त्वरित लिंक्स
History of India
19 views
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों, नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष तथा संबंधित ऐतिहासिक सम्मेलनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रारंभिक चरण (1885-1905) में नरमपंथियों का मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था और वे 'प्रार्थना, याचिका और प्रतिवेदन' की पद्धति का अनुसरण करते थे, जबकि गरमपंथियों ने 'स्वदेशी', 'बहिष्कार', 'राष्ट्रीय शिक्षा' और 'निष्क्रिय प्रतिरोध' को राजनीतिक संघर्ष का मुख्य हथियार बनाया।
- 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, बंगाल विभाजन के विरोध में चलाए जा रहे स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में फैलाने का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया तथा नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच आम सहमति से 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य स्वीकार किया गया था।
- 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव तथा आंदोलन के दायरे को लेकर हुए तीव्र मतभेद के कारण कांग्रेस का विभाजन हो गया, जिसमें नरमपंथियों ने रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना, जबकि गरमपंथियों की ओर से लाला लाजपत राय को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव था।
- 4. सूरत विभाजन के पश्चात ब्रिटिश सरकार ने दमनकारी नीतियों का सहारा लेते हुए गरमपंथी नेताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई की, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर छह वर्ष के कारावास के लिए म्यांमार की मांडले जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 3 और 4 सही हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का समर्थन तो किया गया था, परंतु 'पूर्ण स्वराज' का लक्ष्य इस अधिवेशन में स्वीकार नहीं किया गया था; कांग्रेस के मंच से 'पूर्ण स्वराज' का ऐतिहासिक प्रस्ताव बहुत बाद में वर्ष 1929 के लाहौर अधिवेशन में पारित किया गया था। सूरत अधिवेशन 1907 में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच वैचारिक और संगठनात्मक मतभेदों के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हुआ था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
राजस्व विभाग को विजयनगर में किस नाम से जाना जाता था?
→
अकबर के काल में "मीर बख्शी" किस विभाग का प्रधान होता था?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के स्वरूप और उसके मूल्यांकन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश इतिहासकार ने यह मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह विशुद्ध रूप से एक सिपाही विद्रोह (Sepoy Mutiny) था, जिसमें राष्ट्रीयता का अभाव था और यह अंग्रेजों के प्रति नस्लीय घृणा व अंधाधुंध सत्ता प्राप्ति का प्रयास मात्र था'?
→
गुप्तकालीन प्रशासन, राजस्व प्रणाली तथा सामाजिक-आर्थिक स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में केंद्रीय प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी 'कुमारामार्त्य' होता था, जिनकी नियुक्ति राजकुमारों या उच्च कुलीन वर्गों से की जाती थी, तथा इन्हें विभिन्न प्रांतों (देश) या 'विषय' (ज़िलों) के प्रशासन से भी संबद्ध किया जाता था।
2. इस काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग हुआ करती थी, जिसे नकद और वस्तु (अनाज) दोनों रूपों में वसूला जाता था, तथा गुप्त अभिलेखों में भूमि कर के लिए 'उद्रंग' और 'उपरिकर' जैसे शब्दों का उल्लेख मिलता है।
3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्के, जिन्हें 'दीनार' कहा जाता था, कुषाणों के सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्ध और कलात्मक थे, तथा गुप्त काल के उत्तरार्ध में आंतरिक और बाह्य व्यापार में आई मंदी के कारण सोने के सिक्कों की शुद्धता और मात्रा में भारी गिरावट दर्ज की गई।
4. गुप्त काल में 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' व्यवस्था के तहत ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थाओं को कर-मुक्त भूमि दी जाती थी, जिससे स्थानीय स्तर पर सामंती प्रवृत्तियों (Feudalism) का बीजारोपण हुआ और शूद्रों की सामाजिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ बल्कि उनकी दशा और अधिक शोचनीय हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (घोषणा पत्र) के वैधानिक और प्रशासनिक परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के अधीन स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय 'इंडिया काउंसिल' को सौंप दिए गए।
2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतें हड़पने की नीति ('व्यपगत सिद्धांत') का त्याग करती है, देशी राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देती है और भविष्य में भारतीय भू-क्षेत्र का कोई विस्तार नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, प्राचीन परंपराओं का सम्मान करने तथा नस्ल, वर्ण या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर सार्वजनिक सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने का खुला वादा किया।
4. विद्रोह के सफल दमन और प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात काफी घटा दिया और बंगाल सेना में राजपूतों, ब्राह्मणों तथा अवध के सैनिकों की संख्या बढ़ाकर ब्रिटिश रेजिमेंटों को पूरी तरह समाप्त कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.