BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
22 views

भारत में ऊर्जा खनिजों और परमाणु ईंधनों के वितरण तथा उनकी भू-वैज्ञानिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत का अधिकांश यूरेनियम भंडार धारवाड़ क्रम की चट्टानों में पाया जाता है, जिसमें झारखंड का जादूगोड़ा क्षेत्र प्रमुख है, जबकि थोरियम का विशाल भंडार मुख्य रूप से केरल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) में संकेंद्रित है।
  2. 2. भारत में लिग्नाइट कोयले का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के नेवेली बेसिन में पाया जाता है, इसके अलावा राजस्थान, गुजरात और जम्मू-कश्मीर राज्यों में भी लिग्नाइट के निक्षेप मिलते हैं।
  3. 3. देश के पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र में स्थित 'बॉम्बे हाई' (Mumbai High) पेट्रोलियम क्षेत्र में खनिज तेल का संचयन मुख्यतः इओसीन (Eocene) युग की चूना पत्थर की परतों में पाया जाता है।
  4. 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की परमाणु ऊर्जा नीति के त्रि-चरण (Three-Stage) कार्यक्रम का दूसरा चरण प्राकृतिक यूरेनियम और प्लूटोनियम के संकरण पर आधारित 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (FBR) तकनीक का उपयोग करता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूरी तरह से सत्य हैं। 1. भारत में यूरेनियम के मुख्य भंडार धारवाड़ क्रम की कायांतरित चट्टानों में पाए जाते हैं, जिसमें झारखंड का जादूगोड़ा खदान अत्यंत प्रसिद्ध है; जबकि थोरियम मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत के तटीय भागों में मोनाज़ाइट रेत के रूप में पाया जाता है। 2. तमिलनाडु का नेवेली लिग्नाइट (भूरा कोयला) उत्पादन के लिए देश भर में अग्रणी है। 3. बॉम्बे हाई में पेट्रोलियम का संचयन मियोसीन और इओसीन युग के चूना पत्थर (Limestone) तथा बलुआ पत्थर संरचनाओं में मिलता है। 4. भारत का त्रि-चरण परमाणु कार्यक्रम डॉ. होमी भाभा द्वारा परिकल्पित किया गया था, जिसका दूसरा चरण फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों पर आधारित है। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार यह रणनीति देश के सीमित यूरेनियम और प्रचुर थोरियम भंडारों का दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करती है।
Share:

