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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वास्को डी गामा के 1498 में कालीकट पहुँचने के उपरांत पुर्तगालियों ने भारत में अपने व्यापारिक हितों को सुरक्षित करने के लिए 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का अनुसरण किया, जिसे मुख्य रूप से फ्रांसिस्को डी अल्मेडा द्वारा लागू किया गया था।
- 2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाلی साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया और क्षेत्र में सती प्रथा को प्रतिबंधित करने जैसे सामाजिक सुधार किए।
- 3. नुनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर बनने के बाद 1530 में अपनी आधिकारिक राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित करके गोवा बनाया, तथा गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से बेसिन और दीव जैसे महत्वपूर्ण भू-भागों पर अधिकार प्राप्त किया।
- 4. पुर्तगालियों ने भारतीय समुद्रों पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए 'कार्टेज' (Cartaz) नामक व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली की शुरुआत की थी, जिसके तहत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाए बिना अरब सागर और हिंद महासागर में स्वतंत्र रूप से व्यापार करने की पूर्ण छूट प्राप्त थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं क्योंकि फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने हिंद महासागर में पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित करने के लिए 'ब्लू वाटर पॉलिसी' अपनाई थी, अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा पर अधिकार किया और नुनू डी कुन्हा ने 1530 में राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया। कथन 4 गलत है क्योंकि 'कार्टेज' प्रणाली के अंतर्गत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर (लाइसेंस शुल्क) चुकाना अनिवार्य था और बिना कार्टेज के हथियारबंद या मसाला व्यापार करने वाले जहाजों को जब्त कर लिया जाता था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सेना में पुरानी 'ब्राउन बैस' मस्कट बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड' राइफल (Enfield Rifle) को शामिल किए जाने का निर्णय लिया गया था, जिसमें प्रयोग होने वाले कारतूस के कागज के आवरण को लोड करने से पहले दांत से काटना पड़ता था और यह अफवाह फैल गई थी कि उस आवरण में गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग किया गया है।
2. जनवरी 1857 में दमदम (Dum Dum) छावनी में तैनात एक भारतीय लस्कर (भारतीय सिपाही) ने सबसे पहले चर्बी वाले कारतूस के प्रयोग के खिलाफ खुलकर विरोध जताया था और इसी छावनी से सैनिकों ने तुरंत सामूहिक रूप से हथियार डाल दिए थे।
3. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध बगावत करते हुए ब्रिटिश एडजुटेंट लेफ्टिनेंट ह्यू बॉग और सार्जेंट मेजर ह्यूसन पर हमला कर उनकी हत्या कर दी थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई थी।
4. मंगल पांडे की फांसी के तुरंत बाद बैरकपुर की पूरी छावनी ने एकजुट होकर अंग्रेजों के विरुद्ध खुलेआम सशस्त्र विद्रोह का ऐलान कर दिया था और उसी दिन दिल्ली की ओर कूच कर गए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग होती थी, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, और भूमि की पैमाइश के लिए 'निवर्तन' और 'कुडव' जैसी माप इकाइयों का उल्लेख मिलता है।
2. इस काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि दान देने की प्रथा ('अग्रहार' व्यवस्था) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य में सामंती प्रवृत्तियों (Feudal Tendencies) का बीजारोपण हुआ।
3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनार्क' और चांदी के सिक्कों को 'रूप्यक' कहा जाता था, तथा चंद्रगुप्त द्वितीय के पश्चिमी भारत के शक राजाओं को पराजित करने के उपरांत चांदी के सिक्कों का प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ था।
