BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
24 views

मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में राज्य के सात अंगों (सप्तांग सिद्धांत) का वर्णन है, जिसमें 'स्वामी' (राजा) को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और केंद्रीय सचिवालय के प्रशासनिक अधिकारियों को 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहा जाता था जिनकी कुल संख्या अठारह थी।
  2. 2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन की इकाइयों को 'चक्र' कहा जाता था, जो प्रायः राजकुमारों (कुमार या आर्यपुत्र) के अधीन होते थे, जबकि सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई 'ग्राम' थी जिसका मुखिया 'ग्रामिक' कहलाता था जो पूर्णतः शाही अधिकारियों के नियंत्रण से मुक्त और स्वतंत्र इकाई था।
  3. 3. मौर्य काल में व्यापार और वाणिज्य के नियमन के लिए राज्य द्वारा कड़े नियंत्रण रखे जाते थे, जिसके तहत माप-तौल के अध्यक्ष को 'पोतवाध्यक्ष' और वैश्य वर्ग से एकत्रित किए जाने वाले करों के अतिरिक्त बंदरगाहों एवं समुद्री व्यापार के नियंत्रण के लिए 'पतनध्यक्ष' नामक अधिकारी नियुक्त होता था।
  4. 4. अशोक के लघु शिलालेखों और स्तंभ लेखों में न्याय व्यवस्था का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार साम्राज्य में 'धर्मस्थीय' (दीवानी) और 'कंटकशोधन' (फौजदारी) नामक दो प्रकार के न्यायालयों का प्रचलन था, और न्यायाधीशों को 'रज्जुक' कहा जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में सप्तांग सिद्धांत का वर्णन है और सर्वोच्च केंद्रीय अधिकारियों को 'तीर्थ' या 'महामात्र' कहा जाता था, जिनकी संख्या अठारह थी। कथन 2 गलत है क्योंकि 'ग्राम' की प्रशासनिक इकाई का मुखिया 'ग्रामिक' जरूर होता था, लेकिन वह पूरी तरह स्वतंत्र नहीं था बल्कि वह सरकारी तंत्र और उच्च अधिकारियों के नियंत्रण के अधीन कार्य करता था। कथन 3 सही है, मौर्य काल में 'पोतवाध्यक्ष' माप-तौल का अधिकारी और 'पतनध्यक्ष' बंदरगाहों का अध्यक्ष होता था। कथन 4 गलत है क्योंकि न्यायलयों (धर्मस्थीय और कंटकशोधन) का उल्लेख अर्थशास्त्र में मिलता है, लेकिन अशोक के अभिलेखों में न्याय और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के रूप में 'रज्जुक' का विशेष उल्लेख है जिन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में भू-सर्वेक्षण और न्यायिक अधिकार प्राप्त थे, किंतु रज्जुक अकेले संपूर्ण न्यायाधीशों के पर्याय नहीं थे। मौर्य साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वर्ष 1857 के विद्रोह के संबंध में विभिन्न इतिहासकारों और विचारकों के प्रसिद्ध कथनों/मतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. "यह तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।" — आर.सी. मजूमदार 2. "यह स्वतंत्रता के लिए एक सुनियोजित राष्ट्रीय युद्ध था, जिसे राष्ट्रीय स्वतंत्रता का प्रथम युद्ध कहा जा सकता है।" — वी.डी. सावरकर 3. "यह केवल एक सिपाही विद्रोह था, जो चर्बी वाले कारतूसों की अफवाह से उपजा एक आकस्मिक और असंगठित सैन्य असंतोष मात्र था।" — सर जॉन सीले 4. "यह धर्म का युद्ध था, जो बर्बरता और सभ्यता के बीच या क्रूरता और स्वतंत्रता के बीच संघर्ष था।" — टी.आर. होम्स उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के नवीन पद का सृजन किया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया। 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद के दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) के माध्यम से भविष्य में ब्रिटिश भारत में किसी भी प्रकार के नए क्षेत्र विस्तार की नीति को औपचारिक रूप से त्यागने का आश्वासन दिया गया। 3. इस घोषणा में भारतीय रियासतों के शासकों को गोद लेने के अधिकार (दत्तक पुत्र की अनुमति) को मान्यता दी गई और यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय जनता के धार्मिक, सामाजिक विश्वासों तथा प्राचीन परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह के दमन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. दिल्ली - जॉन निकलसन 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और जेम्स आउट्राम 3. कानपुर - मेजर जनरल हैवलॉक 4. झांसी और ग्वालियर - ह्यूरोज उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं? → 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति ने सतारा, नागपुर और झाँसी जैसी रियासत्यों के साथ-साथ अवध के अधिग्रहण को भी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया, क्योंकि अवध का विलय कुशासन के आरोप में किया गया था जिससे वहाँ के सैनिकों और पारंपरिक अभिजात वर्ग में गहरा असंतोष फैल गया। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अशक्तता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से वंचित करने के पुराने हिंदू कानून को बदल दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर उनका धर्म परिवर्तन कराना चाहती है। 3. आर्थिक कारणों के तहत ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के वि-औद्योगीकरण (De-industrialisation) ने पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, तथा किसानों पर अत्यधिक करों के बोझ ने उन्हें महाजनों के शिकंजे में फँसा दिया, जिससे समाज का हर वर्ग त्रस्त था। 4. सैन्य कारणों में वर्ष 1856 में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पारित 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने भारतीय सिपाहियों के लिए समुद्र पार (काला पानी) जाकर सेवा करना अनिवार्य कर दिया, जिसे तत्कालीन पारंपरिक समाज में जाति और धर्मभ्रष्ट होने का प्रतीक माना गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय से पूर्व ब्रिटिश शासन की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक-धार्मिक नीतियों के प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का विलय केवल राजनीतिक विस्तार था, जिसका स्थानीय किसानों और शिल्पकारों की आजीविका पर कोई प्रत्यक्ष प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा था। 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (विशेषकर मुक्त व्यापार और औद्योगिक क्रांति के प्रभाव) के कारण पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का तीव्र पतन हुआ, जिससे बड़ी संख्या में कारीगर और दस्तकार बेरोजगार होकर कृषि पर निर्भर होने के लिए बाध्य हो गए। 3. वर्ष 1850 का 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act), जिसके तहत पैतृक संपत्ति में उत्तराधिकार के लिए ईसाई धर्म अपनाने की अनिवार्यता को समाप्त कर रूढ़िवादी हिंदू समाज में यह आशंका उत्पन्न कर दिया गया कि ब्रिटिश सरकार धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहित कर रही है। 4. सेना के भीतर लागू 'सामान्य सेवा उपनियम अधिनियम' (General Service Enlistment Act, 1856) के तहत भारतीय सिपाहियों के लिए समुद्र पार (काला पानी) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया, जिससे तत्कालीन रूढ़िवादी सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं और जातियों की पवित्रता को ठेस पहुँची। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.