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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के अधिकारियों और विद्रोह के दमन के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- 1. दिल्ली — जॉन निकलसन
- 2. लखनऊ — कॉलिन कैंपबेल
- 3. कानपुर — सर ह्यूरोज़
- 4.
झांसी और ग्वालियर — नील एवं हैवलाक उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना ने विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग अधिकारियों के नेतृत्व में विद्रोह का दमन किया था। दिल्ली में ब्रिटिश सत्ता पुनः स्थापित करने वाले प्रमुख अधिकारी जॉन निकलसन थे, जबकि लखनऊ में हेनरी लॉरेंस, जेम्स आउट्राम और कॉलिन कैंपबेल ने मुख्य भूमिका निभाई थी और अंततः कैंपबेल ने लखनऊ को मुक्त कराया था। इसके विपरीत, कानपुर में विद्रोह का दमन करने वाले प्रमुख अधिकारी कॉलिन कैंपबेल और हैवलॉक थे (कर्नल नील भी प्रारंभिक दमन में शामिल था)। वहीं, झांसी और ग्वालियर में विद्रोहियों का दमन करने वाले ब्रिटिश सेनापति ह्यूरोज़ (Sir Hugh Rose) थे। अतः युग्म 1 और 2 सही सुमेलित हैं, जबकि 3 और 4 गलत सुमेलित हैं।
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फ्रांसिस्को डी अल्मेडा भारत में प्रथम पुर्तगाली गवर्नर था, जिसने 'ब्लू वाटर पॉलिसी' (शांत जल नीति) का अनुसरण करते हुए हिंद महासागर में पुर्तगाली नौसेना की सर्वोच्चता स्थापित करने का प्रयास किया ताकि एशियाई व्यापार पर नियंत्रण रखा जा सके।
2. अल्बुकर्क को भारत में पुर्तगाली साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने वर्ष 1510 में बीजापुर के आदिल शाह से गोवा को छीनकर पुर्तगाली नियंत्रण में ले लिया और क्षेत्र में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक प्रयास किया।
3. नीनो डी कुन्हा ने पुर्तगाली मुख्यालय को कोचीन से हटाकर गोवा स्थानांतरित किया तथा वर्ष 1534 में बेसिन और 1538 में हुगली के क्षेत्रों में पुर्तगाली प्रभाव का विस्तार किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल काल में चांदी के सिक्के "रुपया" का मानक वजन कितना था?
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भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन, बंगाल और पंजाब विधानसभाओं के प्रांतीय विभाजन तथा उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) एवं सिलहट में जनमत संग्रह कराने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था।
2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के तहत 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन की स्थापना का प्रावधान किया गया, तथा दोनों देशों के लिए सीमा निर्धारण हेतु सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में सीमा आयोगों (Boundary Commissions) का गठन किया गया था।
3. माउंटबेटन योजना के तहत यह भी तय किया गया था कि भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद ब्रिटिश क्राउन का भारतीय रियासतें पर सर्वोच्च अधिकार (Paramountcy) समाप्त हो जाएगा, और रियासतों को यह छूट होगी कि वे भारत या पाकिस्तान में शामिल हों अथवा अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाए रखें।
4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं को निर्धारित करने वाले रेडक्लिफ पुरस्कार (Radcliffe Award) की घोषणा 15 अगस्त 1947 से पहले ही सार्वजनिक कर दी गई थी, जिससे स्वतंत्रता के दिन दोनों नवजात राष्ट्रों में किसी भी प्रकार की हिंसा या असमंजस की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्धन राजवंश और दक्षिण भारत के राजवंशों (विशेषकर पल्लव, चालुक्य और चोल) के राजनीतिक, प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्धन के शासनकाल में बौद्ध धर्म की महायान शाखा को अत्यधिक प्रोत्साहन मिला और कन्नौज में आयोजित भव्य धर्मसभा का मुख्य उद्देश्य ह्वेनसांग की उपस्थिति में महायान सिद्धांतों का प्रचार करना तथा 'मोक्ष महापरिषद्' (प्रयाग) में सम्राट द्वारा अपनी संपूर्ण संपत्ति दान कर देना था।
2. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने वातापी (बादामी) के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय को निर्णायक रूप से पराजित किया था और इस विजय के उपलक्ष್ಯ में 'वातापीकोंड' की उपाधि धारण करते हुए महाबलीपुरम (मावलपुरम) में प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण कार्य शुरू करवाया था।
3. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय के ऐहोल अभिलेख (जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविचर्ति ने की थी) में नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन पर उसकी विजय का विस्तृत विवरण मिलता है, जिसमें चालुक्य साम्राज्य और वर्धन साम्राज्य के बीच की सीमा का उल्लेख है।
4. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने अपनी नौसैनिक शक्ति का विस्तार करते हुए मालदीव द्वीपों पर विजय प्राप्त की और श्रीलंका (सिंघल) के उत्तरी भाग पर अधिकार कर वहाँ चोल प्रांत की स्थापना की, तथा तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण करवाया जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पल्लव राजवंश और चालुक्य राजवंश के संघर्ष तथा उनके वास्तुकला एवं प्रशासनिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन् प्रथम ने अपने शासनकाल के प्रारंभिक दौर में जैन धर्म का अनुयायी होने के कारण बौद्ध धर्म का उत्पीड़न किया था, परंतु प्रसिद्ध संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उन्होंने शैव धर्म अपना लिया था।
2. महाबलीपुरम (मामलपुरम) के प्रसिद्ध 'एकात्मकम' (रथ मंदिर) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम 'महमल्ल' के शासनकाल में हुआ था, जिसमें द्रविड्र वास्तुकला की प्रारंभिक शैली स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
3. चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की विशाल सेना को पराजित किया था, जिसका जीवंत और विस्तृत विवरण हमें कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोल प्रशस्ति' में मिलता है।
4. बादामी के विरूपाक्ष मंदिर का निर्माण चालुक्य रानी लोकमहादेवी द्वारा कांचीपुरम के पल्लव शासक पर विजय के स्मारक के रूप में करवाया गया था, जो कांची के कैलाशनाथ मंदिर की वास्तुकला से प्रेरित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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