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History of India
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विभिन्न विभागों की स्थापना के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. दीवान-ए-आरिज - सैन्य विभाग (इसकी स्थापना बलबन द्वारा सेना को मजबूत करने और राज्य की रक्षा के लिए की गई थी)
- 2. दीवान-ए-कोही - कृषि विभाग (इसकी स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा दोआब क्षेत्र में कृषि सुधारों के लिए की गई थी)
- 3. दीवान-ए-बदगान - दासों का विभाग (इसकी स्थापना फिरोजशाह तुगलक द्वारा सल्तनत काल में दासों की देखभाल के लिए की गई थी)
- 4.
दीवान-ए-मुस्तखराज - दान विभाग (इसकी स्थापना जलालुद्दीन खिलजी द्वारा अनाथों और गरीबों को वित्तीय सहायता देने के लिए की गई थी) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
युग्म 1 सही है क्योंकि बलबन ने मंगोल आक्रमणकारियों का मुकाबला करने और आंतरिक विद्रोहों को दबाने के लिए सैन्य विभाग 'दीवान-ए-आरिज' की स्थापना की थी। युग्म 2 सही है क्योंकि मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब में कृषि को बढ़ावा देने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक पृथक् कृषि विभाग बनाया था। युग्म 3 सही है क्योंकि फिरोजशाह तुगलक दासों का बहुत शौकीन था और उसने उनके कल्याण के लिए 'दीवान-ए-बदगान' की स्थापना की थी। युग्म 4 गलत है क्योंकि 'दीवान-ए-मुस्तखराज' की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा राजस्व बकाये की वसूली और भ्रष्टाचार रोकने के लिए की गई थी, न कि दान विभाग के रूप में (दान के लिए 'दीवान-ए-खैरात' था)। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन और प्रमुख संगठनों (विशेषकर गदर पार्टी, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन और चटगांव शस्त्रागार लूट) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भखना द्वारा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'ग़दर दी गूँज' नामक साप्ताहिक पत्र के माध्यम से औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध वैचारिक और सशस्त्र संघर्ष का संदेश फैलाया, जिसका मुख्य मुखपत्र 'द गदर' उर्दू और गुरुमुखी के अलावा गुजराती और पश्तो में भी प्रकाशित होता था।
2. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) ने समाजवाद को अपने घोषणापत्र का मुख्य आधार बनाया और भगत सिंह के आग्रह पर इसमें 'सोशलिस्ट' शब्द जोड़ा गया।
3. अप्रैल 1930 में सूर्य सेन (मास्टर दा) के नेतृत्व में 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' (चटगांव शाखा) द्वारा किए गए चटगांव शस्त्रागार आक्रमण में भाग लेने वाली क्रांतिकारी महिलाओं में प्रीतिलता वाडेदार और कल्पना दत्त प्रमुख थीं, जिन्होंने शस्त्रागार पर कब्जा करने के बाद अस्थायी क्रांतिकारी सरकार की घोषणा की थी।
4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधानसभा में फेंके गए बमों का मुख्य उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि 'बहरेकानों को अपनी बात सुनाना' तथा ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसे दमनकारी कानूनों के विरोध में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना था, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने गिरफ्तारी भी स्वेच्छा से दी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में, सत्यशोधक समाज, देव समाज और धर्म सभा जैसी संस्थाओं के वैचारिक दृष्टिकोण एवं संस्थापकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य शूद्रों और अतिशूद्रों को ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और पुरोहिती शोषण से मुक्त कराना था, तथा इस संगठन ने अपनी मुखपत्र 'गुलामगिरी' के माध्यम से समाज के वंचित वर्गों में अधिकारों की चेतना जगाई।
2. वर्ष 1887 में लाहौर में शिव नारायण अग्निहोत्री द्वारा स्थापित 'देव समाज' का मूल बल आत्मा की अमरता, गुरु की सर्वोच्चता और उच्च नैतिक आचरण पर था, तथा इसने मांसाहार, मद्यपान और रिश्वतखोरी जैसी बुराइयों का कड़ा विरोध किया।
3. राधाकांत देव द्वारा वर्ष 1830 में स्थापित 'धर्म सभा' एक रूढ़िवादी संस्था थी, जिसने राजा राममोहन राय द्वारा ब्रह्म समाज के माध्यम से सती प्रथा के उन्मूलन के लिए चलाए गए सुधारों का समर्थन किया था, किंतु आधुनिक पश्चिमी शिक्षा के प्रसार का पुरजोर विरोध किया था।
4. गोपाल गणेश आगरकर और महादेव गोविंद रानाडे द्वारा स्थापित 'डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी' ने महाराष्ट्र में शिक्षा के प्रसार और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में कार्य किया, तथा आगरकर ने 'सुधारक' पत्र के माध्यम से सामाजिक रूढ़िवादिता और धार्मिक अंधविश्वासों पर तीखे प्रहार किए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अलाउद्दीन खिलजी ने घोड़ों के व्यापार पर नियंत्रण क्यों लगाया था?
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के सिद्धांत के अनुसार, प्रत्येक वस्तु के अनेक धर्म होते हैं और ज्ञान की सापेक्षता के कारण किसी भी सत्य को पूर्ण रूप से 'केवल एक ही दृष्टिकोण से' सत्य नहीं माना जा सकता, जबकि बुद्ध ने इसके विपरीत मध्यम प्रतिपदा (मझिम निकाय) का उपदेश दिया।
2. बौद्ध संघ की कार्यप्रणाली में लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया जाता था जहाँ प्रस्ताव (ज्ञाप्ति) रखने और उस पर मतदान (सलाका) कराने की एक सुनियोजित प्रक्रिया थी, किंतु इसके विपरीत जैन संघ में भिक्षुओं के लिए भिक्षुणी संघ पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखने का विशेष प्रावधान महावीर स्वामी ने स्वयं अपने जीवनकाल में ही स्थापित कर दिया था।
3. बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय में बुद्ध को एक अलौकिक देवता के रूप में पूजने की परंपरा शुरू हुई और बोधिसत्वों (जैसे अवलोकितेश्वर और मंजुश्री) की संकल्पना का विकास हुआ, जो स्वयं निर्वाण प्राप्त करने के बाद भी अन्य प्राणियों के उद्धार के लिए संसार में बने रहते हैं।
4. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ भी मोक्ष प्राप्त करने की पूर्ण अधिकारी हैं और तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का खंडन करते हुए यह मानता है कि स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है और मोक्ष प्राप्ति के लिए पुरुष शरीर का होना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (जिसका शाब्दिक अर्थ गायहंता या वह है जो दूधोती है) शब्द का प्रयोग पुत्री के लिए किया जाता था, तथा इस समाज में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी थी, जहाँ वे वाद-विवाद में हिस्सा ले सकती थीं।
2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होने लगी और सभा तथा समिति का प्रभाव कम होने लगा, किंतु इस काल में 'गोत्र' प्रथा का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (गोशाला) पाला जाता था।
3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे जुताई, बुай, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा वर्णित है, जो गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्य संस्कृति के विस्तार का प्रमाण देती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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