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History of India
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महात्मा गांधी के भारत आगमन और उनके शुरुआती तीन प्रमुख सत्याग्रहों (चंपारण, खेड़ा और असहयोग आंदोलन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1917 के चंपारण सत्याग्रह के दौरान राजकुमार शुक्ल के निमंत्रण पर गांधीजी ने बिहार के चंपारण का दौरा किया था, जहाँ यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा अपनाई जाने वाली 'तीनकठिया पद्धति' के विरोध में किसानों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष किया गया, और इसी आंदोलन की सफलता से प्रभावित होकर रविन्द्रनाथ टैगोर ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि दी थी।
- 2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान, फसल बर्बाद हो जाने और लगान माफी के नियमों का पालन न होने पर गांधीजी ने किसानों का नेतृत्व किया और वल्लभभाई पटेल व इंदुलाल याज्ञिक के सहयोग से सरकार को यह आश्वासन देने के लिए विवश किया कि सक्षम किसान ही लगान देंगे तथा गरीब किसानों का लगान माफ किया जाएगा।
- 3. वर्ष 1920 में प्रारंभ किए गए असहयोग आंदोलन के दौरान कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (सितंबर 1920) में गांधीजी द्वारा प्रस्तुत असहयोग प्रस्ताव का सीआर दास (चित्तरंजन दास) ने पुरजोर समर्थन किया था, जबकि नागपुर अधिवेशन (दिसंबर 1920) में इस प्रस्ताव की औपचारिक पुष्टि की गई।
- 4. चौरी-चौरा की घटना (5 फरवरी 1922) के उपरांत असहयोग आंदोलन को अचानक वापस लिए जाने के कारण भारतीय राजनीति में अत्यधिक निराशा फैली, जिसके परिणामस्वरुप चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने कांग्रेस से अलग होकर 'स्वराज पार्टी' का गठन किया, जबकि गांधीजी को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर छह वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
महात्मा गांधी जनवरी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे। चंपारण सत्याग्रह (1917) में तीनकठिया प्रथा के विरुद्ध उन्होंने सफलता प्राप्त की। खेड़ा सत्याग्रह (1918) गुजरात के किसानों की फसल बर्बादी और लगानमुक्ति की मांग को लेकर था जहाँ सरदार वल्लभभाई पटेल ने उनका साथ दिया और सरकार को झुकना पड़ा। असहयोग आंदोलन के संदर्भ में, कलकत्ता के विशेष अधिवेशन (1920) में सीआर दास ने शुरुआत में इसका विरोध किया था, किंतु नागपुर अधिवेशन (1920) में इसका पूर्ण समर्थन किया गया। 5 फरवरी 1922 को चौरी-चौरा कांड के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया और मार्च 1922 में उन्हें गिरफ्तार कर 6 वर्ष की सजा दी गई। विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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वर्ष 1857 के विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और इसके नेतृत्व की संरचनात्मक कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस ऐतिहासिक विद्रोह के पास अखिल भारतीय स्तर पर किसी एक सर्वमान्य, दूरदर्शी और केन्द्रीकृत राजनीतिक नेतृत्व का पूर्ण अभाव था, जिसके कारण विभिन्न क्षेत्रों के स्थानीय नेता अपने संकीर्ण व क्षेत्रीय हितों से ऊपर उठकर अंग्रेजों के विरुद्ध कोई एकीकृत दीर्घकालिक रणनीति नहीं बना सके।
2. दिल्ली के प्रतीकात्मक सम्राट घोषित किए गए बहादुर शाह ज़फ़र के पास न तो कोई वास्तविक सैन्य शक्ति थी और न ही विद्रोही सैनिकों के मध्य अनुशासन तथा समन्वय स्थापित करने की व्यावहारिक क्षमता।
3. आधुनिक शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और अंग्रेजी शिक्षा से लाभान्वित भारतीय बुद्धिजीवियों ने इस विद्रोह का सक्रिय रूप से नेतृत्व किया तथा इसे ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध एक सफल आधुनिक लोकतांत्रिक जन-क्रांति में बदल दिया।
4. अधिकांश बड़ी देशी रियासतों और भारतीय शासकों (जैसे हैदराबाद के निजाम, ग्वालियर के सिंधिया और भोपाल के नवाब) ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता के प्रति अपनी निष्ठा बनाए रखी, जिसके संदर्भ में ब्रिटिश गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनing ने टिप्पणी की थी कि इन शासकों ने 'तूफान में ब्रेकवाटर' (तरंगरोधक) की तरह कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) और उसके पश्चात हुए घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास नमक बनाने की अनुमति देना स्वीकार किया था।
2. कांग्रेस ने कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया और महात्मा गांधी को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए एकमात्र कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में नामित किया।
3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न गहरे मतभेद और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए समझौते के कारण गांधीजी ने सम्मेलन का बहिष्कार कर बीच में ही भारत लौटने का निर्णय लिया।
4. भारत लौटने के बाद गांधीजी ने तुरंत वायसराय लॉर्ड विलिंगटन से मुलाकात की, जिन्होंने कांग्रेस के प्रस्तावों को स्वीकार करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण को रोकने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका एवं उनकी रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते अपनी ब्रिटिश पेंशन रोके जाने के बाद कंपनी के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष की कमान संभाली।
2. अजीमुल्ला खां ने नाना साहब के मुख्य राजनीतिक और कूटनीतिक सलाहकार के रूप में कार्य किया, तथा उन्होंने ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने के लिए लंदन तक की यात्रा की थी।
3. कानपुर में ब्रिटिश रेजिडेंट सर ह्यू व्हीलर द्वारा आत्मसमर्पण किए जाने के बाद हुई 'सती चौरा घाट घटना' के पश्चात नाना साहब ने अंग्रेजों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हुए उन्हें कलकत्ता सुरक्षित भेज दिया था, और इस घटना में किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं हुई थी।
4. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के बाद तांत्रिक और सैन्य रूप से संघर्ष जारी रखा और बाद में रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर में ब्रिटिश सेना के खिलाफ प्रभावी गुरिल्ला युद्ध का संचालन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मनसबदारी व्यवस्था में "पाईबाकी" (Paibaqi) क्या थी?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की प्रकृति और उसके स्वरूप के संबंध में विभिन्न ब्रिटिश एवं भारतीय इतिहासकारों द्वारा दिए गए मतों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. वी. डी. सावरकर - "यह सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम था।"
2. टी. आर. होम्स - "यह बर्बरता और सभ्यता के बीच का संघर्ष था।"
3. सर जॉन सीले - "यह केवल एक देशभक्तिहीन और स्वार्थी सैनिक विद्रोह था।"
4. लॉरेंस और सीले - "यह मुसलमानों का एक षड्यंत्र था जिसके तहत हिंदुओं को आगे किया गया था।"
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सुमेलित हैं?
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