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History of India
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गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) जैसे क्रांतिकारी संगठनों के वैचारिक विकास, प्रकाशनों और गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' द्वारा निकाले गए साप्ताहिक पत्र 'ग़दर' के प्रत्येक अंक के मुखपृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक छपता था, जिसमें ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के आर्थिक शोषण और अत्याचारों का विवरण होता था।
  2. 2. लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित गदर आंदोलन का मुख्य उद्देश्य केवल वैधानिक सुधार प्राप्त करना था, और उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने की किसी भी योजना का पुरजोर विरोध किया था।
  3. 3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करते हुए इसमें समाजवाद को मुख्य लक्ष्य के रूप में जोड़ा गया और इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया था।
  4. 4. भगत सिंह और भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध लेख 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' (बम का दर्शन) में यह स्पष्ट किया गया था कि हिंसा का आशय केवल अराजकता फैलाना नहीं है, बल्कि यह एक अन्यायपूर्ण व्यवस्था को ध्वस्त कर समतावादी समाज की स्थापना का साधन है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 3 और 4 सही हैं। वर्ष 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा स्थापित ग़दर पार्टी ने अपने पत्र 'ग़दर' के माध्यम से ब्रिटिश शासन के कुकृत्यों को उजागर किया। इसके मुखपृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' छपता था। कथन 2 गलत है क्योंकि गदर पार्टी का उद्देश्य संवैधानिक सुधार नहीं, बल्कि सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था और उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध का लाभ उठाकर सैनिकों में विद्रोह कराने की योजना बनाई थी। कथन 3 और 4 सही हैं; 1928 में फिरोजशाह कोटला में HRA का नाम बदलकर HSRA किया गया तथा भगवती चरण बोहरा द्वारा लिखित 'द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब' में क्रांतिकारी हिंसा के राजनीतिक दर्शन को परिभाषित किया गया था।
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