त्वरित लिंक्स
History of India
1 views
मुगलकालीन केंद्रीय प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और धार्मिक नीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जहाँगीर के शासनकाल में चित्रकला ने अपने चरमोत्कर्ष को प्राप्त किया, जहाँ उसने प्राकृतिक दृश्यों और पक्षियों के सजीव चित्रण को विशेष प्रोत्साहन दिया, किंतु उसने अपने पिता अकबर के विपरीत धार्मिक मामलों में कट्टरता अपनाते हुए सभी गैर-मुसलमानों पर पुनः 'जिज़िया' कर लगा दिया था।
- 2. शाहजहां के शासनकाल में स्थापत्य कला स्वर्ण युग में पहुँची, और मयूर सिंहासन (तख्त-ए-ताऊस) का निर्माण करवाया गया, जिस पर बैठने वाला अंतिम मुगल शासक मुहम्मद शाह 'रंगीला' था, जिसके काल में नादिर शाह ने आक्रमण किया था।
- 3. औरंगजेब द्वारा इस्लाम के रूढ़िवादी सिद्धांतों को लागू करते हुए दरबार में संगीत पर प्रतिबंध लगा दिया गया, झरोखा दर्शन और तुलादान जैसी हिंदू परंपराओं को समाप्त कर दिया गया, तथा उसने अपने शासन के शुरुआती वर्षों में ही सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को भी बंद कर दिया था।
- 4. अकबर के शासनकाल में प्रारंभ की गई 'इबादतखाना' की स्थापना का मुख्य उद्देश्य सभी धर्मों के विद्वानों के बीच धार्मिक चर्चा और समन्वय स्थापित करना था, जिसे बाद में 1582 में 'दीन-ए-इलाही' (तौहीद-ए-इलाही) की घोषणा के साथ और अधिक व्यापक रूप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि जहाँगीर ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति का पालन किया था और उसने अकबर द्वारा स्थापित उदारवादी परंपराओं को आगे बढ़ाया था; उसने जिज़िया कर पुनः नहीं लगाया था। कथन 2, 3 और 4 सत्य हैं। शाहजहाँ के काल में स्थापत्य कला का स्वर्ण युग था और मयूर सिंहासन पर बैठने वाला अंतिम मुगल सम्राट मुहम्मद शाह था। औरंगजेब ने रूढ़िवादी नीतियों के तहत संगीत, झरोखा दर्शन और सिक्कों पर कलमा खुदवाने पर रोक लगा दी थी। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
मुगल काल में "अमल गुजार" का मुख्य कार्य क्या था?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक मूल्यांकन के संदर्भ में, विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों पर विचार कीजिए:
1. वी. डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा दी है।
2. डॉ. आर. सी. मजूमदार का यह प्रसिद्ध मत था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'-
3. सर जॉन लॉरेन्स और सी. ई. आर. सी. सी. रीस के अनुसार यह विद्रोह मूल रूप से केवल 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय मुक्ति न होकर सैनिकों का पेशेवर असंतोष था।
4. टी. आर. होम्स का यह कथन था कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
1857 के महान विद्रोह की असफलता के प्रमुख कारणों और इसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोहियों के पास किसी केंद्रीय संगठन, एकसमान राजनीतिक दृष्टिकोण और अखिल भारतीय स्तर के सर्वमान्य सर्वोच्च नेता का पूर्ण अभाव था, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के नेता अपने स्थानीय हितों और सीमाओं से बंधे रहे।
2. अधिकांश भारतीय रियाسतों और बड़े राजाओं (जैसे सिंधिया, होलकर, और हैदराबाद के निजाम) ने विद्रोह का साथ देने के बजाय ब्रिटिश सत्ता का सक्रिय समर्थन किया, जिसे इतिहासकारों ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए 'तूफान में बांध का काम' (breakwater) करने वाली दीवार कहा है।
3. आधुनिक सैन्य तकनीक, कुशल संचार के साधन (टेलीग्राफ और रेलवे) और अनुशासित सैन्य संगठन का सुदृढ़ लाभ ब्रिटिश पक्ष के पास था, जबकि विद्रोही सिपाहियों के पास हथियारों की भारी कमी और आपसी समन्वय का अभाव था।
4. शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और आधुनिक बुद्धिजीवियों ने 1857 के विद्रोह में सबसे आगे बढ़कर सक्रिय रूप से भाग लिया और ब्रिटिश नीतियों के खिलाफ इसे एक अखिल भारतीय आधुनिक राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम का सफल वैचारिक नेतृत्व प्रदान किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की औपचारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, और इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
2. विभाजन की प्रभावी तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे के हाथों में राखियाँ बांधीं और रबींद्रनाथ ठाकुर के प्रसिद्ध गीत 'आमार सोनार बांग्ला' को इस आंदोलन का मुख्य प्रेरणास्त्रोत बनाया गया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और स्वदेशी के प्रचार के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय चेतना जगाने के उद्देश्य से 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी, जिसके प्रथम अध्यक्ष महान वैज्ञानिक आर्चाय प्रफुल्ल चंद्र राय थे।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं (लाल-बाल-पाल) ने इसे बंगाल की सीमाओं से बाहर पूरे देश में फैलाने का प्रयास किया, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक ने बॉम्बे और पूना में, लाला लाजपत राय ने पंजाब में और सैयद حیدر رضا ने दिल्ली में स्वदेशी आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में स्वतंत्रता संग्राम के दो महान सेनानियों, वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के नेतृत्व एवं संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जगदीशपुर के 80 वर्षीय जमींदार वीर कुंवर सिंह ने 25 जुलाई 1857 को दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के आरा पहुँचने पर उनका नेतृत्व स्वीकार किया तथा ब्रिटिश सेना के कैप्टन डनबर की सेना को आरा की लड़ाई में करारी शिकस्त दी।
2. कुंवर सिंह ने अपनी अद्भुत सैन्य रणनीति का परिचय देते हुए आजमगढ़, गाजीपुर और बलिया के रास्ते उत्तर प्रदेश और मध्य भारत तक सैन्य अभियान चलाया तथा गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश सेना की गोली लगने से घायल होने पर अपना एक हाथ स्वयं काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के बाद उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों से अंग्रेजों के विरुद्ध गुरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से एक समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन किया।
4. अमर सिंह के नेतृत्व वाले इस संघर्ष को कुचलने के लिए अंग्रेजों ने ब्रिटिश सैन्य अधिकारी विलियम टेलर और विंसेंट आयर को विशेष रूप से नियुक्त किया था, जिन्होंने कैमूर के जंगलों में पूर्ण सफलता प्राप्त कर अमर सिंह को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें फांसी दे दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.