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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) में नरमपंथियों का मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था और वे 'प्रार्थना, याचिका और प्रतिवेदन' की पद्धति का अनुसरण करते थे, जबकि गरमपंथियों ने 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'राष्ट्रीय शिक्षा' और 'निष्क्रिय प्रतिरोध' को राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया।
- 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, बंगाल विभाजन के विरोध में चलाए जा रहे स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में फैलाने का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया तथा नरमपंथियों और गरमपंथियों के संयुक्त समझौते के तहत 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य स्वीकार किया गया।
- 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव तथा आंदोलन के दायरे को लेकर हुए तीव्र मतभेद के कारण कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना, जबकि गरमपंथियों की ओर से लाला लाजपत राय या बाल गंगाधर तिलक को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव था।
- 4. सूरत विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हुए गरमपंथी नेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए म्यांमार की मांडले जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 3 और 4 सही हैं, किंतु कथन 2 असत्य है। वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का समर्थन तो किया गया था, लेकिन इस अधिवेशन में 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य स्वीकार नहीं किया गया था; पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव बहुत बाद में वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में पारित हुआ था। कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास और वैचारिक संघर्ष के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, सिक्कों की बनावट तथा भूमि अनुदान (अग्रहार) व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के, जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था, अपनी कलात्मक सुंदरता और शुद्धता में कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों से श्रेष्ठ थे, किंतु गुप्त काल के उत्तरार्ध में जारी सिक्कों में सोने की मिलावट (खोट) बढ़ने लगी थी और व्यापारिक ह्रास के कारण दैनिक लेन-देन में इनका उपयोग कम हो गया था।
2. गुप्त काल में ब्राह्मणों और बौद्ध मंदिरों को दिए जाने वाले भूमि अनुदान 'अग्रहार' कहलाते थे, और इन अनुदानों के साथ-साथ प्राप्तकर्ताओं को प्रशासनिक और न्यायिक अधिकार (जैसे कर वसूलना और अपराधियों को दंडित करना) भी सौंप दिए गए, जिससे सामंती व्यवस्था को बढ़ावा मिला।
3. गुप्त साम्राज्य में तांबे के सिक्कों का प्रचलन बड़े पैमाने पर दैनिक सामान्य बाजार लेन-देन के लिए होता था, और ये तांबे के सिक्के कुषाण काल की तुलना में अत्यंत भारी और बहुतायत में पाए गए हैं, जो सुदृढ़ आंतरिक खुदरा व्यापार का प्रतीक हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक-धार्मिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'राज्य हड़प नीति' के अंतर्गत सतारा, जैतपुर, संबलपुर, उदयपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का विलय भी कुशासन के आधार पर वर्ष 1856 में किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप अवध के सैनिकों, नवाब के आश्रितों और भूस्वामियों में भारी आक्रोश उत्पन्न हुआ।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार होकर कृषि पर आश्रित हो गए, और ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों ने कृषकों को भारी कर के बोझ तले दबाकर ग्रामीण साहूकारों और महाजनों के चंगुल में फंसा दिया।
3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों को अपने पैतृक पूर्वजों की संपत्ति से वंचित करने वाले पुराने कानून को बदल दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और जबरन धर्मांतरण के एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में देखा।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को कम वेतन और विदेशी सेवा भत्ता (Foreign Service Allowance) से वंचित करने की नीति के साथ-साथ वर्ष 1856 के 'सामान्य सेना Enlistment अधिनियम' ने सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं को सीधे तौर पर आहत किया क्योंकि इसके तहत समुद्र पार सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे और विभिन्न राजवंशों के शासनकाल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में सल्तनत की सीमाएं अपने अधिकतम भौगोलिक विस्तार पर थीं, और इसी दौरान साम्राज्य में कृषि सुधारों के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक पृथक् कृषि विभाग की स्थापना की गई थी।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना को नगद वेतन देने की प्रथा शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रणाली को सख्ती से लागू किया, साथ ही उसने बाजार नियंत्रण नीति के तहत खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं के मूल्य कड़ाई से निर्धारित किए थे।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सर्वाधिक संख्या में नहरों का निर्माण करवाया और सिंचाई कर ('हक-ए-शर्ब') लगाया, तथा उसने मध्यकालीन प्रशासनिक परंपरा से हटकर 'जागीरदारी प्रथा' को पूरी तरह समाप्त कर दिया और सभी सैनिकों को केवल नकद वेतन ही देना अनिवार्य कर दिया था।
4. सैयद वंश का संस्थापक खिजर खान था, जिसने मंगोल आक्रमणकारी तैमूर के प्रतिनिधि के रूप में भारत में शासन किया था और उसने सुल्तान की उपाधि धारण न करके 'रयात-ए-आला' की उपाधि से संतुष्ट रहा था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में हुए प्रतिरोध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी का प्रभावी ढंग से संचालन किया था।
2. 'फैजाबाद के मौलवी' के रूप में प्रसिद्ध अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध (जुलाई 1857) में ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस की सेना को पराजित करने में रणनीतिक नेतृत्व प्रदान किया था और उन पर अंग्रेजों द्वारा इनाम घोषित किया गया था।
3. लखनऊ पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के अंतिम चरणों में ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने गोरखा रेजिमेंट की सैन्य सहायता ली थी, और पराजय के उपरांत बेगम हजरत महल ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, जिन्हें बाद में कलकत्ता निर्वासित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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अलाउद्दीन खिलजी ने देवगिरि के राजा रामचंद्र देव को कौन सा जिला जागीर के रूप में दिया था?
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