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History of India
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित 'आजाद हिंद फौज' (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों एवं रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बॉग्ड कांग्रेस अधिवेशन में पारित प्रस्ताव के बाद, महात्मा गांधी ने 'करेंगे या मरेंगे' (Do or Die) का आह्वान किया, और इस आंदोलन की एक प्रमुख विशेषता देश के विभिन्न हिस्सों (जैसे बलिया, ताम्रलिप्त और सतारा) में समानांतर सरकारों (Parallel Governments) की स्थापना थी।
- 2. जापान की सहायता से पुनर्गठित इंडियन नेशनल आर्मी (INA) का सर्वोच्च नेतृत्व संभालते हुए सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में वर्ष 1943 में 'आर्जि हुकूमत-ए-आजाद हिंद' (स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार) की स्थापना की थी, जिसे धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) द्वारा आधिकारिक मान्यता दी गई थी।
- 3. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से रेडियो प्रसारण के दौरान महात्मा गांधी को संबोधित करते हुए उन्हें 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहा था, और साथ ही यह भी स्पष्ट किया था कि भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष ही एकमात्र और अंतिम विकल्प है।
- 4. आजाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (Red Fort Trials) में चलाए गए ऐतिहासिक मुकदमे के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों की मुख्य समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जबकि इस बचाव दल में तेज बहादुर सप्रू, कैलाश नाथ काटजू और जवाहरलाल नेहरू जैसे प्रसिद्ध विधिवेत्ता भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जहाँ एक ओर देशव्यापी जन-विद्रोह हुआ, वहीं बलिया (चित्तू पांड़े के नेतृत्व में), मिदनापुर के ताम्रलिप्त (जातीय सरकार) और सतारा (प्रति सरकार) जैसी जगहों पर समानांतर सरकारों की स्थापना हुई। सुभाष चंद्र बोस ने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'आर्जि हुकूमत-ए-आद हिंद' की स्थापना की और सिंगापुर से ही रेडियो के माध्यम से गांधीजी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1945-46 में INA के अधिकारियों पर लाल किले में चलाए गए मुकदमों में भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में बचाव पक्ष का गठन किया गया था, जिसमें देश के शीर्ष वकील शामिल हुए थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित नगरों और उनके विशिष्ट पुरातात्विक साक्ष्यों या विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. चान्हूदड़ो — यह एकमात्र ऐसा हड़प्पाकालीन स्थल था जहाँ किसी भी प्रकार का कोई दुर्ग (Citadel) नहीं पाया गया है, और यहाँ मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory) के साथ-साथ वक्रাকার ईंटों के साक्ष्य भी मिले हैं।
2. लोथल — यहाँ से गोदीबाड़ा (Dockyard) के अवशेष मिले हैं, जो यह प्रमाणित करता है कि यह एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, तथा यहाँ से चावल और बाजरे के साक्ष्य के साथ-साथ युगल शवाधान (Double burial) के भी प्रमाण प्राप्त हुए हैं।
3. कालीबंगा — इस स्थल के निचले शहर और दुर्ग दोनों क्षेत्रों को एक ही सामान्य रक्षाप्राचीर से घेरा गया था, और यहाँ से जुते हुए खेत के साक्ष्य तथा भूकंप के प्राचीनतम प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक इतिहास तथा नरम दल और गरम दल के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के शुरुआती वर्षों (1885-1905) में नरमपंथियों की कार्यप्रणाली मुख्य रूप से 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Pray, Petition and Protest) की संवैधानिक राजनीति पर आधारित थी, और उन्होंने ब्रिटिश शासन को भारत के आधुनिकीकरण के लिए एक वरदान के रूप में देखा था।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के पश्चात उग्रवादी (गरम दल) नेताओं—लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल) और अरविंद घोष ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखने का समर्थन किया था, जबकि अखिल भारतीय स्तर पर इसके विस्तार का कड़ा विरोध किया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव और वैचारिक मतभेदों के कारण ऐतिहासिक विभाजन हो गया, जिसमें नरमपंथियों की ओर से रास बिहारी घोष को अध्यक्ष चुना गया था।
