्था की विशेषताओं (जैसे गहरी घाटियों और महाखड्डों का निर्माण) को छोड़कर परिपक्व अवस्था में नहीं पहुँचती हैं।
2. प्रायद्वीपीय भारत की अधिकांश नदियाँ (जैसे नर्मदा और ताप्ती को छोड़कर) पश्चिमी घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, तथा वे अपनी घाटियों के आधार तल (Base level) को प्राप्त कर चुकी हैं, जिसके कारण वे अत्यधिक विसर्पण (Meandering) और कम अपरदन कार्य करती हैं।
3. सिंधु नदी तंत्र की प्रमुख सहायक नदी 'सतलुज' तथा ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की प्रमुख नदियाँ भारत में प्रवेश करने से पहले तिब्बत क्षेत्र में क्रमशः मानसरोवर और चेमायुंगडुंग हिमनद के निकट समानांतर रूप से पूर्व-पश्चिम दिशा में बहती हैं, जो अनुवर्ती (Consecquent) प्रवाह का एक अनूठा उदाहरण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय मृदाओं की विशेषता और उनके वितरण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदा का विकास दक्कन पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में रवेदार आग्नेय चट्टानों पर कम वर्षा वाले क्षेत्रों में होता है, तथा जल के साथ मिलने पर लौह ऑक्साइड के जलयोजन के कारण यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
2. शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं में ह्यूमस और नाइट्रोजन की मात्रा नगण्य तथा कैल्शियम कार्बोनेट की अधिकता के कारण नीचे की परतों में 'कंकड़' की परत पाई जाती है।
3. 'रर', 'ऊसर' या 'कल्लर' के रूप में पहचानी जाने वाली लवणीय और क्षारीय मृदाओं में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवण प्रचुर मात्रा में होते हैं, जिसके कारण इनमें नाइट्रोजन और चूने की अधिकता होती है और ये उपजाऊ हो जाती हैं।
4. लैटेराइट मृदा का निर्माण उच्च तापमान और अत्यधिक भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में तीव्र 'निक्षालन' (Leaching) प्रक्रिया के परिणामस्वरूप होता है, जिसके कारण सिलिका का क्षालन हो जाता है और ऊपरी परत में लौह तथा एल्युमिनियम के ऑक्साइड शेष बचते हैं, जो चाय और कॉफी की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) और नदी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालयी नदियाँ 'युवावस्था' (Youthful Stage) में हैं और ये अपने प्रवाह मार्ग में अत्यधिक अपरदन करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप वी-आकार की घाटियाँ (V-shaped Valleys), छिपप्रिकाएँ (Rapids) और महाखड्ड (Gorges) का निर्माण होता है।
2. प्रायद्वीपीय नदियाँ 'परिपक्व अवस्था' (Mature Stage) में हैं, जिनके मार्ग निश्चित और अपरिवर्तनीय हैं, और ये नदियाँ अपने बेसिन में भारी मात्रा में निक्षेपण कार्य करती हैं तथा इनके डेल्टा अत्यधिक चौड़े और संकीर्ण दोनों प्रकार के होते हैं।
3. 'नर्मदा' और 'तापी' नदियाँ प्रायद्वीपीय भारत की प्रमुख नदियाँ हैं जो पश्चिम की ओर बहते हुए खंभात की खाड़ी में गिरती हैं, और ये भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर प्रवाहित होने के कारण डेल्टा का निर्माण न करके ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गोदावरी नदी को 'वृद्ध गंगा' या 'दक्षिण गंगा' कहा जाता है, जो प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है और इसका अपवाह बेसिन कृष्णा नदी से भी बड़ा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख उच्चावच स्वरूपों, यथा पर्वतों, पठारों, मैदानों और मरुस्थलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अटाकामा मरुस्थल' (Atacama Desert) दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर एंडीज पर्वतमाला और प्रशांत महासागर के बीच स्थित एक शुष्क और वर्षाछाया प्रभाव वाला मरुस्थल है, जो विश्व के सबसे शुष्क स्थानों में से एक माना जाता है और यहाँ नाइट्रेट के विशाल भंडार पाए जाते हैं।
2. 'पामीर का पठार' (Pamir Knot) को 'विश्व की छत' (Roof of the World) कहा जाता है, जो एक अंतःपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का उत्कृष्ट उदाहरण है और यह तियान शान, काराकोरम, कुनलन तथा हिंदूकुश पर्वतमालाओं का संगम स्थल है।
3. 'ब्लैक फॉरेस्ट' (Black Forest) और 'वास्जेस' (Vosges) पर्वत ब्लॉक पर्वतों (Block Mountains / Horsts) के प्रमुख उदाहरण हैं, जो विवर्तनिक ताकतों के कारण उत्पन्न भ्रंशण (Faulting) प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप राइन नदी घाटी के दोनों किनारों पर विकसित हुए हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गोबी मरुस्थल एशिया का एक विशाल शीत मरुस्थल है, जो मंगोलिया के अधिकांश भाग और चीन के उत्तरी क्षेत्रों में फैला हुआ है, और यह मरुस्थल मुख्य रूप से उच्च अक्षांशी स्थिति तथा हिमालय पर्वत द्वारा मानसूनी हवाओं के रोके जाने के कारण बनने वाले वर्षाछाया प्रभाव के अंतर्गत आता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वायुमंडल की विभिन्न परतों, उनके तापमान की प्रवणता (Temperature Lapse Rate) और वैश्विक वायुदाब पेटियों (Global Pressure Belts) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. समताप मंडल (Stratosphere) में तापमान की ऊंचाई के साथ वृद्धि होती है, जिसका मुख्य कारण ओजोन परत द्वारा पराबैंगनी (UV) विकिरणों का अवशोषण है, और इसी कारण यह परत वाणिज्यिक जेट विमानों की उड़ानों के लिए आदर्श मानी जाती है क्योंकि यहाँ मौसम संबंधी हलचलें नगण्य होती हैं।
2. 'डोलड्रम' (Doldrums) या विषुवतरेखीय निम्न वायुदाब पेटी (Equatorial Low Pressure Belt) तापीय रूप से प्रेरित पेटी है, जहाँ वर्ष भर सूर्य की किरणें लंबवत पड़ने के कारण संवहन धाराओं (Convectional Currents) का विकास होता है, और यहाँ धरातलीय पवनें शांत रहती हैं।
3. उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियाँ (Subtropical High Pressure Belts) गतिक रूप से प्रेरित (Dynamically Induced) पेटियाँ हैं, जिनका निर्माण पृथ्वी के घूर्णन और विषुवतरेखीय क्षेत्र से उठने वाली गर्म हवाओं के ऊपरी वायुमंडल में ठंडा होकर 30° से 35° अक्षांशों के पास नीचे बैठने (Subsidence) के कारण होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मध्यमंडल (Mesosphere) वायुमंडल की सबसे ठंडी परत है, जिसमें ऊंचाई के साथ तापमान में भारी गिरावट आती है और इस परत के ऊपरी सीमा (मेसोपॉज) पर तापमान -90°C से भी नीचे चला जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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