BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
15 views

वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूकों के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल को शामिल किए जाने के निर्णय के बाद यह अफवाह फैली कि कारतूस के खोल पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप लगाया गया है, जिसे बंदूक में लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था।
  2. 2. इस घटना की शुरुआत सर्वप्रथम जनवरी 1857 में बंगाल की दमदम छावनी में तैनात भारतीय सैनिकों द्वारा आधिकारिक रूप से इन कारतूसों के प्रयोग के पूर्ण बहिष्कार के साथ हुई थी।
  3. 3. बैरकपुर छावनी की 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरोध में तथा ब्रिटिश अधिकारियों के दबाव के खिलाफ विद्रोह करते हुए अपने सहायक सार्जेंट ह्यूसन और लेफ्टिनेंट बॉग पर आक्रमण कर उनकी हत्या कर दी थी।
  4. 4. इस घटना के परिणाम स्वरूप मंगल पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया और सैन्य अदालत के फैसले के बाद 8 अप्रैल 1857 को उन्हें बैरकपुर में फांसी दे दी गई थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण सेना में नई 'एनफील्ड' राइफल का引入 था। जनवरी 1857 में दमदम और बैरकपुर छावनियों में यह बात फैल गई कि नए कारतूसों के आवरण पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप है, जिसे दांतों से काटना पड़ता था। बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही विकिपीडिया संदर्भ मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को इस आदेश का कड़ा विरोध किया और अंग्रेजी अधिकारियों पर गोली चलाई। इस घटना के बाद उन पर मुकदमा चलाकर 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई। कथन 2 गलत है क्योंकि दमदम छावनी में केवल अफवाह फैली थी, जबकि औपचारिक और व्यापक विरोध की शुरुआत बैरकपुर से हुई थी।
Share:

Related Questions

→ 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में बाबू कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बाबू कुंवर सिंह ने दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के शाहबाद पहुँचने से पूर्व ही ब्रिटिश खजाने पर अधिकार कर लिया था तथा आरा की लड़ाई में मेजर आयर की सेना को पराजित करने के पश्चात अपनी अंतरिम सरकार की स्थापना की थी। 2. ब्रिटिश सेनापति कैप्टन डनबर की संयुक्त सैन्य टुकड़ी को बाबू कुंवर सिंह ने जंगल-युद्ध और छापामार रणनीति अपनाकर बुरी तरह पराजित किया था, जिसमें कैप्टन डनबर स्वयं मारा गया था। 3. बाबू कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध कैमूर की पहाड़ियों से सशस्त्र संघर्ष जारी रखा और गुरिल्ला युद्ध प्रणाली के माध्यम से ब्रिटिश प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। 4. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे समानांतर प्रशासन को कुचलने के लिए ब्रिटिश सरकार ने बिहार में मार्शल लॉ को और अधिक कठोर कर दिया था, किंतु अमर सिंह को कभी भी ब्रिटिश सेना द्वारा गिरफ्तार नहीं किया जा सका था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सत्ता को पुन: स्थापित करने और विद्रोह का दमन करने वाले प्रमुख ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली — जॉन निकलसन 2. लखनऊ — सर कॉलिन कैंपबेल 3. झांसी और ग्वालियर — मेजर जनरल हैवलॉक 4. बनारस और इलाहाबाद — कर्नल जेम्स नील उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → इब्राहिम लोदी और मेवाड़ के राणा सांगा के बीच 1517-18 ई. में कौन सा युद्ध हुआ था? → वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिल्ली में विद्रोह के नेतृत्व, प्रतीकात्मक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका तथा प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मई 1857 के मध्य में मेरठ के विद्रोही सिपाहियों के दिल्ली पहुँचने के बाद वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने इस नेतृत्व को तुरंत स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया था और वे शुरू से ही इस विद्रोह के राजनीतिक और सैन्य संचालन के लिए पूरी तरह तत्पर थे। 2. दिल्ली में विद्रोह की वास्तविक सैन्य कमान और प्रशासनिक नियंत्रण जनरल बख्त खान के हाथों में था, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व कर रहे थे और उन्होंने प्रशासनिक मामलों के संचालन के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया था। 3. ब्रिटिश सेनापति जॉन निकलसन और हडसन के नेतृत्व में सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के लिए ब्रिटिश सेना ने कड़ा संघर्ष किया, जिसके दौरान निकलसन गंभीर रूप से घायल हो गए और मारे गए, जबकि जफर को हुमायूँ के मकबरे से गिरफ्तार किया गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के सत्य का निर्धारण अनेक दृष्टिकोन (सप्तभंगी नय) से किया जाता है, जबकि बौद्ध धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के सिद्धांत के माध्यम से प्रत्येक घटना के उत्पन्न होने का कारण उसके पूर्ववर्ती कारणों को मानता है। 2. बौद्ध धर्म के प्रारंभिक संघ में महिलाओं के प्रवेश का गौतम बुद्ध ने शुरुआत में कड़ा विरोध किया था, किंतु अपनी दत्तक माता महाप्रजापति गौतमी के विशेष अनुरोध पर आनंद के आग्रह पर उन्होंने वैशाली में महिलाओं को संघ में प्रवेश की अनुमति प्रदान की थी। 3. जैन धर्म में 'संलेखना' (या संथारा) विधि द्वारा उपवास के माध्यम से प्राण त्यागने की प्रथा को मोक्ष प्राप्ति का साधन माना गया है, जिसके ऐतिहासिक प्रमाण के अनुसार मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने श्रवणबेलगोला में इसी विधि से अपने प्राण त्यागे थे। 4. हीनयान बौद्ध धर्म के अंतर्गत 'बोधिसत्वों' की संकल्पना का उदय हुआ, जिसमें वे अपने व्यक्तिगत निर्वाण को प्राप्त करने के बाद भी संसार के अन्य जीवों के उद्धार के लिए कार्य करते हैं, और भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रेय' की कल्पना की गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.