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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक जीवन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस सभ्यता की अधिकांश बस्तियाँ ग्रिड प्रणाली (Grid System) पर आधारित थीं, जहाँ मुख्य सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं और बस्तियों में पक्की ईंटों के साथ-साथ जल निकासी (Drainage System) की उत्कृष्ट भूमिगत व्यवस्था पाई गई है।
- 2. लोथल, चान्हूदरो और बालाकोट जैसे स्थल मनके (Beads) बनाने के प्रमुख उद्योग केंद्र थे, और लोथल में स्थित गोदीडवाड़ा (Dockyard) से यह स्पष्ट होता है कि इस सभ्यता के लोग मेसोपोटामिया और फारस की खाड़ी के साथ समुद्री व्यापार करते थे।
- 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपतिनाथ' मुहर पर शिव का प्रामाणिक और त्रिमुखी रूप अंकित है, जिसके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा तथा पैरों के पास दो हिरण उत्कीर्ण हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यहाँ पशुपति शिव की पूजा का प्रचलन था।
- 4. सिंधु घाटी सभ्यता के किसी भी स्थल से मंदिर या किसी स्पष्ट धार्मिक पूजा-गृह के अवशेष नहीं मिले हैं, जो यह दर्शाता है कि यहाँ का शासन और समाज मुख्य रूप से पुरोहित वर्ग या धर्मतंत्र (Theocracy) के बजाय व्यापारियों और धर्मनिरपेक्ष ताकतों के हाथों में था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है। मोहनजोदड़ो से प्राप्त पशुपति मुहर पर त्रिमुखी देवता का अंकन है जिसे जॉन मार्शल ने 'आद्य-शिव' (Proto-Shiva) कहा था, परंतु इसे सीधे तौर पर 'शिव का प्रामाणिक और त्रिमुखी रूप' कहना इतिहास की दृष्टि से पूरी तरह अतिशयोक्तिपूर्ण होगा क्योंकि यह केवल एक अनुमान है। सिंधु सभ्यता अपनी नगर नियोजन, उन्नत जल निकासी प्रणाली और व्यापारिक गतिविधियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस महान सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर महात्मा गांधी जब बिहार पहुँचे, तब यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू की जाने वाली 'तीनकथा प्रणाली' (जहाँ कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध एक तीव्र कानूनी और जन आंदोलन चलाया गया, जिसके दबाव में सरकार को 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act) पारित करना पड़ा।
2. खेड़ा सत्याग्रह (गुजरात) के दौरान फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली माफ न किए जाने पर महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को लगान न देने का 'no-rent campaign' (कर नहीं आंदोलन) चलाने का सफल नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का आदेश दिया जो भुगतान करने में सक्षम थे।
3. वर्ष 1918 में ही अहमदाबाद मिल हड़ताल के दौरान महात्मा गांधी ने पहली बार भारत में सुनियोजित रूप से भूख हड़ताल (Hunger Strike) का अस्त्र प्रयोग किया, जिसका कारण मिल मालिकों द्वारा 'प्लेग बोनस' (Plague Bonus) को समाप्त करना और मजदूरों की माँगों को ठुकरा देना था।
4. चंपारण सत्याग्रह के तुरंत बाद ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित 'चंपारण जाँच समिति' (Champaran Agrarian Committee) में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, और इस समिति की सर्वसम्मत रिपोर्ट के आधार पर अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को वापस लौटाने का प्रावधान किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए स्थायी और नकद वेतन प्रणाली की शुरुआत की तथा घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रथा को सख्ती से लागू किया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर में वृद्धि की, जो अकाल और कुप्रबंधन के कारण असफल रही, तथा इसी काल में चीन की कागजी मुद्रा से प्रेरित होकर 'प्रतीक मुद्रा' (Token Currency) के रूप में तांबे और कांसे के सिक्के चलाए गए।
3. फिरोजशाह तुगलक ने इक्तादारी व्यवस्था को वंशानुगत बना दिया तथा राजस्व सुधारों के तहत 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) नामक एक नया कर लगाया, जो शरियत द्वारा मान्यता प्राप्त सिंचाई स्रोतों से पानी लेने पर किसानों से वसूला जाता था।
4. सल्तनत काल में कृषि भूमि के वर्गीकरण के तहत 'महतत' और 'खालसा' भूमि सीधे केंद्रीय नियंत्रण में आती थी, जहाँ से प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग सीधे सुल्तान के व्यक्तिगत खर्चों और शाही दरबार के रख-रखाव के लिए किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में ₹3,000 वार्षिक कर के बदले बिना किसी अतिरिक्त चुंगी के व्यापार करने का विशेष अधिकार (दस्तक) प्राप्त हुआ, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार पर भी दुरुपयोग करना शुरू कर दिया था।
2. बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए कहा था कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी और यदि छेड़ा जाए तो वे काटकर मार डालेंगी।
3. वर्ष 1757 के प्लासी के युद्ध में सिराजुद्दोला की पराजय का मुख्य कारण मीर जाफर, यार लतीफ और राय दुर्लभ जैसे सैन्य कमांडरों की गद्दारी थी, जिसके फलस्वरूप अंग्रेजों ने मीर जाफर को बंगाल का नया नवाब बनाया और इस युद्ध के बाद ही भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की वास्तविक नींव पड़ी।
4. ब्लैक होल त्रासदी (काल कोठरी की घटना) के तुरंत बाद रॉबर्ट क्लाइव और वाटसन ने नवाब सिराजुद्दोला के साथ 'अलीनगर की संधि' पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत अंग्रेजों को कलकत्ता की किलेबंदी करने, अपने सिक्के ढालने और युद्ध की क्षतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार मिल गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह को दबाए जाने वाले प्रमुख क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जॉन निकलसन — दिल्ली (विद्रोह का दमन करते हुए वीरगति को प्राप्त)
2. सर कॉलिन कैंपबेल — लखनऊ और कानपुर
3. मेजर जनरल ह्यूरोज — झाँसी और ग्वालियर
4. जेम्स आउट्राम — रोहिलखंड और बरेली
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, बौद्ध धर्म और जैन धर्म की दार्शनिक मान्यताओं तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के मध्यम प्रतिपदा (अष्टांगिक मार्ग) और जैन धर्म के त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) दोनों ही वेदों की सर्वोच्चता और यज्ञीय कर्मकांडों को आंशिक रूप से मान्यता देते हैं।
2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर का अंत करना या संथारा (सलेखना) पद्धति द्वारा प्राण त्यागना एक मान्य आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जबकि बौद्ध धर्म में अतिवादी कायाक्लेश या अत्यधिक आत्म-दमन के मार्ग को वर्जित किया गया है।
3. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष निर्धारित की गई थी, जबकि जैन संघ (निर्ग्रंथ) में भिक्षु बनने के लिए राजा या माता-पिता की अनुमति के बिना भी किसी भी व्यक्ति को सीधे प्रवेश मिल जाता था।
4. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' (स्यादवाद) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि सत्य के अनेक पहलू होते हैं और कोई भी एक दृष्टिकोण संपूर्ण सत्य को व्यक्त नहीं कर सकता, जो बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' सिद्धांत से भिन्न है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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