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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, भू-राजस्व प्रणालियों और सांस्कृतिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल द्वारा लागू की गई 'दहसाला' (या जब्ती) प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और उसके औसत मूल्य के आधार पर लगान का निर्धारण किया जाता था, जिसमें 'पोलज' सर्वाधिक उपजाऊ भूमि थी जिस पर प्रतिवर्ष खेती की जाती थी।
- 2. शाहजहाँ के शासनकाल के दौरान मुगल मनसबदारी व्यवस्था में 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत की गई, जिसके तहत बिना किसी जात रैंक को बढ़ाए घुड़सवारों (सवार रैंक) की संख्या दोगुनी करने की अनुमति दी गई थी।
- 3. औरंगजेब की धार्मिक और प्रशासनिक नीतियों के अंतर्गत संगीत पर राजकीय प्रतिबंध लगा दिया गया, चित्रकला को शाही संरक्षण से वंचित कर दिया गया, तथा उसने अपने शासन के शुरुआती वर्षों में ही हिन्दू प्रजा पर पुनः 'जजिया कर' आरोपित कर दिया था।
- 4. बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुके बाबरी' (बाबरनामा) की रचना मूल रूप से फारसी भाषा में की थी, जिसे बाद में उसके पौत्र अकबर के शासनकाल में अब्दुल रहीम खानखाना ने तुर्की भाषा में अनुवादित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: अकबर के शासनकाल में राजा टोडरमल ने 'दहसाला' (या जब्ती) व्यवस्था की शुरुआत की थी, जिसमें पिछले दस वर्षों (1570-1580 ई.) के औसत उत्पादन और बाजार मूल्यों के आधार पर मालगुजारी तय की जाती थी। इस व्यवस्था में भूमि को पोलज, परती, चाचर और बंजर चार श्रेणियों में बांटा गया था, जिसमें 'पोलज' सबसे उत्तम और उपजाऊ भूमि थी। कथन 2 गलत है: 'दुअस्पा-सिंहअस्पा' प्रणाली की शुरुआत शाहजहाँ ने नहीं, बल्कि उसके पिता **जहाँगीर** ने अपने मनसबदारों के सैन्य सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए की थी। कथन 3 सही है: औरंगजेब ने रूढ़िवादी इस्लामिक नीतियों के तहत दरबार में संगीत पर पाबंदी लगा दी, चित्रकला को हतोत्साहित किया और 1679 ई. में पुनः गैर-मुसलमानों पर 'जजिया कर' लागू कर दिया। कथन 4 गलत है: बाबर ने अपनी आत्मकथा 'तुजुके बाबरी' मूल रूप से अपनी मातृभाषा **तुर्की** में लिखी थी, जिसे बाद में अब्दुर रहीम खानखाना ने फारसी में अनुवादित किया था, न कि इसके विपरीत। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, 'मलिक नक्शबंद', 'अरीज़-ए-मुमालिक' और 'दीवान-ए-मुस्तखराज' विभागों/पदों से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित 'दीवान-ए-मुस्तखराज' विभाग का मुख्य कार्य राजस्व बकाये की वसूली करना और लगान भ्रष्टाचार में लिप्त आगरदारों एवं मुकद्दमों के हिसाब की जाँच करना था।
2. सल्तनत काल में 'अरीज़-ए-मुमालिक' सैन्य विभाग का प्रमुख होता था, जिसके जिम्मे सैनिकों का हुलिया रखना, घोड़ों को दागना (दाग प्रथा) और सैनिकों की समय-समय पर प्रत्यक्ष समीक्षा करना शामिल था।
3. गयासुद्दीन तुगलक ने अपने शासनकाल में 'मलिक नक्शबंद' के अधीन एक विशेष कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य किसानों को प्रत्यक्ष तकावी (सौंदार) ऋण देकर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाना था।
4. सल्तनत काल के दौरान सल्तनत की सेना में वंशानुगत सैनिकों की भर्ती को प्रोत्साहित करने और सेना की युद्धक क्षमता को मजबूत करने का श्रेय फिरोजशाह तुगलक को जाता है, जिसने सैनिकों के वेतन में नकद भुगतान की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर भूमि अनुदान (इक्ता) देना अनिवार्य कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली के "लाल किले" और "जामा मस्जिद" का निर्माण किसने करवाया था?
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विजयनगर का सबसे प्रसिद्ध उत्सव कौन सा था जिसे "महानवमी डिब्बा" से जोड़ा जाता है?
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitri) शब्द का शाब्दिक अर्थ गाय का दोहन करने वाली पुत्री से था, तथा इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार, वेदों के अध्ययन और सभा एवं समिति जैसी राजनीतिक संस्थाओं में भाग लेने का अधिकार प्राप्त था।
2. उत्तर वैदिक काल में गोत्र व्यवस्था एक संस्था के रूप में स्थापित हुई, जिसका मूल अर्थ 'वह स्थान जहाँ समूचे कुल का गोधन पाला जाता था' था, किंतु इस काल आते-आते गोत्र के अंतर्गत अंतर्गोत्र विवाह (Exogamy) पर पूर्ण प्रतिबंध लग गया।
3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं—जुताई, बुआई, कटाई और मड़ाई—का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा का उल्लेख है, जो आर्यों के उत्तर भारत से सदाानीरा (गंडक) नदी के पार पूर्व दिशा की ओर विस्तार को दर्शाती है।
4. ऋग्वेद में उल्लिखित 'दशराज युद्ध' (दस राजाओं का युद्ध) परूष्णी (रावी) नदी के तट पर लड़ा गया था, जिसमें भरत कबीले के राजा सुदास ने त्रित्सु और अन्य दस कबीले के संघ को पराजित किया था, और इस युद्ध में विश्वामित्र ने सुदास का पुरोहित के रूप में साथ दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके सामरिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल सर ह्यू रोज द्वारा झाँसी के किले को घेरे जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने कड़ा प्रतिरोध किया और तात्या टोपे के नेतृत्व में आई राहत सेना के सहयोग के बिना ही वे गुप्त रूप से झाँसी से निकलकर कालपी पहुँचीं।
2. कालपी में रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की संयुक्त सेनाओं को ह्यू रोज की सेना से पराजय का सामना करना पड़ा, जिसके उपरांत दोनों ने एक अत्यंत साहसिक और तीव्र गति वाले अभियान के तहत ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को अंग्रेजों की शरण में जाने के लिए विवश कर दिया।
3. ग्वालियर पर अधिकार करने के बाद तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर में एक सुदृढ़ रक्षात्मक पंक्ति तैयार की, किंतु 18 जून 1858 को ग्वालियर के समीप कोटार की सराय में ब्रिटिश सेना के साथ हुए अंतिम निर्णायक युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं।
4. झाँसी और ग्वालियर के पतन के बाद तात्या टोपे ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके उपरांत ब्रिटिश सरकार ने उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (पोर्ट ब्लेयर) में आजीवन कारावास की सजा दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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