त्वरित लिंक्स
History of India
18 views
सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी के केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' (आठ मंत्रियों का मंत्रिपरिषद) का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान था, जिसमें 'पेशवा' (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री का पद संभालता था, किंतु अष्टप्रधान के सभी सदस्य वंशानुगत होते थे और उन्हें राजा के सैन्य अभियानों में भाग लेना अनिवार्य था।
- 2. शिवाजी ने राजस्व सुधारों के तहत मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाते हुए माप की प्रणाली ('काठी' और 'मान') को अपनाया, तथा राज्य की आय बढ़ाने के लिए पड़ोसी मुगल क्षेत्रों से 'चौथ' (कुल राजस्व का 25%) और 'सरदेशमुखी' (कुल राजस्व का 10% अतिरिक्त कर) नामक कर वसूल करने की प्रणाली विकसित की।
- 3. मराठा नौसेना (Navy) का सुदृढ़ीकरण शिवाजी की एक दूरदर्शी सैन्य नीति का हिस्सा था, जिसके तहत उन्होंने कोलाबा, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा पश्चिमी तट पर जंजीरा के सिद्दी और विदेशी ताकतों (पुर्तगालियों और अंग्रेजों) की नौसैनिक गतिविधियों को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
- 4. शिवाजी के उत्तराधिकार के काल में वर्ष 1731 में 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) के द्वारा छत्रपति और पेशवा के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हो गया, जिसके तहत कोल्हापुर के छत्रपति (संभाजी द्वितीय) और सतारा के छत्रपति (शाहू प्रथम) के बीच मराठा राज्य की संप्रभुता का औपचारिक बंटवारा हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि शिवाजी के 'अष्टप्रधान' (मंत्रिपरिषद) के सभी सदस्य वंशानुगत नहीं थे। वे पूरी तरह से सम्राट के अधीन थे और सम्राट उन्हें कभी भी पदच्युत कर सकता था या उनका स्थानांतरण कर सकता था, हालांकि कुछ पदों पर पुत्रों को योग्यता के आधार पर नियुक्त किया जाता था। कथन 2, 3 और 4 पूरी तरह से सही हैं। शिवाजी ने मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था को आधार बनाया, चौथ और सरदेशमुखी करों की शुरुआत की, पश्चिमी तट पर मजबूत नौसेना और तटीय किलों का निर्माण किया, तथा 1731 की 'वारणा की संधि' (Treaty of Warna) द्वारा सतारा और कोल्हापुर के बीच मराठा साम्राज्य का आधिकारिक विभाजन हुआ। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
प्राचीन भारतीय इतिहास में बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक मतभेदों, संघ के संगठन तथा संप्रदायों के विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' (स्यादवाद) के अनुसार किसी भी वस्तु का ज्ञान सापेक्ष और बहुआयामी होता है, जबकि बुद्ध ने आत्मा और ईश्वर के अस्तित्व को लेकर पूर्णतः मौन (अव्याकृत) रहते हुए केवल 'प्रतीतसमुत्पाद' के माध्यम से संसार को निरंतर परिवर्तनशील और क्षणिक माना है।
2. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में 'बोधिसत्व' की संकल्पना को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, जो स्वयं की मुक्ति से पहले समस्त प्राणियों के उद्धार के मार्ग पर चलते हैं, जबकि हीनयान (स्थविरवाद) संप्रदाय व्यक्तिगत साधना और अर्हत् (Arhat) पद की प्राप्ति को सर्वोच्च लक्ष्य मानता है।
3. जैन संघ के विभाजन के परिणामस्वरूप श्वेतांबर और दिगंबर संप्रदायों का उदय हुआ, जिनमें दिगंबर साधु जैन दर्शन के कठोर नियमों का पालन करते हुए पूर्ण नग्नता धारण करते हैं, जबकि श्वेतांबर साधु श्वेत वस्त्र पहनते हैं और इस बात पर विश्वास करते हैं कि स्त्रियाँ भी मोक्ष प्राप्त कर सकती हैं।
4. बौद्ध धर्म की प्रथम संगीति राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में अजातशत्रु के संरक्षण में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता महाकस्सप ने की थी, तथा इसी संगीति में बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्तपिटक' और 'विनयपिटक' के रूप में संकलित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी में घटित घटनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों को लोड करने से पहले मुँह से काटना पड़ता था और ऐसी अफवाह व तथ्य सामने आए कि उनमें गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
2. 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में चर्बीयुक्त कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध कड़ा विरोध जताते हुए ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था।
3. मंगल पांडे को इस अनुशासनहीनता और विद्रोह के लिए 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप बैरकपुर छावनी की उस पूरी रेजिमेंट को ब्रिटिश प्रशासन द्वारा तत्काल प्रभाव से बिना किसी जाँच के स्थायी तौर पर भंग कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (विशेषकर पल्लव, चालुक्य और चोल) के राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा को अत्यधिक प्रोत्साहन मिला और कन्नौज में आयोजित भव्य धर्मसभा का मुख्य उद्देश्य ह्वेनसांग की उपस्थिति में महायान सिद्धांतों का प्रचार करना तथा 'मोक्ष महापरिषद्' (प्रयाग) में सम्राट द्वारा अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर देना था।
2. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी (बादामी) के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित किया था और इस विजय के उपलक्ष್ಯ में 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण करते हुए महाबलीपुरम (मावलपुरम) में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी) में नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी विजय का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें चालुक्य साम्राज्य और वर्धन साम्राज्य के बीच की सीमा का उल्लेख है।
4. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने अपनी नौसैनिक शक्ति का विस्तार करते हुए मालदीव द्वीपों पर विजय प्राप्त की और श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर अधिकार कर वहाँ चोल प्रांत की स्थापना की, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूक के स्थान पर जनवरी 1857 से नई 'एनफील्ड' (Enfield) राइफल को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों के धार्मिक विश्वास को गहरी ठेस पहुँचाई थी।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए अपने अंग्रेजी अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग (Lt. Baugh) और ह्यूसन (Hearsay/Lt. Hewson) पर हमला कर उन्हें मार गिराया था।
3. इस घटना के परिणामस्वरुप मंगल पांडे को गिरफ्तार कर 8 अप्रैल 1857 को बैरकपुर में ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी, तथा इस महान विद्रोह की पूर्व संध्या पर सैनिकों और गाँवों में गुप्त रूप से 'कमल का फूल और चपाती (रोटी)' वितरित किए जाने के साक्ष्य मिलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
दिल्ली में 1857 के विद्रोह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को अनिच्छा से ही सही, इस महान विद्रोह का प्रतीक और सर्वोच्च नेता घोषित किया गया था।
2. यद्यपि बहादुर शाह जफर को सम्राट घोषित किया गया था, परंतु वास्तविक सैन्य नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति 'कोर्ट ऑफ सोल्जर्स' (सैनिकों की अदालत) के पास थी, जिसमें विभिन्न रेजिमेंटों के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल थे।
3. बख्त खान के नेतृत्व में बरेली से आए सैनिकों ने दिल्ली की सैन्य कमान संभाली और उन्होंने सम्राट तथा सैनिकों के बीच प्रशासनिक एवं वित्तीय समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. दिल्ली पर अंग्रेजों द्वारा पुनः अधिकार करने के पश्चात ब्रिटिश जनरल जॉन निकोलसन की इस संघर्ष में मृत्यु हो गई थी, तथा बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर रंगून (बर्मा) निर्वासित कर दिया गया था जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.