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History of India
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक संस्थापकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. तत्त्वबोधिनी सभा - देवेंद्रनाथ टैगोर
- 2. सत्यशोधक समाज - ज्योतिराव फुले
- 3. सेवा सदन - गोपाल गणेश आगरकर
- 4.
देव समाज - शिव नारायण अग्निहोत्री उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है: देवेंद्रनाथ टैगोर ने 1839 में 'तत्वबोधिनी सभा' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य उपनिषदों के विचारों का प्रचार करना और ब्रह्म समाज से जुड़ना था। युग्म 2 सही है: ज्योतिराव फुले ने 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना की जिसका मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को वैचारिक रूप से स्वतंत्र कराना और शोषण से मुक्त करना था। युग्म 3 गलत है: 'सेवा सदन' की स्थापना मुंबई में 1908 में बहरामजी एम. मालाबारी और उनके मित्र दयाराम गिदूमल द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए की गई थी (गोपाल गणेश आगरकर ने 'सुधारक' अखबार निकाला था)। युग्म 4 सही है: शिव नारायण अग्निहोत्री ने 1887 में लाहौर में 'देव समाज' की स्थापना की थी जो नैतिक और आध्यात्मिक सुधार पर केंद्रित था। इस काल के आंदोलनों के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दानापुर - 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के सिपाहियों द्वारा विद्रोह और आरा की ओर कूच
2. आरा - बाबू वीर कुंवर सिंह द्वारा ब्रिटिश सेना के विरुद्ध कैप्टन डनबर की सेना को पराजित करना
3. मुजफ्फरपुर - विद्रोही सिपाहियों द्वारा यूरोपीय अधिकारियों की हत्या और जुब्बारा सिंह द्वारा नेतृत्व
4. पटना - पीर अली खां (पुस्तक विक्रेता) के नेतृत्व में 3 जुलाई 1857 को अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह का आयोजन
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को पढ़ी गई 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और कंपनी के 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार ब्रिटेन में नवनिर्मित 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिए गए।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भविष्य में किसी भी भारतीय रियासत का विलय नहीं करेगी (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स की समाप्ति) और देशी राजाओं के साथ की गई संधियों का पूर्ण सम्मान किया जाएगा।
3. घोषणा पत्र में यह प्रावधान किया गया कि सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के समय भारतीयों के साथ उनकी नस्ल, धर्म, रंग या जन्मस्थान के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी योग्य भारतीयों को उनकी क्षमता के अनुसार उच्च पदों पर अवसर दिया जाएगा।
4. इस अधिनियम द्वारा गवर्नर-जनरल के पद को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया और उसके स्थान पर सीधे ब्रिटिश मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य को 'भारत का सम्राट' (Emperor of India) घोषित कर दिया गया, जो सभी प्रशासनिक नीतियों का सर्वोच्च संचालक था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर के दरबार में "दीवान-ए-तन" का मुख्य कार्य क्या था?
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प्राचीन भारतीय इतिहास में महाजनपद काल और मगध साम्राज्य के उत्कर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगुत्तर निकाय और जैन ग्रंथ 'भगवती सूत्र' में सोलह महाजनपदों की जो सूचियाँ मिलती हैं, उनमें कंबोज और गांधार ऐसे महाजनपद थे जो उत्तर-पथ के अंतर्गत आते थे तथा वहाँ उत्तरापथ व्यापार मार्ग का नियंत्रण होने के कारण उनका विशेष आर्थिक और सामरिक महत्व था।
2. मगध साम्राज्य के प्रारंभिक उत्कर्ष में इसकी भौगोलिक स्थिति का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था; इसकी प्रारंभिक राजधानी गिरिव्रज (राजगृह) पाँच पहाड़ियों से घिरी एक प्राकृतिक रूप से सुरक्षित घाटी थी, जबकि बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा, सोन और गंडक जैसी प्रमुख नदियों के जलमार्गों के माध्यम से संपूर्ण मध्य गंगा घाटी पर सामरिक नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम हो गया।
3. हर्यंक वंश के शासक बिम्बिसार ने अपनी साम्राज्यवादी और विस्तारवादी महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति के साथ-साथ अवध के राजा चंड प्रद्योत के साथ आक्रामक सैन्य संघर्ष की नीति अपनाई और अंततः अवध को पूर्ण रूप से मगध में मिला लिया था।
4. महापद्मनंद, जिसे पुराणों में 'सर्वक्षत्र्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकक्षत्र' कहा गया है, ने नंद वंश की नींव रखते हुए न केवल कलिंग और अस्मक जैसे क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, बल्कि क्षत्रियों की राजनीतिक शक्ति का पूर्ण दमन कर मगध को एक विशाल साम्राज्य में परिवर्तित कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बाजीराव प्रथम ने बुंदेलखंड के किस राजा की सहायता मोहम्मद खाँ बंगश के विरुद्ध की थी?
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