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History of India
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पुर्तगाली औपनिवेशिक विस्तार और भारत में यूरोपीय व्यापारिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने भारत में पुर्तगाली शक्ति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (नीले पानी की नीति) का क्रियान्वयन किया, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर को पुर्तगाली झील में बदलना और अरब सागर के व्यापार पर एकाधिकार स्थापित करना था।
- 2. अल्फोंसू डी अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा पर अधिकार कर लिया और क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने जैसे साहसिक सामाजिक कदम उठाए।
- 3. नुनू डी कुन्हा ने पुर्तगाली गवर्नर के रूप में कार्य करते हुए 1530 में अपनी आधिकारिक राजधानी को कोचीन से स्थानांतरित करके गोवा बनाया, तथा गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह से बेसिन एवं दीव जैसे सामरिक क्षेत्रों पर अधिकार प्राप्त किया।
- 4. पुर्तगालियों द्वारा शुरू की गई 'कार्टेज' (Cartaz) व्यापारिक लाइसेंस प्रणाली के अंतर्गत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से कर चुकाए बिना हिंद महासागर के किसी भी मार्ग पर स्वतंत्र रूप से आवागमन करने की पूर्ण छूट प्राप्त थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
पुर्तगाली औपनिवेशिक इतिहास के संदर्भ में कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। फ्रांसिस्को डी अल्मेडा ने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' अपनाई थी, अल्बुकर्क ने 1510 में गोवा जीता और सती प्रथा रोकी, तथा नुनू डी कुन्हा ने 1530 में राजधानी कोचीन से गोवा स्थानांतरित की। किंतु कथन 4 असत्य है, क्योंकि 'कार्टेज' (Cartaz) प्रणाली के तहत एशियाई जहाजों को पुर्तगाली बंदरगाहों से लाइसेंस और कर (द्यूत) चुकाना अनिवार्य था; इसके बिना अरब सागर में जहाजों को जब्त कर लिया जाता था और कुछ खास सामानों (जैसे काली मिर्च और गोला-बारूद) का व्यापार प्रतिबंधित था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में लोहे का व्यापक ज्ञान था और इसका प्रयोग कृषि उपकरणों तथा अस्त्र-शस्त्रों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर किया जाता था, जिसे 'अयस' कहा गया है।
2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर कठोर हो गई, जिसमें क्षत्रियों और वैश्यों की तुलना में ब्राह्मणों और शूद्रों की सामाजिक स्थिति में स्पष्ट परिवर्तन आए, तथा इस काल में 'गोत्र' प्रथा की स्थापना हुई।
3. ऋग्वैदिक समाज मुख्य रूप से पितृसत्तात्मक था, जिसमें महिलाओं को सभा और समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने की अनुमति थी, और उपनयन संस्कार तथा वेदों के अध्ययन का अधिकार भी महिलाओं को प्राप्त था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'प्रार्थना समाज' और 'सत्यशोधक समाज' के वैचारिक दृष्टिकोण, उनके संस्थापकों तथा सामाजिक सुधार के एजेंडे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंबई में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से स्थापित प्रार्थना समाज ने मुख्य रूप से अंतर-जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह, स्त्री शिक्षा और दलित जातियों के उत्थान पर जोर दिया, तथा इसके प्रमुख नेताओं में महादेव गोविंद रामाडे (M.G. Ranade) और आर. जी. भंडाकर शामिल थे।
2. ज्योतिराव फुले द्वारा वर्ष 1873 में स्थापित 'सत्यशोधक समाज' का मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अति-शूद्रों (दलितों) को वैचारिक और सामाजिक रूप से जागरूक करना तथा धार्मिक पुरोहित वर्ग के बिना विवाह संस्कारों का संचालन करना था।
3. प्रार्थना समाज के विपरीत, ज्योतिराव फुले ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'गुलामगिरी' (Gulamgiri) में अमेरिकी दास प्रथा और भारत की शूद्र-अतिशूद्र जनता की सामाजिक स्थिति के बीच वैचारिक समानता स्थापित करते हुए ब्राह्मण वर्चस्ववादी व्यवस्था की कड़ी आलोचना की थी।
4. प्रार्थना समाज और सत्यशोधक समाज दोनों ने पारंपरिक रूढ़िवादी हिंदू धर्म के पुनरुत्थान और वेदों की अचूकता को स्वीकार करने का समर्थन किया था, तथा पश्चिमी आधुनिक शिक्षा के प्रभाव को समाज के लिए पूरी तरह हानिकारक माना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपनी सेना के लिए स्थाई और नगद वेतन प्रणाली की शुरुआत की तथा सैनिकों के घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया दर्ज करने की प्रथा को कड़ाई से लागू किया, ताकि भ्रष्टाचार को रोका जा सके।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी दिल्ली से देवगिरीज (दलताबाद) स्थानांतरित की, जिसका मुख्य उद्देश्य साम्राज्य के केंद्रीय भाग से दक्षिण भारत पर बेहतर नियंत्रण स्थापित करना था, और इस दौरान उसने तांबे और कांसे के 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) का प्रचलन शुरू किया जो पूर्णतः सफल साबित हुआ।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार किसानों के सिंचाई संकट को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण करवाया और हक्क-ए-शर्ब (सिंचाई कर) नामक कर वसूल किया, साथ ही उसने ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।
4. इल्तुतमिश ने अपने शासनकाल में 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और अमीरों को नगद वेतन देने के बजाय राजस्व एकत्र करने के लिए भूमि के टुकड़े (इकता) प्रदान किए जाते थे, और यह वंशानुगत नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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इतिहासकारों ने मोहम्मद बिन तुगलक को क्या कहकर संबोधित किया है?
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों और उनके प्रशासनिक ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुलाम वंश के सुल्तान इल्तुतमिश ने केंद्रीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस तुर्क सरदारों का दल) का गठन किया था, जिसे बाद में बलवान ने अपनी केंद्रीय सत्ता को सर्वोच्च बनाने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया।
2. खिलजी वंश के दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने हेतु बिस्वा के आधार पर भूमि की पैमाइश कराई और नगद के रूप में कर वसूली पर जोर दिया, साथ ही सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को जागीर के बदले नकद वेतन देने की परंपरा को संस्थागत रूप दिया।
3. तुगलक वंश के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल की जागीरदारी प्रथा को आनुवंशिक बना दिया और सैनिकों तथा अमीरों को वेतन के रूप में नगद देने की बजाय 'वजह' (लगान के अधिकार वाली पर्ची) अथवा जागीरें देना पुनः प्रारंभ कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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