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History of India
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों तथा उनके संस्थापकों के वैفكिक और संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध किया तथा 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों को अपौरुषेय और ज्ञान का एकमात्र स्रोत माना।
  2. 2. स्वामी विवेकानंद द्वारा 1897 में स्थापित 'रामकृष्ण मिशन' ने अद्वैत वेदांत के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर बल दिया तथा केवल धार्मिक उद्धार तक सीमित न रहकर समाज सेवा, शिक्षा प्रसार और दरिद्रनारायण की सेवा को ही परम धर्म माना।
  3. 3. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व, धार्मिक पाखंडों और रूढ़ियों का खंडन करते हुए शूद्रों और अति-शूद्रों (दलितों) को सामाजिक न्याय व शिक्षा के अधिकार दिलाना था।
  4. 4. प्रार्थना समाज की स्थापना आत्माराम पांडुरंग द्वारा वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान हिंदू धर्म के भीतर व्याप्त कुरीतियों जैसे बाल विवाह, जाति भेद और मूर्तिपूजा का समर्थन करना तथा हिंदू-मुलाम एकता स्थापित करना था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। वर्ष 1875 में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज ने वेदों को सर्वोच्च प्रामाणिकता दी और मूर्तिपूजा, कर्मकांड तथा जाति व्यवस्था का विरोध किया। स्वामी विवेकानंद ने 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना कर व्यावहारिक वेदांत और मानव सेवा पर जोर दिया। ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज की स्थापना कर बहुजनों और शोषितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। कथन 4 असत्य है क्योंकि प्रार्थना समाज ने मूर्तिपूजा, बाल विवाह और जातिगत भेदभाव का समर्थन नहीं बल्कि कड़ा विरोध किया था। इस काल के सुधार आंदोलनों की विस्तृत जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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→ वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय का दूध दुहने वाली पुत्री से था, और इस काल में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी होती थी, जिन्हें विदथ में भी भाग लेने की अनुमति थी। 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित हो गई और समाज स्पष्ट रूप से चार वर्णों में विभाजित हो गया, तथा शतपथ ब्राह्मण में कृषि से जुड़ी चारों क्रियाओं (जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत विवरण प्राप्त होता है। 3. ऋग्वेद के दसवें मंडल के 'पुरुष सूक्त' में सर्वप्रथम चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) की उत्पत्ति का उल्लेख विराट पुरुष के विभिन्न अंगों से बताया गया है, जो इस काल के आरंभिक समतावादी समाज के पतन और पदानुक्रमित समाज के उदय का द्योतक है। 4. वैदिक साहित्य के अंतर्गत आरण्यकों को 'रहस्य पुस्तक' (Mystery Books) कहा जाता है, जिनकी रचना वनों में की गई थी और ये मुख्य रूप से यज्ञों के कर्मकांडीय अनुष्ठानों का विरोध करते हुए केवल भौतिक दर्शन का प्रतिपादन करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह को कुचले गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. मेजर जनरल हैवलॉक — लखनऊ और कानपुर में विद्रोही ताकतों के विरुद्ध सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया तथा कर्नल जेम्स नील के साथ मिलकर अवध की प्रारंभिक घेराबंदी को सुदृढ़ किया। 2. सर ह्यूरोज — झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे की सेना के विरुद्ध सैन्य अभियान का संचालन किया और झाँसी के पतन के बाद रानी की वीरता की प्रशंसा करते हुए उन्हें "विद्रोहियों में एकमात्र मर्द" कहा। 3. विलियम टेलर और विंसेंट आयर — बिहार क्षेत्र में बाबू वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में हुए विद्रोह को दबाने और आरा पर पुनः नियंत्रण स्थापित करने के लिए सैन्य कार्रवाई का संचालन किया। 4. कर्नल जेम्स नील — रोहिलखंड क्षेत्र में खान बहादुर खान के विद्रोह को कुचला तथा बरेली में शांति स्थापित करते हुए गवर्नर जनरल के आदेश पर प्रशासनिक सुधार लागू किए। उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? → वर्ष 1930-31 के सविनय अवज्ञा आंदोलन और वर्ष 1931 के गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान महिलाओं, व्यापारियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही, और इस दौरान उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत में खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में 'खुदाई खिदमतगार' (लाल कुर्ती आंदोलन) ने ब्रिटिश सत्ता को अहिंसक चुनौती दी। 2. कराची में आयोजित वर्ष 1931 के कांग्रेस अधिवेशन में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया गया और इसी अधिवेशन में पहली बार कांग्रेस द्वारा 'मौलिक अधिकार और आर्थिक नीति' पर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया। 3. गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने उन सभी राजनीतिक बंदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति दी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को आगामी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया गया। 4. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → दिल्ली में 1857 के विद्रोह और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 11 मई 1857 को मेरठ से आए विद्रोही सैनिकों ने दिल्ली पहुँचकर मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का 'शहंशाह-ए-हिंदुस्तान' घोषित किया, जबकि जफर इस समय अपनी वृद्धावस्था और अनिच्छा के बावजूद सैनिकों के दबाव में प्रतीकात्मक नेतृत्व स्वीकार करने के लिए विवश हुए थे। 2. दिल्ली में विद्रोह का वास्तविक सैन्य नेतृत्व और कमान 'बख्त खान' के हाथों में थी, जो बरेली से आए सैनिकों के एक दस्ते का नेतृत्व करते हुए दिल्ली पहुँचे थे और जिन्हें सम्राट ने 'साहेब-ए-आलम बहादुर' की उपाधि से सम्मानित किया था। 3. सितंबर 1857 में ब्रिटिश सेनापतियों जॉन निकोलसन और हडसन के नेतृत्व में दिल्ली पर पुनः अंग्रेजों का अधिकार हो गया, जिसके पश्चात बहादुर शाह जफर को हुमायूं के मकबरे से गिरफ्तार कर रंगून निर्वासित कर दिया गया था। 4. दिल्ली के पतन के उपरांत ब्रिटिश अधिकारी विलियम हडसन ने राजकुमारों (मिर्जा मुगल, खिज्र सुल्तान और अबू बकर) को बिना किसी विधिवत मुकदमे के खूनी दरवाजा के निकट सरेआम गोली से उड़ा दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगल प्रशासन में "मुश़रिफ" का मुख्य कार्य क्या था?
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