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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रम और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मेरठ से आने वाले विद्रोही सिपाहियों ने 11 मई 1857 को दिल्ली पहुंचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, भारत का 'शहंशाह-ए-हिन्द' (सम्राट) घोषित कर दिया था, जिससे इस क्षेत्रीय असंतोष को अखिल भारतीय राष्ट्रीय स्वरूप का आभास मिला।
- 2. यद्यपि जफर को प्रतीकात्मक रूप से सर्वोच्च नेता बना दिया गया था, किंतु वास्तविक सैन्य निर्णय लेने और प्रशासन चलाने की संपूर्ण शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के हाथों में थी, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल थे।
- 3. बरेली से आए बख्त खान ने दिल्ली में विद्रोही सेना की कमान संभाली और उन्होंने सम्राट तथा सैनिकों के बीच प्रशासनिक एवं वित्तीय समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, तथा अंग्रेजों द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार करने के पश्चात उन्हें अंग्रेजों ने फांसी पर लटका दिया था।
- 4. दिल्ली पर ब्रिटिश सेना द्वारा पुनः अधिकार करने के उपरांत जनरल जॉन निकोलसन की इस संघर्ष में मृत्यु हो गई थी, तथा बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया था जहाँ वर्ष 1862 में उनकी मृत्यु हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान दिल्ली का पतन और मुगल सम्राट विकिपीडिया संदर्भ की भूमिका भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पर कब्जा करने के बाद बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से विद्रोह का प्रतीक बनाया गया। सैन्य नेतृत्व 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' के पास था। बख्त खान ने सैन्य कमान संभाली थी, परंतु दिल्ली पतन के बाद वे लखनऊ की ओर निकल गए थे और नेपाल की तराई में उनकी मृत्यु हुई (उन्हें अंग्रेजों द्वारा फांसी नहीं दी गई थी, अतः कथन 3 गलत है)। जॉन निकोलसन दिल्ली की घेराबंदी के दौरान मारे गए थे और जफर को रंगून निर्वासित किया गया, जहाँ 1862 में उनका निधन हुआ।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (जैसे दानापुर, पटना, आरा और मुजफ्फरपुर) में हुई गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 25 जुलाई 1857 को पीर अली खाં के नेतृत्व में एक सशक्त विद्रोह का आयोजन किया गया था, जिसमें ब्रिटिश अफीम एजेंट डॉ. लायेल मारा गया था, और बाद में अंग्रेजों द्वारा पीर अली को सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार कर जगदीशपुर के बाबू कुंवर सिंह से जा मिले थे।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोहियों ने ब्रिटिश संचार व्यवस्था और सरकारी खजाने को निशाना बनाया था, तथा मुजफ्फरपुर में तैनात यूरोपीय अधिकारियों पर स्थानीय सैनिकों ने आक्रमण कर दिया था।
4. कमिश्नर विलियम टेलर ने पटना के संकटपूर्ण समय में अत्यधिक उदारवादी नीति अपनाते हुए मुस्लिम मौलवी अहमदुल्लाह, वाहिद उल हक और मोहम्मद हुसैन को सम्मानित किया था और विद्रोहियों के दमन से पूरी तरह परहेज किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के शुरुआती चरणों (नरम दल काल) तथा बाद में उत्पन्न हुए वैचारिक मतभेदों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक नरमपंथियों (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) की कार्यपद्धति '3P' यानी प्रार्थना (Prayer), याचिका (Petition) और प्रोटेस्ट (Protest) पर आधारित थी, तथा उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले की अध्यक्षता में ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार के प्रस्ताव को बंगाल तक ही सीमित रखने का निर्णय लिया गया, जिससे गरम दल के नेता अत्यधिक असंतुष्ट हुए।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच हुए तीव्र वैचारिक संघर्ष के कारण कांग्रेस का औपचारिक विभाजन हो गया और रास बिहारी बोस को अध्यक्ष चुना गया।
4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन में ए.वी. ह्यूम के विशेष प्रयासों से कांग्रेस के दोनों धड़ों और मुस्लिम लीग के बीच ऐतिहासिक समझौता संपन्न हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और असहयोग आंदोलन (1920-22) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर महात्मा गांधी जब बिहार पहुँचे, तब यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर लागू की जाने वाली 'तीनकथा प्रणाली' (जहाँ कुल भूमि के 3/20 भाग पर नील की खेती करना अनिवार्य था) के विरुद्ध एक तीव्र कानूनी और जन आंदोलन चलाया गया, जिसके दबाव में सरकार को 'चंपारण कृषि अधिनियम' (Champaran Agrarian Act) पारित करना पड़ा।
2. चंपारण जाँच समिति (Champaran Agrarian Committee) में महात्मा गांधी को भी एक सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, और इस समिति की सर्वसम्मत रिपोर्ट के आधार पर अवैध रूप से वसूले गए धन का 50 प्रतिशत हिस्सा किसानों को वापस लौटाने का प्रावधान किया गया था।
3. वर्ष 1920 में नागपुर के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का समर्थन चित्तरंजन दास (C.R. Das) द्वारा किया गया था, जबकि इसके मूल प्रस्ताव को कलकत्ता के विशेष अधिवेशन में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में अनुमोदित किया गया था।
4. असहयोग आंदोलन के दौरान स्थापित 'काशी विद्यापीठ' और 'जामिया मिलिया इस्लामिया' जैसे राष्ट्रीय शिक्षण संस्थानों के पहले कुलपतियों के रूप में क्रमशः महात्मा गांधी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ने कार्यभार संभाला था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गाँव के दस्तावेजों और लेखों का रखरखाव करने वाला अधिकारी कौन होता था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश नीतियों में हुए संरचनात्मक परिवर्तनों तथा भारत सरकार अधिनियम 1858 और क्वीन विक्टोरिया की घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन विधिवत समाप्त कर दिया गया और भारत का प्रत्यक्ष नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, जिसके तहत 'भारत के गवर्नर-जनरल' को 'वाइसराय' की अतिरिक्त उपाधि प्रदान की गई और लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वाइसराय बने।
2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा में भारतीय रियाسतों के भविष्य में विलय की नीति का पूर्ण परित्याग करने का आश्वासन दिया गया तथा भारतीय राजाओं के 'दत्तक पुत्र' लेने के अधिकारों को मान्यता प्रदान की गई।
3. घोषणा पत्र और अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, भारत के राज्य सचिव (Secretary of State for India) और उसकी 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का संपूर्ण वित्तीय व्यय और वेतन सीधे तौर पर ब्रिटेन के राजकोष (British Exchequer) से वहन किए जाने का प्रावधान किया गया, ताकि भारतीय राजस्व पर से वित्तीय बोझ कम किया जा सके।
4. इस अधिनियम और तदुपरांत हुए सैन्य पुनर्गठन (पील आयोग की सिफारिशों के आधार पर) के तहत सेना में यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ा दिया गया, तोपखाने पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण में रखे गए, और 'फूट डालो और राज करो' की नीति को सुदृढ़ करने के लिए रेजिमेंटों में विभिन्न जातियों और क्षेत्रों के सैनिकों का सम्मिश्रण किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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