4. बाल गंगाधर तिलक ने जनता में राष्ट्रीय चेतना जागृत करने के लिए वर्ष 1893 में 'गणेश उत्सव' और वर्ष 1895 में 'शिवाजी उत्सव' की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के माध्यम से राजनीतिक संवाद स्थापित करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल सर ह्यूरोज द्वारा झाँसी के किले की घेराबंदी किए जाने पर रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया और तात्या टोपे के आने से पूर्व ही किले की प्राचीर से कूदकर कालपी सुरक्षित पहुँच गईं, जहाँ दोनों की संयुक्त सेना ने अंग्रेजों का मुकाबला किया।
2. कालपी के युद्ध में पराजय के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और सिंधिया शासक जयाजीराव सिंधिया की सेना को पराजित कर ग्वालियर के सामरिक दुर्ग पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब को औपचारिक रूप से पेशवा घोषित किया गया।
3. ग्वालियर के पतन के उपरांत ब्रिटिश सेनापति सर ह्यूरोज द्वारा पुनः अधिकार करने के लिए किए गए अंतिम निर्णायक आक्रमण के दौरान 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोतकी-सराय में लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. रानी लक्ष्मीबाई की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे मध्य भारत के जंगलों में चले गए, जहाँ उन्होंने लंबे समय तक गोरिल्ला युद्ध का सफल संचालन किया, किंतु अंततः उनके ही एक विश्वासघाती जमींदार (मानसिंह) के विश्वासघात के कारण उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया और शिवपुरी में फाँसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के परिणाम और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश ताज (Crown) के नियंत्रण में चला गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर उनके स्थान पर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद का गठन किया गया।
2. गवर्नर-जनरल का पद समाप्त कर उसके स्थान पर 'वायसराय' पद का सृजन किया गया, और लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वायसराय बने, जिन्हें भारत सचिव के माध्यम से ब्रिटिश मंत्रिमंडल के प्रति उत्तरदायी बनाया गया था।
3. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) में यह स्पष्ट किया गया कि ब्रिटिश सरकार अब भारतीय रियासतों का अधिग्रहण करने की अपनी नीति को त्याग देगी और भविष्य में किसी भी नए राज्य का विलय नहीं किया जाएगा।
4. इस अधिनियम और घोषणा के पश्चात ब्रिटिश सेना के पुनर्गठन के अंतर्गत भारतीय सैनिकों के अनुपात को कम किया गया और यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई, साथ ही सेना में जाति, क्षेत्र और संप्रदाय के आधार पर 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत रेजीमेंटों का गठन किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना, गुप्तचर व्यवस्था तथा प्रांतीय शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य प्रशासन में गूढ़पुरुष (गुप्तचर) दो प्रमुख श्रेणियों में बंटे थे — 'संस्ถา' (एक ही स्थान पर रहकर कार्य करने वाले) और 'संचारा' (एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमने वाले), जिनका मुख्य कार्य राज्य के अधिकारियों और नागरिकों के आचरण की निगरानी करना था।
2. अशोक के प्रमुख शिलालेखों में प्रांतीय प्रशासनिक इकाइयों का स्पष्ट उल्लेख मिलता है, जिसके तहत साम्राज्य के चार प्रमुख प्रांतों (उत्तरापथ, अवंतीराष्ट्र, कलिंग और प्रासी) की राजधानियाँ क्रमशः तक्षशिला, उज्जैन, तोसली और पाटलिपुत्र थीं।
3. मौर्य काल में नगर प्रशासन की देखरेख के लिए मेगास्थनीज के विवरण के अनुसार छह समितियों का उल्लेख मिलता है, जिसमें प्रत्येक समिति में पांच सदस्य होते थे, और ये समितियाँ शिल्प-कला, विदेशी पर्यटकों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण तथा व्यापार-वाणिज्य की देखरेख करती थीं।
4. मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था में कृषि भूमि के अतिरिक्त बिना जोती गई जंगली भूमि पर राज्य का प्रत्यक्ष नियंत्रण होता था, जिसे 'अदेवमातृक' भूमि कहा जाता था, और इस पर राज्य द्वारा सीधे कृषि कार्य कराया जाता था जिसकी देखरेख 'सीताध्यक्ष' नामक अधिकारी करता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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