त्वरित लिंक्स
Geography
1 views
भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियाँ और प्रमुख फसलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में कुल सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा नलकूपों (Tube wells) और अन्य कुओं द्वारा सिंचित किया जाता है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य नलकूप सिंचाई के अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल रखता है।
- 2. 'श्री पद्धति' (System of Rice Intensification - SRI) धान की एक ऐसी वैज्ञानिक कृषि प्रणाली है, जिसमें पारंपरिक पद्धति की तुलना में कम जल की आवश्यकता होती है, पौधों की रोपाई कम उम्र के कम पौधों के साथ की जाती है और चौड़ी दूरी पर पौधरोपण किया जाता है।
- 3. भारत में 'रबी' की प्रमुख फसलें जैसे गेहूं, चना और सरसों मुख्य रूप से अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती हैं और इनकी कटाई मार्च-अप्रैल के दौरान की जाती है, जिन्हें पकने के लिए ठंडी जलवायु तथा बढ़ते समय चमकीली धूप की आवश्यकता होती है।
- 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की प्रमुख व्यावसायिक (नकद) फसलों में गन्ना, कपास, जूट और तंबाकू शामिल हैं, जिनमें 'गन्ना' उष्णकटिबंधीय फसल है जिसे उगने के लिए उच्च तापमान और 75 सेमी से 100 सेमी तक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों में भूजल (कुएँ और नलकूप) का स्थान सर्वोपरि है, जिससे देश के कुल सिंचित क्षेत्र का लगभग 60% से अधिक भाग सिंचित होता है। धान की खेती के लिए पारंपरिक रूप से जल का अत्यधिक दोहन होता है, जिसके समाधान के रूप में 'श्री पद्धति' (SRI) को अपनाया गया है, जो जल संरक्षण और अधिक उत्पादकता के लिए जानी जाती है। इसके अलावा, रबी और खरीफ फसलों के ऋतु चक्र, जलवायु संबंधी आवश्यकताएँ तथा व्यावसायिक फसलों (जैसे गन्ना) की भौगोलिक दशाएँ भारतीय कृषि भूगोल के अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
→
महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches) महासागरीय बेसिन के सबसे गहरे भाग होते हैं, जो सामान्यतः अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) के सहारे उपडक्शन क्षेत्रों में पाए जाते हैं, और 'मेरियाना गर्त' प्रशांत महासागर में स्थित सबसे गहरा गर्त है।
2. लघु ज्वार (Neap Tide) की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक-दूसरे के साथ समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं, जो चंद्रमा के प्रथम और तृतीय चतुर्थांश (First and Third Quarters) के दौरान घटित होता है।
3. 'बेरिंग जलसंधि' (Bering Strait) अटलांटिक महासागर को आर्कटिक महासागर से जोड़ती है और यह एशिया के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तरी अमेरिका के अलास्का से अलग करती है, तथा इसके आर-पार अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (International Date Line) गुजरती है।
4. जिब्राल्टर जलसंधि (Strait of Gibraltar) भूमध्यसागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है और इसे 'भूमध्यसागर की कुंजी' (Key to the Mediterranean) भी कहा जाता है, जो स्पेन (यूरोप) और मोरक्को (अफ्रिका) के बीच स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंपीय तरंगों की गतिकी तथा चट्टानों के वर्गीकरण और कायांतरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कॉनराड असांतत्य (Conrad Discontinuity) ऊपरी भूप्रपर्टी (Upper Crust) और निचली भूप्रपर्टी (Lower Crust) के बीच स्थित होता है, जहाँ घनत्व और प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) की गति में अचानक परिवर्तन देखा जाता है।
2. 'गुटेनबर्ग असांतत्य' (Gutenberg Discontinuity) मेंटल और बाह्य क्रोड के बीच की सीमा को रेखांकित करता है, जहाँ प्राथमिक तरंगें (P-waves) पूरी तरह से विलुप्त हो जाती हैं और द्वितीयक तरंगें (S-waves) अपनी अधिकतम गति प्राप्त कर लेती हैं।
3. क्षेत्रीय कायांतरण (Regional Metamorphism) मुख्य रूप से अत्यधिक विवर्तनिक दबाव (Tectonic Pressure) और उच्च तापमान के संयुक्त प्रभाव से विशाल भू-भाग पर चट्टानों के रूप-परिवर्तन को प्रेरित करता है, जिससे शिस्ट (Schist) और नाइस (Gneiss) जैसी पर्णिल (Foliated) चट्टानों का निर्माण होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovičić Discontinuity) क्रोड और मेंटल के बीच स्थित है, जबकि लेहमन असांतत्य (Lehmann Discontinuity) बाह्य क्रोड और आंतरिक क्रोड के बीच की सीमा को पृथक् करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
