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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उषा मेहता ने गुप्त 'कांग्रेस रेडियो' का संचालन किया था, जिसके माध्यम से नियमित रूप से स्वतंत्रता आंदोलन के समाचार प्रसारित किए जाते थे।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में ब्रिटिश नजरबंदी से छिपकर भागने के बाद जर्मनी में 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की थी और वहीं से पहली बार उन्होंने जर्मनी के रेडियो से महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर संबोधित किया था।
- 3. आज़ाद हिंद फौज (INA) की स्थापना का मूल विचार सबसे पहले मोहन सिंह के मन में आया था, और उन्होंने जापान द्वारा युद्ध में बंदी बनाए गए भारतीय सैनिकों को लेकर इस सेना के गठन की रूपरेखा तैयार की थी।
- 4. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा आज़ाद हिंद सरकार (अरग हुकुमत-ए-आजाद हिंद) के गठन के पश्चात सुभाष चंद्र बोस को इसका सर्वोच्च सेनापति (Supreme Commander) और प्रधानमंत्री बनाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उषा मेहता ने गुप्त कांग्रेस रेडियो के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में बर्लिन (जर्मनी) पहुँचकर 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और वहीं से आज़ाद हिंद रेडियो के माध्यम से गांधी जी को 'राष्ट्रपिता' कहा था। आज़ाद हिंद फौज (INA) की प्रारंभिक संकल्पना कैप्टन मोहन सिंह के मस्तिष्क की उपज थी। इसके पश्चात रास बिहारी बोस के प्रयासों से इसका पुनर्गठन हुआ और सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' की स्थापना कर सुभाष चंद्र बोस इसके सर्वोच्च नेता बने। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) प्रणाली को लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया और कुल लगaन का 10/11 भाग ब्रिटिश सरकार को तथा 1/1 भाग जमींदारों को अपने प्रशासनिक व्यय के लिए रखने की अनुमति दी गई।
2. रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसी में लागू की गई थी, जहाँ किसानों (रयतों) को भूमि का मालिक माना गया और सरकार के साथ उनका सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह स्थाई थीं और कभी संशोधित नहीं की जाती थीं।
3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल) को इकाई माना गया और सामूहिक रूप से गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व चुकाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।
4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारत का पारंपरिक कृषि ढांचा छिन्न-भिन्न हो गया, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक कर का बोझ बढ़ा, और कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण होने के बावजूद किसानों की क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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