4. गुप्त प्रशासन में सर्वोच्च न्याय अधिकारी राजा होता था, और इस काल में पहली बार दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक) मुकदमों के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर किया गया तथा चोरी और डकैती के मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' और 'कंटकशोधन' न्यायालयों की स्थापना की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य की प्रशासनिक, राजस्व और सैन्य व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की राजस्व व्यवस्था मलिक अंबर की भू-राजस्व प्रणाली पर आधारित थी, जिसके अंतर्गत राज्य द्वारा किसानों से सीधे कर वसूला जाता था और बिचौलियों (देशमुख, पाटिल और कुलकर्णी) की मनमानी पर कड़ा नियंत्रण रखा जाता था।
2. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख बाह्य कर थे; चौथ पड़ोसी मुगल या अन्य क्षेत्रों की आय का एक-चौथाई हिस्सा था जो सुरक्षा प्रदान करने के एवज में वसूला जाता था, जबकि सरदेशमुखी मराठा राज्य के बाहर से लिया जाने वाला 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी अपने को 'सरदेशमुख' (सर्वोच्च मुखिया) होने के दावे के रूप में वसूलते थे।
3. शिवाजी की नियमित अश्वसेना (पागा) के सैनिकों को राज्य द्वारा घोड़ों और हथियारों की आपूर्ति की जाती थी, जबकि बरगीर घुड़सवारों की तुलना में सिलाहदार अधिक स्वायत्त होते थे क्योंकि वे अपने घोड़े और हथियार स्वयं सुसज्जित करते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुगल सम्राट जहांगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को मुगल साम्राज्य के सभी भागों में व्यापार करने और कारखाना स्थापित करने का पूर्ण शाही फरमान प्रदान कर दिया था।
2. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को जारी किए गए 'सुनहरे फरमान' (Magna Carta) के तहत कंपनी को बंगाल, हैदराबाद और अवध में 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले सीमा शुल्क मुक्त व्यापार करने का असीमित अधिकार मिल गया था।
3. फ्रांसिस डे नामक ब्रिटिश अधिकारी ने वर्ष 1639 में चंद्रगिरि के राजा से मद्रास को पट्टे पर प्राप्त किया था और वहाँ 'फोर्ट सेंट जॉर्ज' की नींव रखी, जो आगे चलकर अंग्रेजों का दक्षिण भारत में प्रमुख प्रशासनिक केंद्र बना।
4. बंगाल के नवाब अलीवर्दी खान ने यूरोपीय व्यापारियों की तुलना 'मधुमक्खियों' से करते हुए यह चेतावनी दी थी कि यदि उन्हें छेड़ा न जाए तो वे शहद देंगी, और यदि छेड़ा जाए तो वे काट-काट कर मार डालेंगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त सम्राटों ने कुषाणों की तुलना में सर्वाधिक स्वर्ण मुद्राएँ (दीनार) जारी कीं, किंतु उनके प्रारंभिक काल की स्वर्ण मुद्राओं में सोने की शुद्धता (प्रतिशतता) अधिक थी, जबकि बाद के शासकों के काल में सोने की शुद्धता में निरंतर कमी आई और तांबे व अन्य धातुओं की मिलावट बढ़ने लगी।
2. गुप्त प्रशासन में प्रांतीय प्रशासन को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, तथा भुक्तियों का विभाजन 'विषय' (ज़िलों) में होता था, जिनका प्रशासन 'विषयापति' संभालते थे और इस प्रशासनिक व्यवस्था में स्थानीय नगर श्रेष्ठी और सार्थवाहों का भी महत्वपूर्ण सहयोग लिया जाता था।
3. गुप्त राजवंश के शासक मूल रूप से वैष्णव धर्म के अनुयायी थे और उन्होंने 'परमभागवत' की उपाधि धारण की थी, किंतु उनके साम्राज्य में धार्मिक सहिष्णुता की नीति प्रचलित थी, जिसका प्रमाण मेहरौली लौह स्तंभ और नालंदा महाविहार को दिए गए राजकीय अनुदानों से मिलता है।
4. गुप्त काल में भूमि राजस्व सामान्यतः कुल उपज का 1/6 से 1/4 भाग तक वसूला जाता था, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, किंतु किसानों से बिना पारिश्रमिक के कराई जाने वाली बेगार (forced labor) को अवैध घोषित कर दिया गया था और इसका कोई भी उल्लेख गुप्तकालीन अभिलेखों में नहीं मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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