भारत की प्रमुख पर्वत श्रेणियों और घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जास्कर श्रेणी' (Zaskar Range) महान हिमालय के उत्तर में समानांतर रूप से विस्तृत है, जो मुख्य रूप से लद्दाख क्षेत्र में स्थित है और यह तिब्बत तथा भारत के बीच एक महत्वपूर्ण जलविभाजक का कार्य करती है।
2. 'फूलों की घाटी' (Valley of Flowers) उत्तराखंड के चमोली जिले में महान हिमालय के क्षेत्र में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है, जिसे अलकनंदा की सहायक नदी 'पुष्पावती' द्वारा सिंचित किया जाता है।
3. 'चुम्बी घाटी' (Chumbi Valley) एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी है, जो सिक्किम, भूटान और तिब्बत (चीन) के त्रिसंगम पर स्थित है और यह प्राचीन सिल्क मार्ग का एक प्रमुख हिस्सा रही है।
4. 'मरी घाटी' (Murree Valley) या कश्मीर की सहायक अनुदैर्ध्य घाटियाँ ट्रांस-हिमालय क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं, जो पूरी तरह से बंजर और शुष्क मरुस्थलीय भू-आकृति का प्रतिनिधित्व करती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारत की प्रमुख झीलों, जलप्रपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'बरैक झील' (Barak Lake) या पूर्वोत्तर की प्रसिद्ध 'लोकटक झील' (Loktak Lake) में तैरते हुए अनूठे वनस्पति और मृदा के द्वीप पाए जाते हैं जिन्हें 'फुम्दि' (Phumdis) कहा जाता है, और इसी झील के दक्षिणी भाग में 'केइबु लामजाओ' (Keibul Lamjao) नामक विश्व का एकमात्र तैरता हुआ राष्ट्रीय उद्यान स्थित है।
2. 'इडुक्की जलविद्युत परियोजना' (Idukki Hydroelectric Project) पेरियार नदी पर केरल राज्य में स्थित एक प्रमुख चाप बांध (Arch Dam) परियोजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य पश्चिमी घाट के इस क्षेत्र में सिंचाई और विद्युत उत्पादन करना है।
3. 'शिवसमुद्रम जलप्रपात' (Shivanasamudra Falls) कावेरी नदी पर कर्नाटक राज्य में स्थित है, और यह भारत के उन शुरुआती जलविद्युत गृहों में से एक है जहाँ वर्ष 1902 में एशिया का पहला जलविद्युत संयंत्र स्थापित किया गया था।
4. 'कोयना परियोजना' (Koyna Project) महाराष्ट्र की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक है, जो कोयना नदी (कृष्णा नदी की सहायक नदी) पर निर्मित है और इसे अत्यधिक भूकम्प-सक्रिय (Seismically Active) क्षेत्र होने के कारण 'महाराष्ट्र की जीवन रेखा' के साथ-साथ विशेष तकनीकी निगरानी में रखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
भारतीय मृदाओं की आनुवंशिक विशेषताओं, खनिज संघटन और उनके भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लाल और पीली मृदा' का विकास मुख्य रूप से दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में प्राचीन रवेदार (Crystalline) और कायांतरित चट्टानों पर हुआ है, जिसमें फेरिक ऑक्साइड्स की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
2. 'काली मृदा' (जिसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है) में लोहे, चूने, मैग्नीशियम और एल्युमिनियम की अधिकता होती है, तथा इसमें उच्च जल-धारण क्षमता और 'स्व-जुताई' (Self-ploughing) का विशिष्ट गुण पाया जाता है क्योंकि गीली होने पर यह अत्यधिक चिपचिपी हो जाती है और सूखने पर इसमें गहरी चौड़ी दरारें पड़ जाती हैं।
3. 'लैटेराइट मृदा' का निर्माण मानसूनी जलवायु के अंतर्गत उच्च तापमान और तीव्र वर्षा के कारण 'निक्षालन' (Leaching) की तीव्र प्रक्रिया के फलस्वरूप होता है, जिसमें सिलिका जैसे घुलनशील तत्व बह जाते हैं और आयरन ऑक्साइड तथा एल्युमिनियम के यौगिक शेष बच जाते हैं, जिससे यह मृदा अत्यधिक उपजाऊ होकर रबी की प्रमुख फसलों के लिए सर्वोत्तम होती है।
4. 'क्षारीय और लवणीय मृदा' को देश के विभिन्न भागों में 'रेह', 'कल्लर' या 'ऊसर' नामों से जाना जाता है, और यह मुख्यतः शुष्क व अर्ध-शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों तथा नहरों द्वारा अत्यधिक सिंचित जल-भराव वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जिसमें सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के लवणों की अधिकता पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.