Related Questions

→ भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भूगर्भीय विशेषताओं, उनके वितरण और निष्कर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार गोंडवाना क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जिसमें मुख्य रूप से बिटुमिनस कोयला पाया जाता है, जबकि टर्शरी कालीन कोयला मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में मिलता है जो उच्च गंधक (High Sulphur) युक्त होता है। 2. देश में 'कालोल', 'मेहसाणा' और 'अंकलेश्वर' पेट्रोलियम क्षेत्र खंभात बेसिन (गुजरात) के अंतर्गत स्थलीय (Onshore) तेल क्षेत्र हैं, जबकि कृष्णा-गोदावरी (K-G) बेसिन का अपतटीय क्षेत्र हाल के वर्षों में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों के लिए प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है। 3. भारत में 'मोनोसाइट' (Monazite) के विशाल भंडार केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की बालू में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जिससे थोरियम का निष्कर्षण किया जाता है, जबकि 'यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड' (UCIL) द्वारा झारखंड के जादूगोड़ा के अतिरिक्त मेघालय के डोमियथियट क्षेत्र में भी यूरेनियम भंडारों के विकास का कार्य प्रस्तावित है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत का परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम मुख्य रूप से स्वदेशी तकनीक पर आधारित है, जिसमें प्राकृतिक यूरेनियम को ईंधन के रूप में और भारी पानी (Heavy Water) को मॉडरेटर के रूप में उपयोग करने वाले दाबित भारी पानी रिएक्टरों (PHWR) की श्रृंखला प्रमुख है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत में ऊर्जा खनिजों और उनके प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. देश में यूरेनियम के भंडार मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम की चट्टानों में पाए जाते हैं, जिसमें झारखंड का सिंहभूम (Singhbhum) खनिज मेखला और आंध्र प्रदेश-तेलंगाना सीमा पर स्थित तुमलापल्ले (Tummalapalle) क्षेत्र विश्व के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में गिने जाते हैं। 2. देश में लिग्नाइट कोयले (भूरा कोयला) के सबसे बड़े भंडार प्रायद्वीपीय भारत के भीतर दामोदर और सोन घाटियों में गोंडवाना युग की चट्टानों में मिलते हैं, जबकि तमिलनाडु का नेवेली क्षेत्र टर्शरी युग के लिग्नाइट उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। 3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में प्रयुक्त होने वाले प्राकृतिक यूरेनियम का अधिकांश भाग घरेलू खनन से पूरा होता है, और यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड (UCIL) द्वारा देश में यूरेनियम का खनन और प्रसंस्करण किया जाता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत के तटीय क्षेत्रों (विशेषकर केरल, तमिलनाडु और ओडिशा) की बालू में पाया जाने वाला 'मोनाज़ाइट' (Monazite) थोरियम, यूरेनियम और दुर्लभ मृदा तत्वों (Rare Earth Elements) का एक प्रमुख अयस्क है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पृथ्वी की आंतरिक संरचना, शैल चक्र और चट्टानों के प्रकार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पृथ्वी की क्रस्ट (भूपर्पटी) में भार के अनुसार सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन है, जिसके बाद सिलिकॉन और एल्युमिनियम का स्थान आता है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के स्तर पर सबसे प्रचुर मात्रा में 'लोहा' (Iron) पाया जाता है। 2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप, दाब या रासायनिक रूप से सक्रिय तरल पदार्थों के प्रभाव से मूल आग्नेय या अवसादी चट्टानों के पुनर्गठन और पुनः क्रिस्टलीकरण द्वारा बनती हैं, और इस प्रक्रिया में चूना पत्थर का रूपांतरण संगमरमर में तथा बलुआ पत्थर का रूपांतरण क्वार्ट्जाइट में हो जाता है। 3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और ऊपरी मैंटल के बीच की सीमा रेखा है, जबकि गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg Discontinuity) ऊपरी मैंटल और क्रोड (Core) के मध्य स्थित है। 4. बेसाल्ट और ग्रेb्रो दोनों अंतःभेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टानों के प्रमुख उदाहरण हैं, जिनका निर्माण मैग्मा के पृथ्वी की सतह के नीचे अत्यधिक धीमी गति से ठंडा होने के कारण बड़े क्रिस्टल के रूप में होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं, झीलों और जलप्रपात प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दामोदर घाटी निगम (DVC) परियोजना स्वतंत्र भारत की पहली बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है, जिसे अमेरिकी 'टेनेसी घाटी प्राधिकरण' (TVA) के मॉडल पर डिजाइन किया गया था, और इसके अंतर्गत तिलैया, मैथन, कोनार तथा पचेट हिल बाँधों का निर्माण किया गया है। 2. कर्नाटक राज्य में शरावती नदी पर निर्मित 'गेरसोपा' या 'महात्मा गांधी जलप्रपात' भारत का सबसे ऊँचा सीधा (Plunge) गिरने वाला जलप्रपात है, जिसे 'जोग फॉल्स' भी कहा जाता है और इसी नदी पर महात्मा गांधी जलविद्युत स्टेशन स्थापित है। 3. मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना के रूप में बेतवा नदी पर निर्मित 'माताटीला बाँध' (Matatila Dam) परियोजना का मुख्य उद्देश्य झाँसी, ललितपुर और हमीरपुर जैसे जिलों में सिंचाई और जलविद्युत आपूर्ति करना है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित 'पुलिकट झील' (Pulicat Lake) एक लैगून झील है, जो श्रीहरिकोटा द्वीप द्वारा बंगाल की खाड़ी से अलग होती है और यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की संरचना, उदगम और प्रवाह विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालय की अधिकांश नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उदाहरण हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ अपनी घाटियों को गहरा करके गहरे महाखड्डों (Gorges) का निर्माण किया है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की मुख्य नदियाँ जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी पश्चिम घाट से निकलकर पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि नर्मदा और तापी नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होते हुए अरब सागर में ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं। 3. 'कोसी नदी' जो अपनी मार्ग परिवर्तन की प्रवृत्ति के लिए कुख्यात है, एक अनुगामी नदी (Consecutive River) है जो केवल तराई क्षेत्र के ढाल के अनुसार बहती है और इसके उद्गम स्थल पर कोई हिमनद (Glacier) नहीं पाया जाता है। 4. प्रायद्वीपीय नदियाँ अधिकांशतः परिपक्व अवस्था (Mature Stage) में हैं, जिसके कारण इनका ढाल मंद होता है, इनके मार्ग में अपरदन की क्षमता कम होती है और ये अपने मुहाने पर बड़े जलोढ़ शंकु (Alluvial Cones) और विस्तृत डेल्टा बनाती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.